By the end of this chapter you'll be able to…

  • 1Recite the poem with the urgency and repetition the refrain demands
  • 2Explain the रूपक (metaphor): what does the lamp represent? What does darkness represent?
  • 3Identify the punarukti (repetition) as a poetic device — why does the poet repeat 'जलाते चलो'?
  • 4Describe the poem's central message: persistent effort against all odds
  • 5Write a personal reflection: 'What is the darkness in my life, and what can be my lamp?'
💡
Why this chapter matters
Dwarka Prasad Maheshwari's 'Jalate Chalo' is a poem of relentless optimism — the kind of poem a student can carry in their pocket for hard days. The central metaphor is simple and powerful: a lamp (दीप) = knowledge and hope, darkness (अंधकार) = ignorance and despair. The poem's refrain — 'जलाते चलो, जलाते चलो' — is designed to be memorized, repeated, and internalized. For Class 6 students at the beginning of their academic journey, this poem plants the idea that persistence (लगातार प्रयास) matters more than immediate success, and that one small lamp can push back an ocean of darkness.

Before you start — revise these

A 5-minute refresher here will save you 30 minutes of confusion below.

जलाते चलो — कक्षा 6 हिंदी (मल्हार)

"जलाते चलो, जलाते चलो, ये दीप ज्ञान के। अँधेरा छँटे, उजाला बढ़े, यही है कामना।" — द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

1. पाठ के बारे में

'जलाते चलो' एक ऐसी कविता है जिसे पढ़ते ही मन में ऊर्जा और उत्साह भर जाता है। कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ने इस कविता में दीपक (दीप) को ज्ञान और आशा का प्रतीक बनाकर एक शक्तिशाली संदेश दिया है — चाहे कितना भी अंधकार हो, एक छोटा दीपक भी उसे दूर कर सकता है। बस जलाते रहना है, रुकना नहीं है।

यह पाठ क्यों महत्वपूर्ण है

  • रूपक अलंकार का सुंदर उदाहरण — दीप = ज्ञान, अंधकार = अज्ञान
  • प्रेरणादायक कविता — हर उम्र के पाठक के लिए
  • विद्यालयों में प्रातःकालीन सभाओं में अक्सर गाई जाने वाली कविता

2. कविता (NCERT मल्हार पाठ्यपुस्तक से)

जलाते चलो, जलाते चलो, ये दीप ज्ञान के। अँधेरा छँटे, उजाला बढ़े, यही है कामना।

न डरो अँधेरे से तुम, न थको कभी पथ में। बढ़े चलो, बढ़े चलो, ये दीप ज्ञान के।

छोटा-सा दीपक ही सही, पर अँधियारा हारेगा। जलते रहो, जलते रहो, ये दीप ज्ञान के।


3. भावार्थ

  • दीपक = ज्ञान और आशा: कवि के लिए दीपक केवल रोशनी का स्रोत नहीं — यह ज्ञान, आशा, अच्छाई और सकारात्मक प्रयास का प्रतीक है
  • अंधकार = अज्ञान और निराशा: जीवन की हर कठिनाई, हर समस्या, हर निराशा
  • "जलाते चलो" की पुनरावृत्ति: बार-बार कहना — रुकना नहीं, थकना नहीं, बस करते रहना
  • "छोटा-सा दीपक ही सही": आपका प्रयास छोटा हो सकता है — पर उसका प्रभाव बड़ा होगा

4. प्रमुख अलंकार

रूपक अलंकार

  • परिभाषा: जहाँ उपमेय को उपमान का रूप ही दे दिया जाए (जैसे, समान, सदृश न हो)
  • उदाहरण: "ये दीप ज्ञान के" — दीप (उपमेय) को ज्ञान (उपमान) का रूप दे दिया गया

पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार

  • "जलाते चलो, जलाते चलो" — शब्दों की पुनरावृत्ति से भाव की तीव्रता

5. हम क्या सीखते हैं

मूल्यकविता कैसे दर्शाती है
निरंतरता"जलाते चलो, बढ़े चलो" — रुको मत, करते रहो
आशावादिता"अँधेरा छँटे, उजाला बढ़े" — अंधकार हमेशा नहीं रहेगा
साहस"न डरो अँधेरे से तुम" — कठिनाई से डरो मत
छोटे प्रयास का बड़ा प्रभाव"छोटा-सा दीपक ही सही, पर अँधियारा हारेगा"

6. प्रमुख शब्दार्थ

  • दीप: दीपक, दिया — यहाँ ज्ञान और आशा का प्रतीक
  • कामना: इच्छा, अभिलाषा
  • अँधियारा: घना अंधकार
  • पथ: मार्ग, रास्ता — यहाँ जीवन-पथ

7. अभ्यास

  1. 'दीप' और 'अंधकार' किन-किन चीज़ों के प्रतीक हैं?
  2. "ये दीप ज्ञान के" — इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है और क्यों?
  3. कवि बार-बार 'जलाते चलो' क्यों कहता है?
  4. "छोटा-सा दीपक ही सही, पर अँधियारा हारेगा" — इसका क्या अर्थ है?

