By the end of this chapter you'll be able to…

  • 1Narrate the story: protagonist's job search → the employer's secret tests → the revelation and reward
  • 2Explain the double meaning of 'pariksha' — the literal exam vs. the moral test of character
  • 3Identify each test the protagonist faced and how he responded
  • 4Analyze the employer's method: why did he NOT announce the tests?
  • 5Connect the story to personal experience: when has your honesty been tested when no one was watching?
💡
Why this chapter matters
Premchand's 'Pariksha' is deceptively simple — a young man, a job interview, a series of moral tests — but its message is profound: character is revealed not in grand moments but in small, unseen choices. The story's genius is that the protagonist doesn't KNOW he's being tested. This is the deepest insight: life does not announce its exams. The employer's method — placing money, a wallet, and a helpless person in the protagonist's path — mirrors how society constantly tests our integrity without our awareness. For Class 6 students beginning to understand that 'who you are when nobody is watching' defines you, this story is foundational.

Before you start — revise these

A 5-minute refresher here will save you 30 minutes of confusion below.

परीक्षा — कक्षा 6 हिंदी (मल्हार)

"जब कोई देख नहीं रहा होता, तब का आचरण ही असली चरित्र है।" — प्रेमचंद

1. पाठ के बारे में

'परीक्षा' हिंदी के 'उपन्यास सम्राट' प्रेमचंद की एक प्रेरणादायक कहानी है। कहानी का शीर्षक अपने आप में एक पहेली है — 'परीक्षा' से आपको शायद स्कूल के एग्ज़ाम याद आएँ। पर प्रेमचंद की 'परीक्षा' कुछ और ही है: यह चरित्र की परीक्षा है, ईमानदारी की परीक्षा है — और इसकी खास बात यह है कि परीक्षार्थी को पता ही नहीं चलता कि उसकी परीक्षा हो रही है।

यह पाठ क्यों महत्वपूर्ण है

  • प्रेमचंद — हिंदी के सर्वश्रेष्ठ कथाकार — से परिचय
  • शीर्षक का दोहरा अर्थ — साक्षात्कार (बाहरी परीक्षा) और चरित्र-परीक्षण (आंतरिक परीक्षा)
  • जीवन-मूल्य: ईमानदारी और चरित्र-बल का महत्व

2. लेखक-परिचय

प्रेमचंद (1880-1936)

  • वास्तविक नाम: धनपत राय श्रीवास्तव
  • हिंदी और उर्दू के महानतम कथाकार — 'उपन्यास सम्राट'
  • प्रमुख उपन्यास: गोदान, गबन, निर्मला, कर्मभूमि, रंगभूमि
  • प्रमुख कहानियाँ: ईदगाह, पंच परमेश्वर, बड़े भाई साहब, कफ़न, पूस की रात
  • विशेषता: आदर्शोन्मुख यथार्थवाद — समाज की सच्चाई + नैतिक संदेश

3. कहानी (NCERT मल्हार पाठ्यपुस्तक से)

एक युवक था — पढ़ा-लिखा, ईमानदार, पर बेरोज़गार। वह नौकरी की तलाश में भटक रहा था। एक दिन उसे पता चला कि शहर का एक बड़ा अधिकारी अपने कार्यालय के लिए एक योग्य व्यक्ति की तलाश कर रहा है। युवक साक्षात्कार देने पहुँचा।

साक्षात्कार स्थल तक पहुँचने के रास्ते में युवक के सामने तीन परिस्थितियाँ आईं:

पहली परीक्षा — रास्ते में पड़े पैसे: रास्ते में कुछ पैसे पड़े थे। कोई देख नहीं रहा था। युवक ने सोचा — "यह किसी का होगा।" उसने पैसे उठाकर पास की दुकान में दे दिए और कहा — "अगर कोई ढूँढ़ता हुआ आए तो दे देना।"

दूसरी परीक्षा — भूला हुआ बटुआ: आगे चलकर उसे एक बटुआ मिला जिसमें काफ़ी पैसे और कुछ ज़रूरी कागज़ थे। बटुए में पता भी लिखा था। युवक ने बिना एक क्षण गँवाए, बटुआ उस पते पर पहुँचा दिया।

तीसरी परीक्षा — असहाय व्यक्ति: रास्ते में एक वृद्ध व्यक्ति गिरा पड़ा था। युवक को साक्षात्कार के लिए देर हो रही थी। फिर भी वह रुका — वृद्ध को उठाया, पानी पिलाया और तब आगे बढ़ा।

