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  • 1सी.वी. रामन का जीवन और वैज्ञानिक योगदान
  • 2'रामन प्रभाव' की मूल समझ
  • 3जीवनी-निबंध की विशेषताएँ
  • 4भारतीय विज्ञान का इतिहास
  • 5वैज्ञानिक चेतना का महत्व
💡
Why this chapter matters
भारत के पहले एशियाई नोबेल विजेता वैज्ञानिक सी.वी. रामन का जीवन-संघर्ष और 'रामन प्रभाव' की खोज। वैज्ञानिक चेतना, राष्ट्र-गौरव, और तर्क-शक्ति का प्रेरक चित्रण।

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वैज्ञानिक चेतना के वाहक — चंद्रशेखर वेंकट रामन — कक्षा 9 हिन्दी B (स्पर्श)

"मेरा सबसे बड़ा सपना था — भारत को विज्ञान की दृष्टि से एक मज़बूत राष्ट्र बनाना।" — सी.वी. रामन

1. पाठ-परिचय

'वैज्ञानिक चेतना के वाहक — चंद्रशेखर वेंकट रामन' धीरंजन मालवे द्वारा रचित एक जीवनी-निबंध है। इसमें भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर वेंकट रामन (1888-1970) का जीवन-परिचय दिया गया है। वे भौतिक विज्ञान में 1930 का नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई थे।

मुख्य भाव

  • वैज्ञानिक चेतना और तर्क-शक्ति
  • भारतीय वैज्ञानिक का गौरव
  • कठिनाइयों पर विजय
  • स्वदेशी विज्ञान का विकास
  • 'रामन प्रभाव' की खोज

सी.वी. रामन का योगदान

  • रामन प्रभाव (Raman Effect) — प्रकाश के विकीर्णन का अध्ययन
  • 1930 का नोबेल पुरस्कार (भौतिकी)
  • भारतीय विज्ञान का अंतर्राष्ट्रीय स्थापना

2. लेखक-परिचय — धीरंजन मालवे

जीवनवृत्त

  • जन्म: 1952, बिहार
  • पेशा: विज्ञान-लेखक, पत्रकार
  • विशेष: वैज्ञानिक विषयों को हिन्दी में लोकप्रिय बनाने वाले लेखक

प्रमुख कार्य

  • विज्ञान को सरल भाषा में लोगों तक पहुँचाना
  • कई वैज्ञानिकों की जीवनियाँ लिखीं
  • 'विज्ञान प्रगति' पत्रिका में लेखन
  • 'भारतीय विज्ञानी', 'विज्ञान पुरोधा' जैसी पुस्तकें

लेखन-शैली

  • सरल, स्पष्ट हिन्दी
  • तथ्यात्मक
  • रोचक प्रस्तुति
  • वैज्ञानिक चेतना का प्रसार

3. पाठ का सारांश

बचपन और प्रारंभिक शिक्षा

जन्म:

  • 7 नवंबर 1888, तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु)
  • पिता चंद्रशेखर अय्यर — गणित और भौतिकी के प्राध्यापक
  • माता पार्वती अम्मल — पारंपरिक तमिल ब्राह्मण परिवार

पारिवारिक माहौल:

  • घर में विज्ञान और साहित्य का माहौल
  • पिता का प्रभाव — विज्ञान-प्रेम
  • 4 बच्चों में दूसरे (सबसे प्रतिभाशाली)
  • उनके भाई सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर — भी नोबेल विजेता (1983)

अद्भुत प्रतिभा:

  • 11 वर्ष की उम्र में मैट्रिक पास
  • 13 वर्ष में बी.ए. (फिजिक्स ऑनर्स) में दाखिला
  • सेंट अलोयसियस कॉलेज, मद्रास
  • 16 वर्ष में बी.ए. में स्वर्ण-पदक
  • एम.ए. भौतिक विज्ञान में

शोध-यात्रा का प्रारंभ

इंडियन ऑडिट और एकाउंट्स सर्विस (IAAS):

  • 1907 — सरकारी नौकरी (वित्त विभाग)
  • कलकत्ता में पद ग्रहण
  • दिन में दफ़्तर, रात में शोध

इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन ऑफ़ साइंस (IACS):

  • कलकत्ता का प्रसिद्ध शोध-संस्थान
  • संस्थापक: डॉ. महेन्द्रलाल सरकार
  • रामन यहाँ शाम-रात में काम करते
  • ध्वनि और प्रकाश पर शोध

प्रकाश पर शोध

ध्वनि-शास्त्र पर पहले काम:

  • भारतीय वाद्य-यंत्रों की आवाज़ का विश्लेषण
  • तानपूरा, वीणा, मृदंगम पर शोध
  • 'द फिजिक्स ऑफ़ बोवड स्ट्रिंग इन्स्ट्रूमेंट्स'

1917 — प्रोफ़ेसर:

  • कलकत्ता विश्वविद्यालय में पाल्ट प्रोफ़ेसर बने
  • सरकारी नौकरी छोड़ी
  • शोध के लिए पूर्ण समर्पण

'रामन प्रभाव' की खोज

सागर-यात्रा (1921):

  • रामन ब्रिटेन से कलकत्ता लौट रहे थे
  • भूमध्य सागर में जहाज़ पर थे
  • सागर का गहरा नीला रंग देखकर सोचते रहे — 'पानी का यह रंग कहाँ से आता?'
  • आम धारणा: आकाश के प्रतिबिंब से
  • रामन का सवाल: 'फिर रात में पानी क्यों नीला नहीं?'

बुनियादी प्रश्न:

  • प्रकाश पानी से कैसे टकराता?
  • क्या प्रकाश की प्रकृति बदलती है?
  • अणुओं के साथ क्या होता?

प्रयोग शुरू (1921-28):

  • कलकत्ता में प्रयोगशाला
  • सस्ते उपकरण, स्वदेशी सेटअप
  • विभिन्न पदार्थों पर प्रकाश डालना
  • स्पेक्ट्रोस्कोप से विश्लेषण

सहयोगी:

  • के.एस. कृष्णन
  • अन्य भारतीय छात्र
  • सीमित संसाधन, असीम लगन

28 फरवरी 1928 — ऐतिहासिक दिन

खोज का दिन:

  • रामन और कृष्णन ने प्रकाश के विकीर्णन का नया रूप खोजा
  • एक रंगीन प्रकाश पदार्थ से गुज़रने पर अपनी तरंगदैर्ध्य बदल देता है
  • यह 'रामन प्रभाव' (Raman Effect)
  • अणुओं की संरचना का अध्ययन संभव

अंतर्राष्ट्रीय स्वीकृति:

  • 16 मार्च 1928 — 'नेचर' पत्रिका में प्रकाशन
  • विश्व-स्तर पर हलचल
  • अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय में स्वीकृति

राष्ट्रीय गौरव — हर वर्ष 28 फरवरी

  • 28 फरवरी = 'राष्ट्रीय विज्ञान दिवस' (भारत में)
  • 1986 से मनाया जाता
  • रामन प्रभाव की खोज के सम्मान में

1930 — नोबेल पुरस्कार

नोबेल विजेता:

  • 1930 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार
  • पहले एशियाई जिन्होंने विज्ञान में नोबेल जीता
  • पहले भारतीय (विज्ञान में)
  • स्टॉकहोम में पुरस्कार समारोह

विश्व का सम्मान:

  • स्वदेशी प्रयोगों से नोबेल
  • भारतीय विज्ञान का अंतर्राष्ट्रीय स्थापन
  • 'गुलाम भारत' से नोबेल — अद्भुत उपलब्धि

बाद का जीवन और कार्य

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस, बेंगलुरु:

  • 1933-37 — निदेशक
  • संस्थान को विश्व-स्तर पर पहचान दिलाई

रामन रिसर्च इंस्टीट्यूट, बेंगलुरु:

  • 1948 में स्थापित
  • स्वतंत्र शोध-संस्थान
  • आज भी सक्रिय

भारत रत्न:

  • 1954 — भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान
  • स्वतंत्र भारत के सबसे महान वैज्ञानिकों में से

