By the end of this chapter you'll be able to…

  • 1प्रेमचंद के जीवन और उनकी रचना-शैली से परिचित होना
  • 2कहानी 'दो बैलों की कथा' के मुख्य पात्रों, घटनाक्रम और सारांश को समझना
  • 3हीरा-मोती की मित्रता, स्वाभिमान और संघर्ष के माध्यम से मानवीय मूल्यों को सीखना
  • 4कहानी के प्रतीकात्मक अर्थ (ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष) को समझना
  • 5प्रेमचंद की लेखन शैली और भाषा-विशेषताओं को पहचानना
  • 6पशु-मानव संबंध और करुणा के महत्व को समझना
  • 7मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग समझना
💡
Why this chapter matters
प्रेमचंद की यह कालजयी कहानी हिन्दी साहित्य का गौरव है। मित्रता, स्वतंत्रता, स्वाभिमान — ये मूल्य हर भारतीय छात्र के लिए आज भी प्रासंगिक हैं। यह कहानी CBSE बोर्ड परीक्षा में नियमित रूप से पूछी जाती है।

दो बैलों की कथा — कक्षा 9 हिन्दी (क्षितिज भाग 1)

"गधा प्राणियों में सबसे कम बुद्धिमान समझा जाता है... हम जब किसी आदमी को परले दर्जे का बेवकूफ कहना चाहते हैं तो उसे गधा कहते हैं।" — प्रेमचंद की 'दो बैलों की कथा' से

1. कहानी का परिचय

मुंशी प्रेमचंद की 'दो बैलों की कथा' एक हृदयस्पर्शी कहानी है जो दो बैलों — हीरा और मोती — के जीवन के माध्यम से मानवीय मूल्यों को प्रस्तुत करती है। यह कहानी 1936 के आसपास लिखी गई और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के काल में प्रकाशित हुई।

प्रेमचंद ने पशुओं को मानवीय भावनाओं से युक्त दिखाया है, जिससे यह कहानी एक सामान्य पशु-कथा से ऊपर उठकर मानवीय मूल्यों — मित्रता, स्वाभिमान, स्वतंत्रता, संघर्ष, करुणा — की प्रतिनिधि बन जाती है।

कहानी की पृष्ठभूमि

  • रचनाकार: मुंशी प्रेमचंद (1880-1936)
  • विधा: कहानी (पशु-कथा शैली में)
  • प्रकाशन: 'मानसरोवर' संग्रह में
  • समय-काल: ब्रिटिश शासनकाल, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान
  • उद्देश्य: स्वतंत्रता और स्वाभिमान का संदेश

2. लेखक परिचय — मुंशी प्रेमचंद

मुंशी प्रेमचंद (मूल नाम: धनपत राय श्रीवास्तव) हिन्दी और उर्दू साहित्य के युग प्रवर्तक रचनाकार हैं।

जीवनवृत्त

  • जन्म: 31 जुलाई 1880, लमही गाँव (वाराणसी के पास)
  • मृत्यु: 8 अक्टूबर 1936
  • उपाधि: 'उपन्यास सम्राट'
  • पत्नी: शिवरानी देवी

प्रमुख रचनाएँ

  • उपन्यास: गोदान, गबन, रंगभूमि, सेवासदन, निर्मला
  • कहानी संग्रह: मानसरोवर (8 भागों में), सोज़े वतन
  • प्रमुख कहानियाँ: कफ़न, पूस की रात, ईदगाह, बड़े भाई साहब, नमक का दारोगा

विशेषताएँ

  1. ग्रामीण जीवन और किसान-समस्याओं का यथार्थ चित्रण
  2. नैतिक मूल्यों की प्रतिष्ठा
  3. सरल, सहज भाषा-शैली
  4. सामाजिक यथार्थवाद के प्रवर्तक
  5. हिन्दी-उर्दू दोनों में लेखन

3. कहानी का सारांश

प्रारंभ

झूरी नामक एक किसान के दो बैल थे — हीरा और मोती। दोनों एक जैसे, सुंदर, मजबूत और परस्पर अत्यंत प्रिय थे। दोनों मिलकर कार्य करते, साथ खाते, साथ रहते।

घटनाक्रम का विकास

झूरी ने एक बार दोनों बैलों को अपने ससुराल (साले गया के पास) भेजा। गया क्रूर था — उसने दोनों के साथ बुरा व्यवहार किया, खाना नहीं दिया।

बैलों ने विरोध किया। रात में रस्सी तोड़कर भाग निकले — झूरी के पास वापस आ गए। झूरी ने उन्हें प्रेम से रखा।

लेकिन फिर भेजा गया, और बैल फिर भागे। इस बार रास्ते में एक खेत में घुस गए, जहाँ खेत के मालिक ने उन्हें कांजीहौस (मवेशी-घर) में बंद कर दिया।

कांजीहौस में

कांजीहौस में अनेक पशु बंद थे — बैल, घोड़े, गधे, गाएँ। सब भूखे थे। हीरा और मोती ने उन्हें मुक्त करने का प्रयास किया।