जब युवक साक्षात्कार स्थल पर पहुँचा, तो अधिकारी ने मुस्कुराकर कहा — "तुम्हारी परीक्षा तो तुम रास्ते में ही पास कर आए। वे पैसे, वह बटुआ और वह वृद्ध — सब मेरी ही योजना थी। तुमने सिद्ध कर दिया कि तुम ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ हो। नौकरी तुम्हारी है।"


4. पात्र-परिचय

नायक (युवक)

  • शिक्षित, ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ
  • जब कोई नहीं देख रहा, तब भी सही काम करता है
  • तीनों परीक्षाओं में अनजाने में खरा उतरता है

अधिकारी

  • दूरदर्शी नियोक्ता जो चरित्र को डिग्री से अधिक महत्व देता है
  • जानबूझकर युवक के मार्ग में नैतिक परीक्षाएँ रखता है
  • साक्षात्कार से पहले ही सही व्यक्ति को चुन लेता है

5. शीर्षक की सार्थकता

'परीक्षा' शब्द के तीन अर्थ इस कहानी में हैं:

स्तरअर्थ
शाब्दिकनौकरी का साक्षात्कार (interview) — युवक जिसके लिए जा रहा है
नैतिकचरित्र की परीक्षा — पैसे, बटुआ, वृद्ध — जिसे युवक अनजाने में पास करता है
दार्शनिकजीवन स्वयं एक परीक्षा है — हर क्षण, हर चुनाव, हर निर्णय

6. हम क्या सीखते हैं

मूल्यकहानी कैसे दर्शाती है
ईमानदारीयुवक पैसे और बटुआ लौटाता है — जबकि कोई देख नहीं रहा
चरित्र-बलसाक्षात्कार की जल्दी में भी वृद्ध की मदद करना
कर्तव्यनिष्ठाहर परिस्थिति में सही काम करना — चाहे नुकसान ही क्यों न हो
आत्म-निरीक्षणक्या हम भी 'जब कोई नहीं देख रहा' तब ईमानदार रहते हैं?

7. प्रमुख शब्दार्थ

  • चरित्र-बल: नैतिक मज़बूती — सही-गलत में अंतर करके सही चुनने की आंतरिक शक्ति
  • कर्तव्यनिष्ठा: अपने कर्तव्य के प्रति पूर्ण समर्पण और ईमानदारी
  • साक्षात्कार: आमने-सामने बैठकर बातचीत — interview
  • परीक्षा: यहाँ — जीवन की वह कसौटी जो आचरण और चरित्र को परखती है

8. अभ्यास

  1. युवक को रास्ते में कौन-कौन सी परीक्षाएँ मिलीं और उसने क्या किया?
  2. 'परीक्षा' शीर्षक की दोहरी सार्थकता समझाइए।
  3. अधिकारी ने ये गुप्त परीक्षाएँ क्यों रखीं?
  4. प्रेमचंद की दो प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए।

9. हल किए गए उदाहरण

उदाहरण: शीर्षक की सार्थकता

प्रश्न: 'परीक्षा' शीर्षक कहानी के लिए क्यों उपयुक्त है?

उत्तर: तीन स्तरों पर — (1) शाब्दिक: नायक नौकरी के साक्षात्कार (एक प्रकार की परीक्षा) के लिए जा रहा है। (2) नैतिक: रास्ते में उसके चरित्र की तीन बार परीक्षा होती है। (3) दार्शनिक: कहानी का गूढ़ संदेश — पूरा जीवन ही एक परीक्षा है जहाँ 'जब कोई नहीं देख रहा होता, तब का आचरण' ही असली उत्तर-पुस्तिका है।


10. निष्कर्ष

प्रेमचंद की 'परीक्षा' हर विद्यार्थी को एक असहज प्रश्न देती है: "जब कोई नहीं देख रहा होता, तब तुम कौन होते हो?" यह प्रश्न जीवनभर हमारा पीछा करता है — और इसका उत्तर ही हमारा चरित्र है।

⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
Thinking the tests were unfair or deceptive
The employer was not 'tricking' the protagonist in a harmful way. He was creating situations to REVEAL character — not to deceive. There's a difference: a trick hurts someone; a test reveals them. The protagonist was never harmed — he was given opportunities to demonstrate his integrity.
WATCH OUT
Missing Premchand's social message
Premchand wrote during a time when education was expanding but corruption was also widespread. The story argues that a society needs honest people more than it needs merely 'qualified' people. The employer's method is Premchand's critique of a system that tests knowledge (exams) but not character.