मृत्यु:

  • 21 नवंबर 1970, बेंगलुरु
  • 82 वर्ष की आयु में

4. केन्द्रीय भाव और संदेश

मुख्य मुद्दे

  1. वैज्ञानिक चेतना: सवाल पूछना — विज्ञान का मूल।
  2. तर्क-शक्ति: तथ्यों पर आधारित निष्कर्ष।
  3. राष्ट्र-गौरव: स्वदेशी विज्ञान का अंतर्राष्ट्रीय स्थापन।
  4. दृढ़ निश्चय: सीमित संसाधनों में बड़ी खोज।
  5. युवा-प्रेरणा: हर भारतीय विद्यार्थी के लिए आदर्श।

सी.वी. रामन के गुण

  • तीव्र बुद्धि
  • वैज्ञानिक जिज्ञासा
  • अदम्य उत्साह
  • भारतीय आत्म-गौरव
  • सरल जीवन

5. साहित्यिक विशेषताएँ

विधा

  • जीवनी-निबंध (Biography Essay)
  • तथ्यात्मक
  • प्रेरक

भाषा

  • सरल खड़ी बोली
  • वैज्ञानिक शब्दावली (आवश्यक)
  • तार्किक प्रस्तुति
  • सुगम

शैली

  • कालक्रमिक
  • विश्लेषणात्मक
  • वर्णनात्मक
  • प्रेरक

अलंकार

  • उपमा: 'रामन प्रभाव' = प्रकाश की नई दृष्टि
  • रूपक: 'वैज्ञानिक चेतना का वाहक'
  • अनुप्रास: 'चंद्रशेखर चेतना'

रस

  • वीर रस — संघर्ष का चित्रण
  • अद्भुत रस — खोज का रोमांच
  • शांत रस — गौरव का भाव

6. 'रामन प्रभाव' — सरल व्याख्या

क्या है?

  • जब प्रकाश किसी पदार्थ से गुज़रता है
  • अधिकांश प्रकाश की तरंगदैर्ध्य नहीं बदलती
  • पर थोड़े प्रकाश की तरंगदैर्ध्य बदल जाती है
  • यही 'रामन विकीर्णन' / 'रामन प्रभाव'

कैसे काम करता?

  • प्रकाश-कण (फोटोन) अणु से टकराते
  • अणुओं की कंपन-अवस्था बदलती
  • फोटोन की ऊर्जा बदलती
  • तरंगदैर्ध्य बदल जाती

अनुप्रयोग

  • रसायन-शास्त्र: अणुओं की संरचना का अध्ययन
  • जीव-विज्ञान: कोशिकाओं के अंदर पदार्थ की पहचान
  • औषधि: गोलियों की शुद्धता जाँचना
  • खनिज-शास्त्र: खनिजों की पहचान
  • पुरातत्व: प्राचीन वस्तुओं का अध्ययन
  • अपराध-विज्ञान: फ़ोरेंसिक जाँच

आधुनिक उपकरण

  • रामन स्पेक्ट्रोस्कोपी — आज विश्व-भर में प्रयोग
  • लेज़र रामन: अति-सूक्ष्म अध्ययन
  • पोर्टेबल रामन: मोबाइल जाँच-यंत्र

7. सी.वी. रामन की अन्य उपलब्धियाँ

वैज्ञानिक खोजें

  • रामन प्रभाव (1928)
  • ध्वनि-शास्त्र (Indian musical instruments)
  • क्रिस्टल-भौतिकी
  • कलर-विज्ञान
  • अल्ट्रासाउंड

सम्मान

  • 1930: नोबेल पुरस्कार (भौतिकी)
  • 1929: नाइट (ब्रिटिश)
  • 1941: फ़्रैंकलिन मेडल
  • 1954: भारत रत्न (भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान)
  • 1957: लेनिन शांति पुरस्कार

संस्थागत योगदान

  • IACS, कलकत्ता
  • IISc, बेंगलुरु
  • रामन रिसर्च इंस्टीट्यूट
  • भारतीय विज्ञान कांग्रेस