दीवार तोड़ी — सब पशु भाग गए। पर हीरा-मोती फिर भी पकड़े गए।

बिक्री और मुक्ति

कांजीहौस वालों ने हीरा और मोती को दढ़ियल कसाई को बेच दिया। कसाई उन्हें ले जा रहा था कि बैलों ने झूरी की गली पहचानी। दौड़कर झूरी के घर पहुँच गए।

झूरी ने दौड़कर उन्हें छुड़ाया, गले लगाया। बैल कांप रहे थे।

अंत

झूरी की पत्नी ने डांटा भी कि बैल काम के नहीं रहे — पर झूरी ने प्रेम से उनकी देखभाल की। कहानी मानवीय करुणा और पशु-प्रेम की भावना के साथ समाप्त होती है।


4. मुख्य पात्र

हीरा और मोती

दोनों कहानी के नायक हैं। दोनों में अद्भुत साम्य:

  • दोनों सजातीय और मित्र
  • दोनों स्वाभिमानी और साहसी
  • दोनों एक-दूसरे के लिए जान देने को तैयार
  • दोनों अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करते हैं

झूरी

  • दयालु, सहृदय किसान
  • बैलों से अत्यंत स्नेह
  • अपनी पत्नी की डांट सहकर भी बैलों की रक्षा करता है

झूरी की पत्नी

  • व्यावहारिक, कठोर
  • बैलों के मूल्य से अधिक काम पर दृष्टि
  • विरोधी पात्र — झूरी की दया का विपरीत

गया

  • क्रूर, स्वार्थी
  • बैलों को मारता, भूखा रखता
  • शोषण और अमानवीयता का प्रतीक

कांजीहौस के कर्मचारी

  • भ्रष्ट, उदासीन
  • अधिकारी-तंत्र की कठोरता के प्रतीक

दढ़ियल कसाई

  • क्रूर, अमानवीय
  • मृत्यु और हिंसा का प्रतीक

5. कहानी का विषय/उद्देश्य

केंद्रीय विषय

'दो बैलों की कथा' के माध्यम से प्रेमचंद ने स्वतंत्रता और स्वाभिमान का संदेश दिया है।

प्रतीकात्मक अर्थ

यह कहानी मूलतः ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारतीय जनता के संघर्ष का प्रतीक है:

  • हीरा-मोती = परतंत्र भारतीय जनता
  • गया (साला) = ब्रिटिश शासक
  • कांजीहौस = ब्रिटिश शासन-व्यवस्था
  • रस्सी तोड़ना = स्वतंत्रता का संघर्ष
  • दौड़कर घर आना = स्वराज्य की प्राप्ति
  • दढ़ियल कसाई = अंतिम मृत्यु/अत्याचार जिससे बचना है

प्रमुख विषय

  1. मित्रता की महत्ता — हीरा-मोती की अटूट मित्रता
  2. स्वाभिमान — दूसरों के अधीन काम करने से इनकार
  3. स्वतंत्रता का संघर्ष — बंधन से मुक्ति
  4. पशु-मानव संबंध — पशुओं में भी मानवीय भावना
  5. शोषण के विरुद्ध संघर्ष — गया, कांजीहौस वालों, कसाई के विरुद्ध

6. साहित्यिक विशेषताएँ

भाषा शैली

  • सरल, सहज, ग्रामीण भाषा
  • तत्सम-तद्भव शब्दों का सुंदर मिश्रण
  • गद्य में काव्य की लय
  • वर्णनात्मक और संवादात्मक शैली

प्रयुक्त भाषा-तत्व

  • मुहावरे: 'पीठ ठोकना', 'जान देना', 'गले लग जाना'
  • लोकोक्तियाँ: 'बैल की जोड़ी'
  • ग्रामीण शब्दावली: नांद, पगहिया, नाधना, हाँकना

कथन शैली

  • तृतीय पुरुष में कहा गया है
  • सर्वज्ञ कथावाचक शैली
  • पशुओं के मनोभावों का सुंदर चित्रण
  • यथार्थवादी चित्रण

7. कहानी का संदेश

मुख्य संदेश

  1. स्वतंत्रता प्रत्येक प्राणी का प्राकृतिक अधिकार है।
  2. मित्रता संकट में परखी जाती है।
  3. अन्याय के विरुद्ध संघर्ष आवश्यक है।
  4. पशु भी संवेदनशील हैं — उनके साथ क्रूरता गलत है।
  5. सच्चा प्रेम और करुणा सबसे बड़ी पूँजी है।

आज की प्रासंगिकता

  • पशु-अधिकारों के प्रति जागरूकता
  • स्वाभिमान और आत्मसम्मान का महत्व
  • शोषण के विरुद्ध सामूहिक संघर्ष
  • मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा

8. महत्वपूर्ण अंश

प्रसिद्ध अंश 1

"गधा प्राणियों में सबसे कम बुद्धिमान समझा जाता है... हम जब किसी आदमी को परले दर्जे का बेवकूफ कहना चाहते हैं तो उसे गधा कहते हैं।"

— इस अंश से प्रेमचंद ने मानव-समाज की सोच पर व्यंग्य किया है।

प्रसिद्ध अंश 2

"हीरा और मोती दोनों दौड़ते-दौड़ते आ रहे थे, मगर मोती धीरे हो गया। हीरा रुक गया। हीरा को मोती का संगी होना उसके जीवन से प्यारा था।"