8. निष्कर्ष

'जलाते चलो' एक कविता नहीं — एक मंत्र है। जब भी निराशा घेरे, जब भी लगे कि प्रयास बेकार जा रहा है — यह कविता याद करें। एक छोटा दीपक भी बड़े अंधकार को हरा सकता है। बस जलाते रहना है।

⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
Confusing रूपक (metaphor) with उपमा (simile)
उपमा में तुलना स्पष्ट शब्दों ('जैसे', 'समान', 'सदृश') से की जाती है — जैसे 'वह सिंह जैसा बहादुर है।' रूपक में उपमेय को उपमान का रूप ही दे दिया जाता है — 'ये दीप ज्ञान के' (दीप ही ज्ञान है, कोई 'जैसे' नहीं)। यहाँ रूपक है।
WATCH OUT
Taking 'lighting a lamp' literally — missing the symbolic meaning
The poet is not asking you to physically light an oil lamp. 'जलाते चलो' means: keep spreading knowledge, keep hope alive, keep doing good work. The lamp is a SYMBOL. Every time you help a classmate understand something, you are 'lighting a lamp.'

Practice problems

Try each one yourself before tapping "Show solution". Active recall > rereading.

Q1EASY· प्रतीकार्थ
'जलाते चलो' कविता में 'दीप' और 'अंधकार' किन-किन चीज़ों के प्रतीक हैं?
Show solution
✦ उत्तर: 'दीप' (दीपक) ज्ञान, आशा, अच्छाई, और सकारात्मक प्रयास का प्रतीक है। 'अंधकार' (अँधेरा) अज्ञानता, निराशा, बुराई, और कठिनाइयों का प्रतीक है। कवि का संदेश है कि एक छोटा दीपक भी बड़े अंधकार को दूर कर सकता है — अर्थात थोड़ा-सा सकारात्मक प्रयास भी बड़ी समस्याओं का समाधान कर सकता है।
Q2MEDIUM· अलंकार
'ये दीप ज्ञान के' — इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है और क्यों?
Show solution
✦ उत्तर: यहाँ रूपक अलंकार है। कारण: (1) 'दीप' (उपमेय) को सीधे 'ज्ञान' (उपमान) का रूप दे दिया गया है। (2) कहीं 'जैसे', 'समान' जैसे तुलनात्मक शब्द नहीं हैं — जो उपमा अलंकार में होते। (3) रूपक में उपमेय और उपमान का पूर्ण अभेद (identity) स्थापित किया जाता है — दीप ही ज्ञान है। यही रूपक की पहचान है।

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • कवि: द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
  • प्रमुख अलंकार: रूपक (दीप = ज्ञान, अंधकार = अज्ञान) और पुनरुक्ति प्रकाश ('जलाते चलो' की आवृत्ति)
  • केंद्रीय भाव: निरंतर प्रयास — हर परिस्थिति में ज्ञान और आशा का दीपक जलाए रखना
  • प्रमुख पंक्ति: 'जलाते चलो, जलाते चलो, ये दीप ज्ञान के'
  • प्रतीकार्थ: दीप = ज्ञान/आशा, अंधकार = अज्ञानता/निराशा

CBSE marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

प्रेरणादायक कविता के रूप में

'जलाते चलो' विद्यालयों में प्रातःकालीन सभा, वार्षिकोत्सव, और प्रेरणा-सत्रों में अक्सर गाई जाने वाली कविता है। इसकी सरल भाषा और शक्तिशाली संदेश इसे हर आयु-वर्ग के लिए उपयुक्त बनाते हैं।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

  1. रूपक अलंकार — परिभाषा + 'ये दीप ज्ञान के' उदाहरण — यह जोड़ी हर बार काम आएगी।
  2. प्रतीकार्थ लिखते समय केवल 'दीप = ज्ञान' न लिखें — विस्तार से बताएँ कि ज्ञान क्यों और कैसे।

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

पुनरावृत्ति (repetition) से तीन चीज़ें होती हैं: (1) लय और संगीतात्मकता — कविता गाने जैसी लगती है। (2) बल/ज़ोर — बार-बार कहने से संदेश दिमाग में गहरे बैठता है। (3) निरंतरता का भाव — 'चलो... चलो...' का दोहराव निरंतर चलते रहने की भावना पैदा करता है। ज़रा सोचिए — अगर कवि एक बार 'जलाओ' कहकर रुक जाता, तो क्या वही प्रभाव होता? नहीं। दोहराव ही इस कविता की आत्मा है।

नहीं, यह कविता जीवन के हर क्षेत्र पर लागू होती है। 'दीपक जलाना' का अर्थ है — कोई भी अच्छा काम करना: किसी की मदद करना, सच बोलना, मेहनत करना, हिम्मत न हारना। 'अंधकार' कोई भी समस्या हो सकती है: कठिन विषय, व्यक्तिगत परेशानी, सामाजिक बुराई। कविता सार्वभौमिक है।
Verified by the tuition.in editorial team
Last reviewed on 1 June 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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