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  • 1हजारी प्रसाद द्विवेदी और उनकी निबंध-शैली
  • 2गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का मानवीय व्यक्तित्व
  • 3शांतिनिकेतन-श्रीनिकेतन का संदर्भ
  • 4पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता
  • 5संस्मरणात्मक निबंध की विशेषताएँ
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Why this chapter matters
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का यह संस्मरण-निबंध गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर के पशु-प्रेम और संवेदनशील व्यक्तित्व को उजागर करता है। प्राणिमात्र से प्रेम का संदेश आज भी अत्यंत प्रासंगिक।

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एक कुत्ता और एक मैना — कक्षा 9 हिन्दी (क्षितिज भाग 1)

"गुरुदेव कहते थे, यह कुत्ता मेरी ओर अपने अन्तर्निहित स्नेह से देख रहा है। मैं ऐसे प्राणियों को कैसे छोड़ सकता हूँ!"

1. पाठ-परिचय

'एक कुत्ता और एक मैना' आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित एक हृदयस्पर्शी संस्मरणात्मक निबंध है। इसमें लेखक ने गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की दो अविस्मरणीय स्मृतियाँ साझा की हैं — एक कुत्ते की और एक मैना की। यह निबंध 'कुटज' (निबंध-संग्रह) से लिया गया है।

मुख्य भाव

  • गुरुदेव का पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम
  • प्राणिमात्र के प्रति संवेदनशीलता
  • शांतिनिकेतन-श्रीनिकेतन का परिवेश
  • गुरुदेव के मानवीय गुणों का चित्रण

2. लेखक-परिचय — हजारी प्रसाद द्विवेदी

जीवनवृत्त

  • जन्म: 19 अगस्त 1907, आरत दूबे का छपरा (बलिया, उत्तर प्रदेश)
  • मृत्यु: 19 मई 1979
  • शिक्षा: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से ज्योतिष में आचार्य
  • विशेष-कार्य: शांतिनिकेतन में हिन्दी-भवन के अध्यक्ष (1930-1950) — गुरुदेव टैगोर के सहयोगी
  • पुरस्कार: पद्मभूषण (1957), साहित्य अकादमी पुरस्कार

प्रमुख रचनाएँ

  • निबंध-संग्रह: कुटज, अशोक के फूल, विचार-प्रवाह, कल्पलता
  • उपन्यास: बाणभट्ट की आत्मकथा, चारुचंद्रलेख, पुनर्नवा, अनामदास का पोथा
  • समीक्षा: हिन्दी साहित्य की भूमिका, हिन्दी साहित्य का आदिकाल, कबीर

भाषा-शैली

  • संस्कृत-निष्ठ हिन्दी
  • सरल, सहज, प्रवाहमयी
  • गहन चिंतन के साथ सरस अभिव्यक्ति

3. पाठ का सारांश

प्रसंग 1 — गुरुदेव और कुत्ता

शांतिनिकेतन की घटना

  • गुरुदेव टैगोर शांतिनिकेतन में रहते थे।
  • आश्रम में एक कुत्ता था जो गुरुदेव से बहुत प्रेम करता था।
  • रोज़ सुबह गुरुदेव के कमरे के बाहर बैठा रहता।

मार्मिक प्रसंग

  • एक बार गुरुदेव को श्रीनिकेतन (पास का एक कृषि-केंद्र) में स्थानांतरित होना पड़ा।
  • वहाँ कुछ दिन रहे।
  • दूसरे दिन सुबह उन्होंने देखा कि वही कुत्ता शांतिनिकेतन से चलकर श्रीनिकेतन तक आ गया है — वहाँ बैठा है!
  • गुरुदेव बहुत भावुक हो गए — "यह कुत्ता मुझे ढूँढ़ता हुआ इतनी दूर आया!"

गुरुदेव का स्नेह

  • गुरुदेव ने कुत्ते के सिर पर हाथ फेरा।
  • उसकी आँखों में अद्भुत संतुष्टि दिखाई दी।
  • गुरुदेव ने कहा — "यह कुत्ता मुझे अपने अन्तर्निहित स्नेह से देख रहा है। ऐसे प्राणियों को छोड़कर कैसे जा सकता हूँ?"