8. परिवार और प्रभाव

भाई — सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर

  • 1983 का नोबेल पुरस्कार (भौतिकी)
  • 'चंद्रशेखर सीमा' की खोज
  • अमेरिका में काम
  • एक ही परिवार में दो नोबेल

बच्चे

  • वी. रामन (पुत्र) — खुद वैज्ञानिक
  • राधा रामन — पुत्र (माइक्रोबायोलॉजिस्ट)
  • दोनों भारतीय विज्ञान में योगदान

प्रशिष्य

  • के.एस. कृष्णन — रामन के सहयोगी
  • भाभा, साहा, चंद्रशेखर — सब रामन की पीढ़ी के
  • IISc से कई वैज्ञानिक निकले

9. आज की प्रासंगिकता

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (28 फरवरी)

  • रामन प्रभाव की खोज के सम्मान में
  • विद्यालयों, कॉलेजों में कार्यक्रम
  • विज्ञान को बढ़ावा देने का दिन

आज का भारत और विज्ञान

  • ISRO के सफल मिशन (चंद्रयान-3, मंगलयान)
  • भारत में 17 लाख+ वैज्ञानिक
  • IITs, IIScs विश्व-स्तरीय
  • रामन रिसर्च इंस्टीट्यूट आज भी सक्रिय

विज्ञान-शिक्षा

  • 'अटल टिंकरिंग लैब' — स्कूलों में
  • 'मेक इन इंडिया' — स्वदेशी विज्ञान
  • NEP 2020 — विज्ञान-शिक्षा पर बल

रामन का संदेश आज

  • वैज्ञानिक चेतना विकसित करें
  • सवाल पूछना सीखें
  • स्वदेशी संसाधनों से बड़ा काम संभव
  • विज्ञान को सम्मान दें

10. प्रमुख उद्धरण

"वैज्ञानिक चेतना के बिना कोई राष्ट्र महान नहीं बन सकता।"

"सवाल पूछना — विज्ञान का पहला कदम।"

"मेरी सबसे बड़ी प्रयोगशाला थी — मेरा जिज्ञासु मन।"

"भारत को विश्व-विज्ञान में अग्रणी बनाना मेरा सपना।"


11. समापन

'वैज्ञानिक चेतना के वाहक — सी.वी. रामन' केवल एक जीवनी-निबंध नहीं — यह भारतीय वैज्ञानिक गौरव का दस्तावेज़ है। धीरंजन मालवे ने डॉ. रामन के जीवन के मुख्य पड़ावों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है — गरीब तमिल परिवार से नोबेल विजेता तक की यात्रा। 'रामन प्रभाव' की खोज (1928) — एक भारतीय वैज्ञानिक का स्वदेशी प्रयोगों से अंतर्राष्ट्रीय सम्मान। आज भी 28 फरवरी 'राष्ट्रीय विज्ञान दिवस' के रूप में मनाया जाता। कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए यह पाठ — वैज्ञानिक चेतना, राष्ट्र-गौरव, और जीवन-संघर्ष का अद्भुत स्रोत।