— मित्रता का अद्भुत चित्रण

प्रसिद्ध अंश 3

"हीरा को अपने प्रिय मित्र के लिए जान देने में भी हिचक न थी।"

— सच्ची मित्रता की परिभाषा


9. कक्षा 9 हिन्दी क्षितिज भाग 1 — पाठ 1

यह पाठ क्षितिज भाग 1 (कक्षा 9 हिन्दी A) का पहला गद्य पाठ है। CBSE बोर्ड परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है। पठन के साथ-साथ पाठ्यपुस्तक के अंत में दिए गए प्रश्नों का अभ्यास अवश्य करना चाहिए।


10. समापन विचार

'दो बैलों की कथा' केवल पशु-कथा नहीं है — यह मानवीय मूल्यों की कहानी है। प्रेमचंद ने हीरा-मोती के माध्यम से मित्रता, स्वतंत्रता, स्वाभिमान और संघर्ष के शाश्वत मूल्यों को सजीव किया है।

आज के बच्चों के लिए भी यह कहानी प्रासंगिक है — चाहे वह विद्यालय में बुलिंग के विरुद्ध हो, मित्रता निभाने का सवाल हो, या किसी अन्याय के सामने खड़े होने का। प्रेमचंद का यह पाठ हमें यह सिखाता है कि स्वतंत्रता और स्वाभिमान से बढ़कर कुछ नहीं है।

Key formulas & results

Everything you need to memorise, in one card. Screenshot this for revision.

केंद्रीय पात्र
हीरा और मोती — दो बैल जो मित्र, स्वाभिमानी, साहसी हैं
कहानी के मुख्य पात्र।
प्रमुख घटनाक्रम
झूरी का घर → गया का घर (साले) → कांजीहौस → कसाई → वापस झूरी का घर
कहानी का चक्र।
केंद्रीय विषय
मित्रता + स्वाभिमान + स्वतंत्रता + शोषण के विरुद्ध संघर्ष
चार प्रमुख विषय।
प्रतीकात्मक अर्थ
हीरा-मोती = भारतीय जनता · गया/कांजीहौस = ब्रिटिश शासन · रस्सी तोड़ना = स्वतंत्रता संग्राम
अप्रत्यक्ष अर्थ।
प्रकाशन काल
1936 के आसपास, मानसरोवर संग्रह में
स्वतंत्रता संग्राम का काल।
लेखक
मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) — हिन्दी का 'उपन्यास सम्राट'
लमही (वाराणसी) के थे।
⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
कहानी को केवल पशु-कथा समझना
यह वास्तव में मानवीय मूल्यों की कहानी है। पशु तो प्रतीक हैं। मित्रता, स्वतंत्रता, स्वाभिमान के संदेश पर ध्यान दें।
WATCH OUT
प्रतीकात्मक अर्थ को नज़रअंदाज़ करना
ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक है। हीरा-मोती = परतंत्र जनता; गया/कांजीहौस = शोषक शासन। बोर्ड परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।
WATCH OUT
केवल कथा-सारांश याद करना
पात्र-चित्रण, संवाद, भाषा-शैली, मुहावरों का भी अध्ययन करें। सभी प्रश्न-प्रकारों के लिए तैयारी आवश्यक।
WATCH OUT
प्रेमचंद का मूल नाम भूल जाना
मूल नाम: धनपत राय श्रीवास्तव। उपनाम: नवाब राय (पहले), फिर प्रेमचंद। 1-अंक का प्रश्न आ सकता है।
WATCH OUT
मुख्य पात्रों के नाम गलत लिखना
हीरा और मोती — दो बैल। झूरी — मालिक। गया — झूरी का साला (क्रूर)। दढ़ियल कसाई — अंत में आता है।

Practice problems

Try each one yourself before tapping "Show solution". Active recall > rereading.

