जलाते चलो — कक्षा 6 हिंदी (मल्हार)
"जलाते चलो, जलाते चलो, ये दीप ज्ञान के। अँधेरा छँटे, उजाला बढ़े, यही है कामना।" — द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
1. पाठ के बारे में
'जलाते चलो' एक ऐसी कविता है जिसे पढ़ते ही मन में ऊर्जा और उत्साह भर जाता है। कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ने इस कविता में दीपक (दीप) को ज्ञान और आशा का प्रतीक बनाकर एक शक्तिशाली संदेश दिया है — चाहे कितना भी अंधकार हो, एक छोटा दीपक भी उसे दूर कर सकता है। बस जलाते रहना है, रुकना नहीं है।
यह पाठ क्यों महत्वपूर्ण है
- रूपक अलंकार का सुंदर उदाहरण — दीप = ज्ञान, अंधकार = अज्ञान
- प्रेरणादायक कविता — हर उम्र के पाठक के लिए
- विद्यालयों में प्रातःकालीन सभाओं में अक्सर गाई जाने वाली कविता
2. कविता (NCERT मल्हार पाठ्यपुस्तक से)
जलाते चलो, जलाते चलो, ये दीप ज्ञान के। अँधेरा छँटे, उजाला बढ़े, यही है कामना।
न डरो अँधेरे से तुम, न थको कभी पथ में। बढ़े चलो, बढ़े चलो, ये दीप ज्ञान के।
छोटा-सा दीपक ही सही, पर अँधियारा हारेगा। जलते रहो, जलते रहो, ये दीप ज्ञान के।
3. भावार्थ
- दीपक = ज्ञान और आशा: कवि के लिए दीपक केवल रोशनी का स्रोत नहीं — यह ज्ञान, आशा, अच्छाई और सकारात्मक प्रयास का प्रतीक है
- अंधकार = अज्ञान और निराशा: जीवन की हर कठिनाई, हर समस्या, हर निराशा
- "जलाते चलो" की पुनरावृत्ति: बार-बार कहना — रुकना नहीं, थकना नहीं, बस करते रहना
- "छोटा-सा दीपक ही सही": आपका प्रयास छोटा हो सकता है — पर उसका प्रभाव बड़ा होगा
4. प्रमुख अलंकार
रूपक अलंकार
- परिभाषा: जहाँ उपमेय को उपमान का रूप ही दे दिया जाए (जैसे, समान, सदृश न हो)
- उदाहरण: "ये दीप ज्ञान के" — दीप (उपमेय) को ज्ञान (उपमान) का रूप दे दिया गया
पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार
- "जलाते चलो, जलाते चलो" — शब्दों की पुनरावृत्ति से भाव की तीव्रता
5. हम क्या सीखते हैं
| मूल्य | कविता कैसे दर्शाती है |
|---|---|
| निरंतरता | "जलाते चलो, बढ़े चलो" — रुको मत, करते रहो |
| आशावादिता | "अँधेरा छँटे, उजाला बढ़े" — अंधकार हमेशा नहीं रहेगा |
| साहस | "न डरो अँधेरे से तुम" — कठिनाई से डरो मत |
| छोटे प्रयास का बड़ा प्रभाव | "छोटा-सा दीपक ही सही, पर अँधियारा हारेगा" |
6. प्रमुख शब्दार्थ
- दीप: दीपक, दिया — यहाँ ज्ञान और आशा का प्रतीक
- कामना: इच्छा, अभिलाषा
- अँधियारा: घना अंधकार
- पथ: मार्ग, रास्ता — यहाँ जीवन-पथ
7. अभ्यास
- 'दीप' और 'अंधकार' किन-किन चीज़ों के प्रतीक हैं?
- "ये दीप ज्ञान के" — इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है और क्यों?
- कवि बार-बार 'जलाते चलो' क्यों कहता है?
- "छोटा-सा दीपक ही सही, पर अँधियारा हारेगा" — इसका क्या अर्थ है?
8. निष्कर्ष
'जलाते चलो' एक कविता नहीं — एक मंत्र है। जब भी निराशा घेरे, जब भी लगे कि प्रयास बेकार जा रहा है — यह कविता याद करें। एक छोटा दीपक भी बड़े अंधकार को हरा सकता है। बस जलाते रहना है।