प्रसंग 2 — गुरुदेव और मैना

मैना का प्रसंग

  • गुरुदेव शांतिनिकेतन में अपनी बालकनी में बैठते थे।
  • एक मैना (पक्षी) रोज़ वहाँ आती थी।
  • पर वह मैना लंगड़ी थी — एक पैर से।

गुरुदेव की निरीक्षण

  • गुरुदेव बारीकी से देखते रहते — मैना अकेली कैसे रहती है?
  • अन्य मैनाएँ उसे संग नहीं लेतीं।
  • एक दिन एक कौवा उस मैना को परेशान कर रहा था।
  • गुरुदेव बहुत दुखी हुए।

मार्मिक अहसास

  • गुरुदेव ने अनुभव किया कि यह लंगड़ी मैना उदास है, अकेली है।
  • उन्होंने कविता लिखी — "मैं तो उदास हूँ, क्या यह लंगड़ी मैना भी मेरी तरह उदास है?"
  • पशु-पक्षियों में मनुष्य जैसी ही भावनाएँ हैं — यह गुरुदेव का दर्शन।

अंतिम भाव

  • दोनों प्रसंगों से लेखक यह दिखाते हैं कि गुरुदेव टैगोर केवल कवि नहीं — एक मानवीय, संवेदनशील आत्मा थे।
  • वे प्राणिमात्र से प्रेम करते थे।
  • उनके लिए पशु-पक्षी भी समान महत्व रखते थे।

4. प्रमुख पात्र

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर (1861-1941)

  • भारत के राष्ट्रीय गीत ('जन गण मन') के रचयिता
  • 1913 में नोबेल पुरस्कार (साहित्य) — एशिया के पहले नोबेल विजेता
  • शांतिनिकेतन (विश्व-भारती) के संस्थापक
  • महाकवि, चित्रकार, दार्शनिक, संगीतकार
  • 'गीतांजलि' उनका विश्व-प्रसिद्ध काव्य-संग्रह

कुत्ता

  • शांतिनिकेतन का साधारण कुत्ता
  • गुरुदेव का अनुयायी
  • मूक प्रेम का प्रतीक

लंगड़ी मैना

  • एक पैर से अपंग
  • अकेलेपन का प्रतीक
  • गुरुदेव की सहानुभूति का पात्र

5. केन्द्रीय भाव और संदेश

  1. प्राणिमात्र से प्रेम: सभी प्राणियों में आत्मा है।
  2. संवेदनशीलता: एक महान आत्मा छोटे जीवों के दुख को भी अनुभव करती है।
  3. पशु-पक्षी की भावना: वे भी सुख-दुख, प्रेम-वियोग अनुभव करते हैं।
  4. मानवीय गुण: गुरुदेव की महानता उनके पशु-प्रेम में।
  5. एकाकीपन का दुख: लंगड़ी मैना के माध्यम से समाज के उपेक्षित लोगों का प्रतीक।

6. साहित्यिक विशेषताएँ

शैली

  1. संस्मरणात्मक: व्यक्तिगत अनुभव।
  2. भावप्रवण: हृदयस्पर्शी प्रसंग।
  3. चित्रात्मक: दृश्यों का सजीव चित्रण।
  4. संस्कृत-निष्ठ: 'प्राणिमात्र', 'अन्तर्निहित स्नेह' जैसे शब्द।

भाषा

  • शुद्ध साहित्यिक हिन्दी
  • कहीं-कहीं तत्सम-तद्भव-देशज शब्दों का सुंदर मिश्रण
  • भाव और विचार का सामंजस्य

अलंकार

  • उपमा: "कुत्ता मानो मूर्ति बन गया था"
  • मानवीकरण: मैना को मनुष्य जैसा भाव-संवेदी दिखाना
  • विरोधाभास: अकेली मैना बनाम कौवों का समूह

7. शांतिनिकेतन-श्रीनिकेतन का संदर्भ

शांतिनिकेतन

  • पश्चिम बंगाल का एक नगर (बीरभूम जिला)
  • 1901 में गुरुदेव टैगोर ने स्थापित
  • 1921 में 'विश्व-भारती विश्वविद्यालय' के रूप में विस्तारित
  • भारत का प्रसिद्ध शिक्षा-केंद्र

श्रीनिकेतन

  • शांतिनिकेतन के पास का कृषि-केंद्र
  • ग्रामीण विकास के लिए स्थापित
  • 1922 में स्थापना
  • गुरुदेव की ग्रामीण भारत के लिए परिकल्पना

8. पाठ का संदेश आज के संदर्भ में

  • पशु-कल्याण: आधुनिक भारत में आवारा पशुओं के प्रति संवेदना।
  • पर्यावरण-रक्षा: पक्षियों की प्रजातियाँ संकट में हैं।
  • अकेलेपन की समस्या: समाज में मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा।
  • दिव्यांगता-सम्मान: लंगड़ी मैना के माध्यम से।
  • एकता: प्राणिमात्र की एकता का दर्शन।

9. कुछ महत्वपूर्ण उद्धरण

"यह कुत्ता मुझे अपने अन्तर्निहित स्नेह से देख रहा है।"

"मैं तो उदास हूँ, क्या यह लंगड़ी मैना भी मेरी तरह उदास है?"