Q1EASY· पहचान
हीरा और मोती कौन थे?
Show solution
चरण 1 — पहचान। हीरा और मोती दो बैल थे। चरण 2 — विशेषता। वे झूरी नामक किसान के थे। दोनों एक जैसे, सुंदर, मजबूत और परस्पर अत्यंत प्रिय थे। चरण 3 — महत्व। कहानी के मुख्य नायक — मित्रता, स्वतंत्रता, स्वाभिमान के प्रतीक। ✦ उत्तर: हीरा और मोती दो बैल थे, जो किसान झूरी के थे। दोनों परस्पर मित्र, स्वाभिमानी और साहसी थे।
Q2EASY· पहचान
इस कहानी के लेखक कौन हैं? उनका मूल नाम क्या था?
Show solution
चरण 1 — लेखक। मुंशी प्रेमचंद (1880-1936)। चरण 2 — मूल नाम। धनपत राय श्रीवास्तव। चरण 3 — विशेषता। हिन्दी के 'उपन्यास सम्राट' कहलाते हैं। यथार्थवादी लेखन के प्रवर्तक। ✦ उत्तर: लेखक हैं मुंशी प्रेमचंद, जिनका मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। उन्हें हिन्दी का 'उपन्यास सम्राट' कहा जाता है।
Q3EASY· घटना
झूरी ने हीरा और मोती को कहाँ भेजा था और क्यों?
Show solution
चरण 1 — कहाँ भेजा। झूरी ने हीरा और मोती को अपने ससुराल (साले गया के पास) भेजा था। चरण 2 — क्यों भेजा। कारण स्पष्ट है — साला गया अपने यहाँ काम कराने हेतु बैलों की माँग कर रहा था। झूरी ने सहायता के रूप में बैल भेजे। चरण 3 — परिणाम। गया ने बैलों के साथ क्रूर व्यवहार किया — खाना नहीं दिया, मारा। बैल रात में रस्सी तोड़कर वापस झूरी के पास भाग आए। ✦ उत्तर: झूरी ने हीरा-मोती को अपने ससुराल (साले गया के पास) काम के लिए भेजा था। पर गया ने उन्हें मारा-पीटा, खाना नहीं दिया। बैल रात में भागकर वापस झूरी के पास आ गए।
Q4EASY· विषय
हीरा और मोती की मित्रता को सिद्ध करने वाली कोई दो घटनाएँ बताइए।
Show solution
चरण 1 — पहली घटना: एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ना। जब हीरा-मोती दौड़ रहे थे और मोती धीरे पड़ गया, तो हीरा ने अपनी गति धीमी की और मोती के साथ रहा। चरण 2 — दूसरी घटना: कसाई के घर तक का साहचर्य। कसाई के यहाँ ले जाए जा रहे थे, बैल साथ-साथ रहे। एक के लिए दूसरे ने जान देने में हिचक नहीं की। चरण 3 — तीसरी घटना (वैकल्पिक): कांजीहौस में। कांजीहौस में दीवार तोड़ने में भी मिलकर प्रयास किया। ✦ उत्तर: (i) दौड़ते समय जब मोती धीरे पड़ गया, हीरा भी रुक गया, क्योंकि वह मित्र को छोड़ना नहीं चाहता था। (ii) कसाई के घर ले जाए जाते समय भी वे साथ-साथ रहे; एक के लिए दूसरे ने जान देने में हिचक नहीं की।
Q5EASY· भाषा
'कांजीहौस' किसे कहते हैं?
Show solution
चरण 1 — परिभाषा। कांजीहौस = वह स्थान जहाँ बेमालिक या मानक के विरुद्ध मवेशियों को बंद किया जाता है। चरण 2 — उद्देश्य। यदि किसी की भेड़, बकरी, गाय, बैल खेत में चले जाते थे, तो उन्हें कांजीहौस में बंद किया जाता था। मालिक को जुर्माना देकर ले जाना पड़ता था। चरण 3 — कहानी में। हीरा और मोती कांजीहौस में बंद किए गए थे, जहाँ से बाद में कसाई को बेचे गए। ✦ उत्तर: कांजीहौस वह स्थान है जहाँ बेमालिक या किसी के खेत में घुसे मवेशियों को बंद किया जाता है। यह 'cattle pound' का हिन्दी समकक्ष है।
Q6MEDIUM· विषय
गया की पत्नी (झूरी की साली) का व्यवहार बैलों के प्रति कैसा था? वह बैलों से सहानुभूति क्यों दिखाती थी?
Show solution
चरण 1 — गया की पत्नी का व्यवहार। गया की पत्नी (झूरी की साली) बैलों के साथ अपेक्षाकृत दयालु थी। वह उन्हें छिपकर खाने को देती थी, उनकी पीठ सहलाती थी। चरण 2 — कारण 1: स्त्री होने का अनुभव। वह स्वयं विवाहित स्त्री थी — पराए घर में बंधी हुई। बैलों की पीड़ा को वह समझ सकती थी क्योंकि उसे भी पराये घर में बंधा होने का अनुभव था। चरण 3 — कारण 2: करुणा। वह स्वभाव से सहृदय थी। पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार उसे पीड़ा देता था। चरण 4 — कारण 3: पति के विरुद्ध मूक विद्रोह। गया जो क्रूर था, उसके विपरीत खड़ा होने का यह उसका तरीका था। गुप्त रूप से बैलों को खाना देना — एक प्रकार से पति के विरुद्ध विद्रोह। चरण 5 — महत्व। यह घटना दिखाती है कि: • स्त्रियों में सहज करुणा होती है। • पीड़ित व्यक्ति दूसरे पीड़ित को समझ सकता है। • अन्याय के विरुद्ध मूक विद्रोह भी संभव है। ✦ उत्तर: गया की पत्नी बैलों के प्रति दयालु थी — छिपकर खाना देती थी, पीठ सहलाती थी। कारण: (i) स्त्री होने के नाते वह स्वयं पराये घर में बंधी अनुभव कर चुकी थी; (ii) उसमें सहज करुणा थी; (iii) यह क्रूर पति के विरुद्ध उसका मूक विद्रोह था।
Q7MEDIUM· विषय
कहानी का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है? इसका भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से क्या संबंध है?
Show solution
चरण 1 — प्रतीक स्थापना। कहानी 1936 के आसपास लिखी गई — भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का गंभीर काल। प्रेमचंद ने स्पष्ट प्रतीकात्मक रचना की: चरण 2 — प्रतीक अर्थ। • **हीरा और मोती** = भारतीय जनता (परतंत्र, पर स्वाभिमानी)। • **झूरी** = मूल भारत-भूमि, माता-भूमि। • **गया (झूरी का साला)** = ब्रिटिश शासक (पराये के अधिकारी, जिनके पास भारत 'सौंपा' गया है)। • **गया का क्रूर व्यवहार** = ब्रिटिश शासन का शोषण। • **रस्सी तोड़ना** = स्वतंत्रता संग्राम का संघर्ष। • **दौड़कर झूरी के पास आना** = स्वराज्य की चाह। • **कांजीहौस** = ब्रिटिश शासन-व्यवस्था (जेल, अधीनता का प्रतीक)। • **दीवार तोड़ना** = सामूहिक संघर्ष (कांजीहौस में अन्य पशुओं को भी मुक्त किया)। • **दढ़ियल कसाई** = अंतिम शोषण/मृत्यु — जिससे बचना है। चरण 3 — गाँधीवादी दर्शन। गाँधी जी के सत्याग्रह के समय कहानी आई। हीरा-मोती का व्यवहार: • अहिंसक प्रतिरोध (मारते नहीं, बस भागते हैं)। • एकता और साथ (एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते)। • दूसरों की भी मदद (कांजीहौस में अन्य पशुओं को छुड़ाते हैं)। ये सब गाँधी जी के स्वतंत्रता संग्राम के सिद्धांत हैं। चरण 4 — संदेश। • स्वतंत्रता का चाहना प्रत्येक प्राणी का प्राकृतिक अधिकार है। • शोषण के विरुद्ध संघर्ष आवश्यक। • एकता ही शक्ति है। • अहिंसक प्रतिरोध से भी विजय संभव। चरण 5 — साहित्यिक महत्व। प्रेमचंद ने पशु-कथा के माध्यम से राजनीतिक संदेश दिया — जब प्रत्यक्ष लेखन कठिन था (ब्रिटिश सरकार सेंसरशिप करती थी)। यह पशु-रूपक-कथा (allegory) का सुंदर उदाहरण है। ✦ उत्तर: कहानी का प्रतीकात्मक अर्थ: • हीरा-मोती = भारतीय जनता। • गया/कांजीहौस = ब्रिटिश शासन। • रस्सी तोड़ना/भागना = स्वतंत्रता संग्राम। • कसाई = अंतिम शोषण। प्रेमचंद ने पशु-कथा के माध्यम से 1936 के स्वतंत्रता संग्राम के समय भारतीय जनता को संदेश दिया — स्वतंत्रता का संघर्ष आवश्यक, एकता ही शक्ति, अहिंसक प्रतिरोध संभव।