Key formulas & results

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वैज्ञानिक
डॉ. सी.वी. रामन — चंद्रशेखर वेंकट रामन (7 नवंबर 1888 – 21 नवंबर 1970)
तिरुचिरापल्ली में जन्म
नोबेल पुरस्कार
1930 का भौतिकी का नोबेल — पहले एशियाई विज्ञान-नोबेल विजेता
मुख्य खोज
'रामन प्रभाव' (Raman Effect) — 28 फरवरी 1928
प्रकाश के विकीर्णन का अध्ययन
भारत रत्न
1954
स्वतंत्र भारत का प्रथम वैज्ञानिक भारत रत्न विजेता
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस
28 फरवरी (1986 से)
रामन प्रभाव की खोज के सम्मान में
सहयोगी
के.एस. कृष्णन
रामन प्रभाव की खोज में साथ
प्रमुख संस्थान
IACS कलकत्ता; IISc बेंगलुरु; रामन रिसर्च इंस्टीट्यूट (1948)
भाई
सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर — 1983 का नोबेल विजेता
एक परिवार में दो नोबेल
लेखक
धीरंजन मालवे — विज्ञान-लेखक, पत्रकार
⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
रामन प्रभाव की तिथि गलत
28 फरवरी 1928 — कलकत्ता में खोज। 1986 से इस दिन को 'राष्ट्रीय विज्ञान दिवस' के रूप में मनाया जाता।
WATCH OUT
नोबेल पुरस्कार का वर्ष गलत
1930 का भौतिकी का नोबेल — रामन प्रभाव (1928) की खोज के लिए। पहले एशियाई विज्ञान-नोबेल विजेता।
WATCH OUT
रामन के भाई की पहचान भूलना
सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर (1910-1995) — सी.वी. रामन के भतीजे (भाई नहीं)। 1983 का भौतिकी का नोबेल — 'चंद्रशेखर सीमा' के लिए।
WATCH OUT
जन्म-स्थान गलत
तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु) — 7 नवंबर 1888। पिता चंद्रशेखर अय्यर भौतिकी के प्राध्यापक।

NCERT exercises

Every NCERT exercise from this chapter — what it covers and how many questions to expect.

मौखिक
मौखिक
वैज्ञानिक का जीवन, खोज, सम्मान
4
Questions
लिखित
लिखित
रामन प्रभाव, खोज की कहानी, राष्ट्रीय गौरव
6
Questions
भाषा
भाषा
वैज्ञानिक शब्दावली, जीवनी-शैली
3
Questions

Practice problems

Work through this chapter's problems as a readiness check — reveal each solution, mark yourself honestly, and get your gap report at the end.

Readiness check

Are you exam-ready for वैज्ञानिक चेतना के वाहक — चंद्रशेखर वेंकट रामन (धीरंजन मालवे) — स्पर्श 4?

5 problems from this chapter. Try each one, reveal the worked solution, mark yourself honestly — get your gap report at the end.

5 questions~4 min

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • वैज्ञानिक: डॉ. सी.वी. रामन — चंद्रशेखर वेंकट रामन
  • जन्म: 7 नवंबर 1888, तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु)
  • मृत्यु: 21 नवंबर 1970, बेंगलुरु
  • पिता: चंद्रशेखर अय्यर (भौतिकी के प्राध्यापक)
  • मुख्य खोज: 'रामन प्रभाव' (28 फरवरी 1928)
  • नोबेल पुरस्कार: 1930 (भौतिकी) — पहले एशियाई विज्ञान-नोबेल
  • भारत रत्न: 1954
  • अन्य सम्मान: फ्रैंकलिन मेडल 1941, लेनिन शांति 1957
  • सहयोगी: के.एस. कृष्णन
  • प्रमुख संस्थान: IACS कलकत्ता (शोध), IISc बेंगलुरु (निदेशक 1933-37), रामन रिसर्च इंस्टीट्यूट (1948)
  • भतीजा: सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर (नोबेल 1983)
  • राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: 28 फरवरी (1986 से)
  • लेखक: धीरंजन मालवे (विज्ञान-लेखक, पत्रकार)
  • विधा: जीवनी-निबंध
  • रामन प्रभाव का अनुप्रयोग: रामन स्पेक्ट्रोस्कोपी, रसायन-शास्त्र, औषधि, खनिज, फ़ोरेंसिक

Bihar (BSEB) marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Typical chapter weightage: 5–6 अंक प्रति बोर्ड पेपर

Question typeMarks eachTypical countWhat it tests
बहुविकल्पीय / अति लघु11–2नोबेल वर्ष; खोज तिथि; जन्म-स्थान; सहयोगी
लघु उत्तरीय31रामन प्रभाव; खोज-कथा; जीवन-संघर्ष
दीर्घ उत्तरीय50–1वैज्ञानिक चेतना; राष्ट्र-गौरव; प्रेरणा
Prep strategy
  • सी.वी. रामन — जन्म 7 नवंबर 1888, तिरुचिरापल्ली; मृत्यु 21 नवंबर 1970, बेंगलुरु
  • नोबेल 1930 (भौतिकी); भारत रत्न 1954
  • रामन प्रभाव की खोज: 28 फरवरी 1928
  • राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: 28 फरवरी (1986 से)
  • सहयोगी: के.एस. कृष्णन
  • संस्थान: IACS कलकत्ता; IISc बेंगलुरु; रामन इंस्टीट्यूट 1948
  • भतीजा: सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर (नोबेल 1983)