"ऐसे प्राणियों को छोड़कर कैसे जा सकता हूँ?"


10. समापन

'एक कुत्ता और एक मैना' केवल दो प्रसंगों का संस्मरण नहीं — यह गुरुदेव टैगोर की महान आत्मा का दर्शन है। हजारी प्रसाद द्विवेदी ने सरल, सहज शैली में एक महान कवि के 'मानवीय' पक्ष को उजागर किया है। यह पाठ हमें सिखाता है कि महानता पद-प्रतिष्ठा से नहीं — संवेदनशीलता और प्राणिमात्र के प्रेम से आती है।

Key formulas & results

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लेखक
हजारी प्रसाद द्विवेदी (1907-1979) — आचार्य
शांतिनिकेतन में हिन्दी-भवन के अध्यक्ष
विधा
संस्मरणात्मक निबंध
व्यक्तिगत अनुभव के माध्यम से गुरुदेव का चित्रण
मूल रचना
'कुटज' निबंध-संग्रह से
मुख्य पात्र
गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर (1861-1941)
नोबेल पुरस्कार 1913
स्थान
शांतिनिकेतन + श्रीनिकेतन (पश्चिम बंगाल)
विश्व-भारती विश्वविद्यालय
दो प्रसंग
1) कुत्ते का प्रेम 2) लंगड़ी मैना की उदासी
गुरुदेव की संवेदनशीलता के प्रमाण
केंद्रीय भाव
प्राणिमात्र से प्रेम; संवेदनशीलता
लेखक की प्रमुख रचना
'बाणभट्ट की आत्मकथा' (उपन्यास), 'कुटज' (निबंध)
पद्मभूषण 1957
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Common mistakes & fixes

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WATCH OUT
लेखक का नाम भ्रमित करना
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी (1907-1979) — शांतिनिकेतन में हिन्दी-भवन के अध्यक्ष। 'बाणभट्ट की आत्मकथा' के रचयिता।
WATCH OUT
शांतिनिकेतन और श्रीनिकेतन में अंतर भूलना
शांतिनिकेतन = विश्व-भारती विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर। श्रीनिकेतन = पास का कृषि/ग्रामीण-विकास केंद्र। दोनों गुरुदेव ने स्थापित किए।
WATCH OUT
गुरुदेव का जीवन-काल गलत
रवीन्द्रनाथ ठाकुर (1861-1941)। 1913 में नोबेल पुरस्कार (साहित्य) — एशिया के पहले नोबेल विजेता।

Practice problems

Try each one yourself before tapping "Show solution". Active recall > rereading.