Q8MEDIUM· पात्र
हीरा और मोती की चरित्रगत विशेषताओं का तुलनात्मक विश्लेषण कीजिए।
Show solution
चरण 1 — समानताएँ। दोनों में अनेक समानताएँ हैं: • दोनों **सजातीय** (एक प्रजाति के)। • दोनों **स्वाभिमानी** — अन्याय सहन नहीं करते। • दोनों **साहसी** — कांजीहौस की दीवार तोड़ने में निडर। • दोनों **मित्रता-निष्ठ** — एक-दूसरे के लिए जान देने को तैयार। • दोनों **दयालु** — कांजीहौस में अन्य पशुओं की भी मदद करते हैं। • दोनों **बुद्धिमान** — झूरी की गली पहचानते हैं, कसाई से भागते हैं। चरण 2 — विशिष्ट विशेषताएँ। (a) **हीरा** की विशेषताएँ: • अधिक **विवेकशील** — स्थिति का आकलन करने में अग्रणी। • मित्र के लिए **अपनी गति धीमी** करता है (जब मोती दौड़ नहीं पाता)। • **नेतृत्व क्षमता** — आगे चलता है। (b) **मोती** की विशेषताएँ: • अधिक **भावुक** — हीरा के बिना नहीं रह सकता। • **अनुयायी** स्वभाव — हीरा के निर्देश पर चलता है। • पर **साहस में बराबर** — दीवार तोड़ने में, कसाई से भागने में। चरण 3 — द्वंद्व और संयोजन। दोनों के स्वभाव में थोड़ा अंतर है, पर वह उनकी मित्रता को और मजबूत करता है — हीरा की बुद्धि और मोती की भावुकता मिलकर एक पूर्ण इकाई बनती है। जैसे दो पंख चिड़िया के — दोनों की आवश्यकता है उड़ान के लिए। चरण 4 — आदर्श मित्रता का प्रतीक। दोनों की मित्रता एक आदर्श मित्रता का प्रतीक है: • निःस्वार्थ। • बलिदान के लिए तैयार। • एक-दूसरे के बिना अपूर्ण। • संकट में एकजुट। • दूसरों के लिए भी सहायक। चरण 5 — आज की प्रासंगिकता। हीरा-मोती की मित्रता आज भी हम सब के लिए आदर्श है। ✦ उत्तर: दोनों समान रूप से स्वाभिमानी, साहसी और मित्रता-निष्ठ हैं। पर हीरा अधिक विवेकशील और नेतृत्वकर्ता है, जबकि मोती अधिक भावुक और अनुयायी। दोनों मिलकर एक पूर्ण इकाई बनाते हैं। आदर्श मित्रता का प्रतीक।
Q9HARD· विस्तृत
'दो बैलों की कथा' के माध्यम से प्रेमचंद ने क्या संदेश दिया है? कहानी के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालिए।
Show solution
चरण 1 — कहानी का स्थूल संदेश। प्रेमचंद ने 'दो बैलों की कथा' के माध्यम से अनेक संदेश दिए हैं: • मित्रता का महत्व। • स्वतंत्रता का संघर्ष। • स्वाभिमान की रक्षा। • शोषण का प्रतिरोध। • करुणा और मानवीयता। चरण 2 — पात्र-चित्रण के माध्यम से संदेश। (a) **हीरा-मोती** (नायक): • मित्रता निःस्वार्थ होती है। • स्वाभिमान सर्वोपरि है। • अन्याय के विरुद्ध संघर्ष आवश्यक। • एकता ही शक्ति है। (b) **झूरी** (दयालु मालिक): • करुणा और दया महान गुण हैं। • पशुओं के साथ भी मानवीय व्यवहार चाहिए। • व्यावसायिक हानि से ऊपर मानवीय मूल्य। (c) **गया** (क्रूर साला): • क्रूरता निंदनीय। • शोषण के विरुद्ध संघर्ष आवश्यक। • दूसरे की पीड़ा को समझना मानवीयता। (d) **गया की पत्नी** (दयालु स्त्री): • स्त्रियों में सहज करुणा। • पीड़ित की पीड़ा को पीड़ित ही समझ सकता है। • मूक विद्रोह भी विद्रोह है। (e) **दढ़ियल कसाई** (हिंसा का प्रतीक): • व्यवसाय के लिए जीवन हनन निंदनीय। • करुणा सबसे बड़ा धर्म। चरण 3 — विषयानुसार संदेश। (a) **मित्रता की महत्ता**। हीरा-मोती की मित्रता सिखाती है कि सच्ची मित्रता: • सुख-दुख में साथ। • बलिदान के लिए तैयार। • एक-दूसरे के लिए जीवन देने को तत्पर। (b) **स्वतंत्रता का संघर्ष**। कोई भी प्राणी बंधन में रहना नहीं चाहता। स्वतंत्रता प्राकृतिक अधिकार है। (c) **स्वाभिमान की रक्षा**। अन्याय को सहन करना कमज़ोरी है। स्वाभिमान के लिए संघर्ष आवश्यक। (d) **शोषण का प्रतिरोध**। शोषक चाहे कोई भी हो — मानव या पशु — उसका विरोध आवश्यक। (e) **पशुओं के अधिकार**। पशुओं में भी संवेदना है, करुणा है, मित्रता है। उनके साथ क्रूरता गलत है। चरण 4 — सामाजिक संदेश। कहानी समाज को कई संदेश देती है: • **पशु-कल्याण** की भावना जागृत करनी चाहिए। • **बच्चों को** पशुओं के प्रति दयालु बनना सिखाएँ। • **शोषण के विरुद्ध** सामूहिक संघर्ष करें। • **करुणा** सबसे बड़ा धर्म है। • **एकता ही** शक्ति है। चरण 5 — राजनीतिक संदेश। 1936 में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध: • भारतीय जनता को **एकजुट संघर्ष** का संदेश। • **स्वतंत्रता** की चाह जायज़। • **अहिंसक प्रतिरोध** की संभावना। • **गाँधीवादी दर्शन** का साहित्यिक रूप। चरण 6 — मानवीय मूल्यों का संदेश। कहानी मनुष्य को सिखाती है: • मित्रता बड़ी पूँजी है। • करुणा सबसे बड़ा गुण। • स्वाभिमान सर्वोपरि। • एकता शक्ति। • अन्याय का प्रतिरोध आवश्यक। चरण 7 — दार्शनिक संदेश। प्रेमचंद का दर्शन: • मानवीय मूल्य पशुओं में भी हैं। • प्राणी मात्र का स्वाभिमान सम्माननीय। • प्रेम और करुणा से बढ़कर कुछ नहीं। • दया और मित्रता शाश्वत मूल्य। चरण 8 — आज की प्रासंगिकता। • **पशु अधिकार आंदोलन** के लिए प्रासंगिक। • **बच्चों में करुणा** की भावना के लिए महत्वपूर्ण। • **शोषण के विरुद्ध जागरूकता** के लिए उपयोगी। • **मित्रता के मूल्य** के लिए आदर्श। • **स्वतंत्रता और स्वाभिमान** के संदेश के लिए शाश्वत। चरण 9 — साहित्यिक महत्व। यह कहानी हिन्दी साहित्य की अमर रचनाओं में से एक है। प्रेमचंद ने पशु-कथा शैली में मानवीय मूल्यों का इतना सुंदर चित्रण किया है कि: • यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सबको प्रिय। • अनेक भाषाओं में अनुदित। • स्कूली पाठ्यक्रमों में सम्मिलित। • भारतीय संस्कृति का अंग बन गई। चरण 10 — समापन। 'दो बैलों की कथा' केवल एक पशु-कथा नहीं — यह मानवीय मूल्यों का दर्पण है। प्रेमचंद ने इसके माध्यम से मित्रता, स्वतंत्रता, स्वाभिमान, करुणा और संघर्ष के शाश्वत मूल्यों को प्रस्तुत किया है। आज भी यह कहानी हर भारतीय छात्र के मन में गहरी छाप छोड़ती है। ✦ उत्तर: 'दो बैलों की कथा' के माध्यम से प्रेमचंद ने अनेक संदेश दिए हैं: • **मित्रता का महत्व** — हीरा-मोती की निःस्वार्थ मित्रता। • **स्वतंत्रता का संघर्ष** — बंधन से मुक्ति की चाह। • **स्वाभिमान की रक्षा** — अन्याय को सहन न करना। • **शोषण का प्रतिरोध** — सामूहिक संघर्ष। • **पशु-कल्याण** — पशुओं में भी संवेदना। • **करुणा और मानवीयता** — सबसे बड़ा धर्म। • **राजनीतिक संदेश** — 1936 में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक। यह कहानी आज भी प्रासंगिक है — पशु अधिकार, मित्रता के मूल्य, और स्वाभिमान के संदेश के लिए शाश्वत।