Practice problems

Try each one yourself before tapping "Show solution". Active recall > rereading.

Q1MEDIUM· शीर्षक-विश्लेषण
'परीक्षा' शीर्षक कहानी के लिए कितना और क्यों उपयुक्त है?
Show solution
Step 1 — पहला अर्थ (शाब्दिक परीक्षा): नायक नौकरी के लिए साक्षात्कार (interview) देने जा रहा है — यह एक तरह की परीक्षा है। Step 2 — दूसरा अर्थ (नैतिक परीक्षा): नायक को रास्ते में कई परीक्षाएँ देनी पड़ती हैं — पैसे उठाने या न उठाने की, बटुआ लौटाने की, असहाय की मदद करने की। ये परीक्षाएँ उसके चरित्र की हैं। Step 3 — तीसरा अर्थ (जीवन-दर्शन): कहानी का गूढ़ संदेश है कि पूरा जीवन ही एक परीक्षा है — हर पल, हर निर्णय, हर छोटा-बड़ा चुनाव। ✦ उत्तर: शीर्षक तीन स्तरों पर सार्थक है — शाब्दिक (नौकरी का साक्षात्कार), नैतिक (चरित्र-परीक्षण), और दार्शनिक (जीवन ही परीक्षा है)।

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • लेखक: प्रेमचंद (1880-1936) — हिंदी और उर्दू के महानतम कथाकार, 'उपन्यास सम्राट'
  • प्रेमचंद की प्रमुख रचनाएँ: गोदान, गबन, निर्मला (उपन्यास); ईदगाह, पंच परमेश्वर (कहानियाँ)
  • कथानक: युवक → नौकरी की तलाश → अधिकारी द्वारा गुप्त परीक्षाएँ → ईमानदारी से उत्तीर्ण → नौकरी प्राप्ति
  • तीन परीक्षाएँ: रास्ते में पैसे, भूला हुआ बटुआ, असहाय व्यक्ति की मदद
  • मुख्य संदेश: चरित्र-बल > शैक्षिक योग्यता; जीवन हर क्षण परीक्षा लेता है
  • शीर्षक का द्वैत्य: साक्षात्कार (बाहरी परीक्षा) + नैतिक परीक्षण (आंतरिक परीक्षा)

CBSE marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

सत्यनिष्ठा का व्यावहारिक मूल्य

यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि ईमानदारी केवल एक 'अच्छी आदत' नहीं — यह एक व्यावहारिक गुण है जो नौकरी, दोस्ती और सम्मान दिला सकता है। नियोक्ता ईमानदार लोगों को महत्व देते हैं।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

  1. शीर्षक की सार्थकता पर 2-3 marks का प्रश्न पक्का — तीन स्तर (शाब्दिक, नैतिक, दार्शनिक) बताएँ।
  2. प्रेमचंद का परिचय: नाम, काल, दो प्रमुख रचनाएँ, 'उपन्यास सम्राट' की उपाधि।
  3. तीन परीक्षाओं का क्रम याद रखें और प्रत्येक के लिए नायक की प्रतिक्रिया।

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

प्रेमचंद की कहानियों की तीन प्रमुख विशेषताएँ: (1) आदर्शोन्मुख यथार्थवाद — वे समाज की वास्तविक समस्याएँ दिखाते थे लेकिन समाधान की आशा भी देते थे। (2) नैतिक शिक्षा — हर कहानी कोई-न-कोई जीवन-मूल्य सिखाती है। (3) सरल भाषा — आम आदमी की बोलचाल की भाषा में गहरी बातें। 'परीक्षा' इन तीनों विशेषताओं का उत्कृष्ट उदाहरण है।

आज के समय में कई कंपनियाँ 'integrity tests' लेती हैं — जैसे interview से पहले waiting room में कोई परिस्थिति उत्पन्न करना और उम्मीदवार की प्रतिक्रिया देखना। लेकिन 'परीक्षा' कहानी का संदेश नौकरी से बड़ा है: जीवन स्वयं हर पल हमारी परीक्षा ले रहा है — जब आप किसी की मदद कर सकते हैं और नहीं करते, जब आप झूठ बोलकर बच सकते हैं और सच बोलते हैं — यही 'परीक्षा' है।
Verified by the tuition.in editorial team
Last reviewed on 1 June 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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