Q1EASY· लेखक
'एक कुत्ता और एक मैना' के लेखक कौन हैं?
Show solution
✦ उत्तर: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी (1907-1979) — शांतिनिकेतन में हिन्दी-भवन के अध्यक्ष; 'बाणभट्ट की आत्मकथा' के रचयिता।
Q2EASY· स्थान
गुरुदेव टैगोर शांतिनिकेतन से किस स्थान पर गए थे?
Show solution
✦ उत्तर: श्रीनिकेतन — शांतिनिकेतन के पास का कृषि/ग्रामीण-विकास केंद्र।
Q3MEDIUM· प्रसंग
कुत्ते का प्रसंग बताइए जो गुरुदेव की संवेदनशीलता दर्शाता है।
Show solution
चरण 1 — शांतिनिकेतन का कुत्ता। शांतिनिकेतन आश्रम में एक कुत्ता था जो गुरुदेव से बहुत प्रेम करता था। रोज़ सुबह गुरुदेव के कमरे के बाहर बैठा रहता। चरण 2 — श्रीनिकेतन-स्थानांतरण। एक बार गुरुदेव श्रीनिकेतन गए। दूसरे दिन सुबह उन्होंने देखा — वही कुत्ता शांतिनिकेतन से चलकर श्रीनिकेतन तक आ गया! चरण 3 — गुरुदेव की प्रतिक्रिया। गुरुदेव बहुत भावुक हो गए। कुत्ते के सिर पर हाथ फेरा। बोले — 'यह कुत्ता मुझे अपने अन्तर्निहित स्नेह से देख रहा है। ऐसे प्राणियों को छोड़कर कैसे जा सकता हूँ?' चरण 4 — संदेश। गुरुदेव की संवेदनशीलता प्रकट होती है — वे एक साधारण कुत्ते के प्रेम को भी पहचान सकते थे। ✦ उत्तर: कुत्ता गुरुदेव के पीछे शांतिनिकेतन से श्रीनिकेतन तक चलकर आया। गुरुदेव भावुक हुए और बोले — 'यह कुत्ता अन्तर्निहित स्नेह से देख रहा है, ऐसे प्राणियों को कैसे छोड़ूँ?' यह प्रसंग गुरुदेव की पशु-प्रेम और संवेदनशीलता को उजागर करता है।
Q4MEDIUM· मैना-प्रसंग
लंगड़ी मैना का प्रसंग गुरुदेव की किस विशेषता को दर्शाता है?
Show solution
चरण 1 — मैना का परिचय। शांतिनिकेतन में गुरुदेव की बालकनी पर एक मैना रोज़ आती थी। पर वह एक पैर से लंगड़ी थी। चरण 2 — गुरुदेव का सूक्ष्म निरीक्षण। गुरुदेव ने देखा — मैना अकेली रहती है। अन्य मैनाएँ उसे संग नहीं लेतीं। एक कौवा उसे परेशान कर रहा था। चरण 3 — गुरुदेव की संवेदना। गुरुदेव बहुत दुखी हुए। उन्हें लगा यह अपंग मैना उदास और अकेली है। चरण 4 — कविता का जन्म। गुरुदेव ने कविता लिखी — 'मैं तो उदास हूँ, क्या यह लंगड़ी मैना भी मेरी तरह उदास है?' — पशु-पक्षी में मनुष्य जैसी ही भावनाएँ। चरण 5 — विशेषता। गुरुदेव की सूक्ष्म-दृष्टि, समदर्शन, प्राणिमात्र से प्रेम — एक महान आत्मा की पहचान। ✦ उत्तर: लंगड़ी मैना का प्रसंग गुरुदेव की सूक्ष्म निरीक्षण-शक्ति, संवेदनशीलता, और प्राणिमात्र से प्रेम को दर्शाता है। उन्होंने कविता लिखी — 'क्या यह लंगड़ी मैना भी मेरी तरह उदास है?' — पशु-पक्षी की भावनाओं को मनुष्य के समान समझना उनकी महानता का प्रमाण।
Q5HARD· व्यक्तित्व
इस पाठ के माध्यम से गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर के व्यक्तित्व का चित्रण कीजिए।
Show solution
चरण 1 — गुरुदेव का परिचय। रवीन्द्रनाथ ठाकुर (1861-1941) — भारत के महाकवि, 1913 में नोबेल पुरस्कार के विजेता, 'जन गण मन' के रचयिता। चरण 2 — संवेदनशील आत्मा। वे केवल कवि नहीं — एक संवेदनशील मानव थे। साधारण कुत्ते के प्रेम को पहचानते थे। लंगड़ी मैना की उदासी अनुभव करते थे। चरण 3 — प्राणिमात्र से प्रेम। उनके लिए हर प्राणी समान — कुत्ता, मैना, मनुष्य सब। यह जैन-बौद्ध दर्शन का प्रभाव। चरण 4 — सूक्ष्म निरीक्षण। वे बारीकी से देखते — कुत्ता मेरी ओर कैसे देख रहा है? मैना क्यों अकेली है? कौवा क्यों परेशान कर रहा है? चरण 5 — कविता में अभिव्यक्ति। उनकी कविताओं में पशु-पक्षी, प्रकृति की सजीव उपस्थिति। 'मैं तो उदास हूँ, क्या यह लंगड़ी मैना भी मेरी तरह उदास है?' चरण 6 — मानवीय गुण। महान कवि होने के साथ-साथ वे सरल, संवेदनशील, और प्राणिमात्र से प्रेम करने वाले थे — यही उनकी सच्ची महानता। ✦ उत्तर: रवीन्द्रनाथ ठाकुर एक संवेदनशील, समदर्शी, सूक्ष्म-दृष्टिवाले महान आत्मा थे। नोबेल विजेता होने के बाद भी एक साधारण कुत्ते के प्रेम को पहचानते और लंगड़ी मैना की उदासी अनुभव करते थे। प्राणिमात्र से उनका प्रेम; पशु-पक्षियों में मनुष्य जैसी भावना देखना; कविता में इसकी अभिव्यक्ति — यही उनकी सच्ची महानता थी।