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • लेखक: मुंशी प्रेमचंद (मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव, 1880-1936, उपाधि 'उपन्यास सम्राट')
  • मुख्य पात्र: हीरा, मोती (दो बैल), झूरी (मालिक), गया (झूरी का साला, क्रूर), गया की पत्नी (दयालु), दढ़ियल कसाई
  • घटनाक्रम: झूरी का घर → गया का घर → भागना → कांजीहौस → कसाई → वापस झूरी का घर
  • केंद्रीय विषय: मित्रता + स्वाभिमान + स्वतंत्रता + शोषण के विरुद्ध संघर्ष
  • प्रतीकात्मक अर्थ: हीरा-मोती = भारतीय जनता, गया/कांजीहौस = ब्रिटिश शासन, रस्सी तोड़ना = स्वतंत्रता संग्राम
  • लेखन काल: 1936 — भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का काल
  • हीरा की विशेषताएँ: विवेकशील, नेतृत्वकर्ता, मित्र के लिए धीमा होने वाला
  • मोती की विशेषताएँ: भावुक, अनुयायी, साहसी
  • गया की पत्नी का व्यवहार: गुप्त रूप से दयालु — स्त्री होने के नाते बंधन की पीड़ा समझती है
  • कांजीहौस में दूसरे पशु: हीरा-मोती ने उन्हें भी मुक्त करने का प्रयास किया
  • अंत: कसाई से बच निकलकर झूरी के पास पहुँचते हैं
  • महत्वपूर्ण मुहावरे: पीठ ठोकना, जान देना, गले लग जाना
  • प्रेमचंद की प्रमुख रचनाएँ: गोदान, गबन, रंगभूमि, सेवासदन, मानसरोवर