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (28 फरवरी)

रामन प्रभाव की खोज के सम्मान में — 1986 से। विद्यालयों, संस्थानों में विज्ञान कार्यक्रम।

रामन स्पेक्ट्रोस्कोपी

आधुनिक रसायन, जीव-विज्ञान, औषधि, खनिज-विश्लेषण में व्यापक प्रयोग। पोर्टेबल रामन यंत्र आज उपलब्ध।

रामन रिसर्च इंस्टीट्यूट, बेंगलुरु

1948 में स्थापित — आज भी सक्रिय शोध-संस्थान। खगोल-भौतिकी, थ्योरेटिकल फिजिक्स।

IISc बेंगलुरु

रामन ने 1933-37 निदेशक के रूप में संस्थान को विश्व-स्तर पर पहचान दिलाई। आज भारत का प्रमुख विज्ञान संस्थान।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

1
रामन का परिचय — पहले एशियाई विज्ञान-नोबेल विजेता
2
रामन प्रभाव की तिथि (28 फरवरी 1928) ज़रूर लिखें
3
नोबेल वर्ष (1930) और भारत रत्न (1954) उल्लेख
4
सागर-यात्रा से खोज की कहानी रोचक रूप में
5
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का संदर्भ
6
वैज्ञानिक चेतना और राष्ट्र-गौरव पर बल
7
रामन प्रभाव की सरल व्याख्या

Going beyond the textbook

For olympiad aspirants and curious learners — topics that build on this chapter.

STRETCH
रामन प्रभाव की क्वांटम मेकैनिकल व्याख्या
STRETCH
रेले विकीर्णन बनाम रामन विकीर्णन — तुलना
STRETCH
रामन रिसर्च इंस्टीट्यूट के समकालीन शोध
STRETCH
भारतीय विज्ञान का इतिहास — जगदीश चंद्र बोस, मेघनाद साहा, होमी भाभा से अब्दुल कलाम तक
STRETCH
सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर का 'चंद्रशेखर सीमा' और नोबेल 1983
STRETCH
1930 के दशक के अन्य नोबेल विजेता (आइंस्टीन, हाइज़ेनबर्ग)

Where else this chapter is tested

CBSE board isn't the only one — other exams test this chapter too.

CBSE Board Class 9उच्च
हिन्दी ओलिंपियाडमध्यम
विज्ञान ओलिंपियाडउच्च — रामन प्रभाव विशेष
UGC NET हिन्दीमध्यम
UPSC Science & Techउच्च — भारतीय वैज्ञानिक

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

1920 के दशक में प्रकाश-विकीर्णन पर 'रेले विकीर्णन' का सिद्धांत प्रचलित था — आकाश के नीले रंग की व्याख्या। रामन ने अनुभव किया कि यह सिद्धांत पूर्ण नहीं — पानी और अन्य पदार्थों में कुछ अलग होता है। 7 साल के शोध से उन्होंने नया प्रभाव खोजा।

नहीं। 1930 के बाद उन्होंने क्रिस्टल-भौतिकी, अल्ट्रासाउंड, कलर-विज्ञान पर काम किया। 1933-37 में IISc के निदेशक। 1948 में रामन रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना। मृत्यु तक (1970) काम जारी रखा।

सी.वी. रामन के भतीजे सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर को 1983 में भौतिकी का नोबेल मिला — 'चंद्रशेखर सीमा' के लिए (तारों की मृत्यु पर शोध)। चंद्रशेखर अमेरिका में रहे (शिकागो विश्वविद्यालय)। दोनों भारतीय मूल के — 'विज्ञान का दीपावली परिवार'।
Verified by the tuition.in editorial team
Last reviewed on 20 May 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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