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • लेखक: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी (1907-1979)
  • विधा: संस्मरणात्मक निबंध
  • मूल संग्रह: 'कुटज'
  • केंद्रीय पात्र: गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर (1861-1941)
  • स्थान: शांतिनिकेतन और श्रीनिकेतन (पश्चिम बंगाल)
  • दो प्रसंग: 1) कुत्ता शांतिनिकेतन से श्रीनिकेतन आता है, 2) लंगड़ी मैना की उदासी
  • गुरुदेव की प्रसिद्ध उक्ति: 'ऐसे प्राणियों को छोड़कर कैसे जा सकता हूँ?'
  • गुरुदेव की कविता: 'क्या यह लंगड़ी मैना भी मेरी तरह उदास है?'
  • गुरुदेव के पुरस्कार: नोबेल 1913, ज्ञानपीठ नहीं (तब था नहीं)
  • लेखक की प्रमुख रचनाएँ: बाणभट्ट की आत्मकथा, कुटज, अशोक के फूल

CBSE marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Typical chapter weightage: 4–5 अंक प्रति बोर्ड पेपर

Question typeMarks eachTypical countWhat it tests
बहुविकल्पीय / अति लघु11–2लेखक; पात्र; स्थान; प्रसंग
लघु उत्तरीय31कुत्ते का प्रसंग; मैना का प्रसंग; गुरुदेव की संवेदनशीलता
दीर्घ उत्तरीय50–1गुरुदेव का व्यक्तित्व-चित्रण; प्राणिमात्र-प्रेम का संदेश
Prep strategy
  • लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी — आचार्य, शांतिनिकेतन में हिन्दी-भवन के अध्यक्ष
  • गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर — नोबेल विजेता (1913), 'गीतांजलि' के रचयिता
  • शांतिनिकेतन/श्रीनिकेतन का अंतर समझें
  • दो प्रसंग — कुत्ता और लंगड़ी मैना
  • गुरुदेव की कविता उद्धरण — 'क्या यह लंगड़ी मैना भी मेरी तरह उदास है?'
  • प्राणिमात्र से प्रेम का सार्वकालिक संदेश

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

विश्व-भारती विश्वविद्यालय

शांतिनिकेतन आज एक प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालय है, UNESCO World Heritage Site (2023)।

पशु-कल्याण आंदोलन

गुरुदेव की भावना आज के पशु-कल्याण कानूनों (PCA Act 1960) में प्रतिबिंबित।

जैव-विविधता संरक्षण

मैना जैसे पक्षियों की प्रजातियाँ आज संकट में — IUCN Red List में।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

  1. लेखक का परिचय शुरू में दें — आचार्य द्विवेदी, शांतिनिकेतन के हिन्दी-भवन के अध्यक्ष
  2. गुरुदेव टैगोर की मुख्य उपलब्धियाँ — नोबेल 1913, 'गीतांजलि'
  3. दोनों प्रसंग क्रम में लिखें — पहले कुत्ता, फिर मैना
  4. गुरुदेव की भावुक उक्ति को quote करें
  5. मैना-कविता का उद्धरण उत्तर को रोचक बनाता है
  6. अंत में 'प्राणिमात्र से प्रेम' का संदेश ज़रूर लिखें

Going beyond the textbook

For olympiad aspirants and curious learners — topics that build on this chapter.

  • रवीन्द्रनाथ ठाकुर की अन्य रचनाएँ: गीतांजलि, गीतिमाल्य, गोरा, घरे बायरे
  • हजारी प्रसाद द्विवेदी की निबंध-शैली: 'अशोक के फूल', 'कुटज', 'कल्पलता'
  • शांतिनिकेतन को 2023 में UNESCO World Heritage Site का दर्जा
  • नोबेल पुरस्कार 1913 की पृष्ठभूमि — पहले एशियाई विजेता

Where else this chapter is tested

CBSE board isn't the only one — other exams test this chapter too.

CBSE Board Class 9उच्च
हिन्दी ओलिंपियाडमध्यम
UGC NET हिन्दीउच्च — द्विवेदी जी की निबंध-शैली

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

उन्होंने देखा कि लंगड़ी मैना अकेली है, अन्य मैनाएँ उसे संग नहीं लेतीं, कौवा उसे परेशान कर रहा है। यह दृश्य देखकर वे भावुक हुए। उन्हें लगा यह मैना उदास है — जैसे वे स्वयं कभी-कभी उदास होते हैं। इसी से कविता का जन्म हुआ।

शांतिनिकेतन = गुरुदेव टैगोर द्वारा स्थापित मुख्य शिक्षा-केंद्र, जो बाद में 'विश्व-भारती विश्वविद्यालय' बना (1921)। श्रीनिकेतन = शांतिनिकेतन के पास का कृषि/ग्रामीण-विकास केंद्र (1922 में स्थापित)। दोनों लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर हैं।
Verified by the tuition.in editorial team
Last reviewed on 19 May 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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