CBSE marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Typical chapter weightage: 5–7 अंक प्रति बोर्ड पेपर (1–2 लघु + 1 दीर्घ उत्तरीय)

Question typeMarks eachTypical countWhat it tests
बहुविकल्पीय / अति लघु11–2लेखक का नाम; मूल नाम; पात्र पहचान; प्रकाशन काल
लघु उत्तरीय31घटना-वर्णन; पात्र-विशेषता; मित्रता के उदाहरण
दीर्घ उत्तरीय50–1प्रतीकात्मक अर्थ; कहानी का संदेश; पात्र-तुलना
मूल्य-आधारित40–1कहानी से सीखे जाने वाले मूल्य; आज की प्रासंगिकता
Prep strategy
  • मुख्य पात्र (हीरा, मोती, झूरी, गया, गया की पत्नी, कांजीहौस वाले, कसाई) और उनकी विशेषताएँ याद रखें
  • कहानी का घटनाक्रम क्रमबद्ध रूप से याद रखें: झूरी → गया → भागना → कांजीहौस → कसाई → वापसी
  • कहानी का प्रतीकात्मक अर्थ (ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष) समझें — दीर्घ उत्तरों में पूछा जाता है
  • हीरा-मोती की मित्रता के 3-4 ठोस उदाहरण याद रखें
  • प्रेमचंद का जीवन परिचय (मूल नाम, उपाधि, प्रमुख रचनाएँ) याद रखें — 1-2 अंक
  • कहानी से सीखे जाने वाले मूल्य (मित्रता, स्वतंत्रता, करुणा) को नोट करें — मूल्य-आधारित प्रश्नों के लिए

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

पशु अधिकार आंदोलन

PETA, Blue Cross जैसे संगठन पशुओं के अधिकारों के लिए लड़ते हैं। प्रेमचंद का यह पाठ इस आंदोलन की भावना का बीज है।

मित्रता के आदर्श

हीरा-मोती की मित्रता आज भी आदर्श मित्रता का प्रतीक है। बच्चों को सच्ची मित्रता का महत्व सिखाती है।

बच्चों की पुस्तकें

अनेक बाल-साहित्य लेखकों ने प्रेमचंद की इस कहानी से प्रेरणा लेकर पशु-कथाएँ लिखीं हैं।

नाटक और फिल्म रूपांतरण

कहानी का मंचन स्कूली नाटकों में होता है। दूरदर्शन पर प्रेमचंद की कहानियों पर आधारित धारावाहिक प्रसारित हुए हैं।

गाँधीवादी मूल्य

अहिंसा, सत्याग्रह, एकता — ये गाँधीवादी मूल्य कहानी में रूपकात्मक रूप में दिखाई देते हैं।

हिन्दी साहित्य अध्ययन

B.A., M.A., Ph.D. स्तर पर प्रेमचंद का अध्ययन अनिवार्य है। यह कहानी विश्व-साहित्य में भी अनुदित और चर्चित है।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

  1. लेखक का परिचय (मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव, 'उपन्यास सम्राट') 1-2 अंक के लिए याद रखें
  2. घटनाक्रम क्रमबद्ध रूप से याद रखें — झूरी → गया → भागना → कांजीहौस → कसाई → वापसी
  3. मुख्य पात्रों की विशेषताएँ (हीरा, मोती, झूरी, गया, गया की पत्नी) की संक्षिप्त सूची तैयार करें
  4. कहानी का प्रतीकात्मक अर्थ (ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष) अवश्य समझें — दीर्घ उत्तरों में
  5. मित्रता के 3-4 ठोस उदाहरण याद रखें — 2-3 अंक के प्रश्नों के लिए
  6. महत्वपूर्ण मुहावरे और उनके अर्थ नोट करें
  7. मूल्य-आधारित प्रश्नों के लिए: मित्रता, स्वतंत्रता, करुणा, स्वाभिमान — इन मूल्यों पर 4-5 पंक्तियाँ तैयार करें
  8. हिन्दी में लिखते समय व्याकरण और वर्तनी पर ध्यान दें

Going beyond the textbook

For olympiad aspirants and curious learners — topics that build on this chapter.

  • प्रेमचंद की अन्य कहानियों का अध्ययन: 'कफ़न', 'पूस की रात', 'ईदगाह', 'बड़े भाई साहब'
  • रूपक-कथा (allegory) के अन्य उदाहरण: ऑरवेल की 'Animal Farm', पंचतंत्र की कहानियाँ
  • प्रेमचंद का यथार्थवादी आंदोलन में योगदान — हिन्दी साहित्य के 'प्रगतिवाद' से संबंध
  • तुलनात्मक अध्ययन: प्रेमचंद बनाम जयशंकर प्रसाद बनाम मोहन राकेश की कहानियाँ
  • प्रेमचंद की कहानियों में स्त्री-पात्र: 'गोदान' की धनिया, 'सद्गति' की मधु

Where else this chapter is tested

CBSE board isn't the only one — other exams test this chapter too.

CBSE Board Class 9उच्च — मुख्य पाठ्यक्रम में सम्मिलित
NTSE / NMMSमध्यम — हिन्दी साहित्य अनुभाग में आ सकता है
हिन्दी ओलिंपियाडउच्च — प्रेमचंद की कहानियाँ नियमित प्रश्न
UGC NET हिन्दीउच्च — प्रेमचंद-अध्ययन UGC NET हिन्दी का मुख्य भाग

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

प्रेमचंद ने कहानी 1936 के आसपास लिखी, जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था और सेंसरशिप थी। पशुओं को मुख्य पात्र बनाकर वे राजनीतिक संदेश (स्वतंत्रता संग्राम) को रूपक रूप में पेश कर सके। इस तरह की रूपक-कथा (allegory) सीधे राजनीतिक लेखन से बच निकलने का साहित्यिक तरीका है।

क्योंकि कांजीहौस में: (i) उन्हें खाने को कुछ नहीं मिलता था; (ii) बंधन था और स्वतंत्रता नहीं थी; (iii) अंत में कसाई को बेच दिए जाते। बैलों ने अपनी और अन्य पशुओं की रक्षा के लिए दीवार तोड़कर भागने का प्रयास किया।

क्योंकि बैल अब काम के नहीं रहे थे — कमज़ोर हो गए थे। व्यावसायिक दृष्टि से वे 'अनुपयोगी संपत्ति' थे। पत्नी व्यावहारिक थी, झूरी भावनात्मक। यह अंतर्द्वंद्व प्रेमचंद ने यथार्थवादी ढंग से दिखाया है।

(i) मित्रता का महत्व — सच्चे मित्र संकट में साथ देते हैं। (ii) पशुओं के साथ करुणा — वे भी संवेदनशील हैं। (iii) अन्याय के विरुद्ध संघर्ष आवश्यक। (iv) एकता में शक्ति। (v) स्वाभिमान सर्वोपरि।

प्रेमचंद की भाषा सरल, सहज, ग्रामीण है। तत्सम-तद्भव शब्दों का सुंदर मिश्रण। मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग। भारतीय जीवन के यथार्थ का चित्रण। ये विशेषताएँ उन्हें हिन्दी का 'उपन्यास सम्राट' बनाती हैं।
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Last reviewed on 18 May 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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