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  • 1रिपोर्ताज विधा की पहचान
  • 2फणीश्वरनाथ रेणु और आँचलिक साहित्य
  • 31975 की बिहार बाढ़ का ऐतिहासिक संदर्भ
  • 4मानवीय संवेदना का पत्रकारी चित्रण
  • 5आपदा-प्रबंधन के मूल सिद्धांत
💡
Why this chapter matters
फणीश्वरनाथ रेणु का यह रिपोर्ताज 1975 की पटना बाढ़ का साक्षात अनुभव। आँचलिक साहित्य के सर्वोच्च लेखक की पैनी पत्रकारी दृष्टि और मानवीय संवेदना का अद्भुत संगम।

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इस जल प्रलय में — कक्षा 9 हिन्दी (कृतिका)

"बाढ़ की ख़बर सुनकर मैंने इसे अनेक रिपोर्टों में पढ़ा था, लेकिन देखी पहली बार थी।" — फणीश्वरनाथ रेणु

1. पाठ-परिचय

'इस जल प्रलय में' फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा रचित एक रिपोर्ताज है। यह 1975 में बिहार में आई भयानक पटना की बाढ़ का साक्षात अनुभव-वर्णन है। लेखक स्वयं पटना में थे और इस आपदा का उन्होंने सजीव चित्रण किया।

विधा-परिचय: रिपोर्ताज

  • रिपोर्ताज = फ्रेंच शब्द (Reportage)
  • अर्थ: 'आँखों देखी रिपोर्ट'
  • पत्रकारिता + साहित्य का संगम
  • वास्तविक घटना का साहित्यिक चित्रण
  • तथ्य + भावना दोनों

पाठ की पृष्ठभूमि

  • तिथि: अगस्त-सितंबर 1975
  • स्थान: पटना, बिहार
  • घटना: गंगा और गंडक नदियों में भयानक बाढ़
  • प्रभाव: लाखों लोग प्रभावित, हज़ारों मरे

2. लेखक-परिचय — फणीश्वरनाथ रेणु

जीवनवृत्त

  • जन्म: 4 मार्च 1921, औराही हिंगना (पूर्णिया, अब अररिया, बिहार)
  • मृत्यु: 11 अप्रैल 1977
  • उपाधि: 'आँचलिक उपन्यासकार' / 'धरती के लाल'

विशेष

  • आँचलिक साहित्य के सर्वोच्च लेखक
  • गांधी-वादी, समाजवादी
  • स्वतंत्रता-सेनानी
  • नेपाल के क्रांतिकारी आंदोलन (1950) में भाग लिया
  • 1975 में आपातकाल के विरोध में पद्मश्री लौटाया

प्रमुख रचनाएँ

उपन्यास:

  • मैला आँचल (1954) — हिन्दी का प्रथम आँचलिक उपन्यास
  • परती परिकथा (1957)
  • कितने चौराहे (1966)
  • जुलूस (1965)
  • दीर्घतपा (1973)

कहानी-संग्रह:

  • ठुमरी, अग्निखोर, अच्छे आदमी

रिपोर्ताज-संग्रह:

  • ऋणजल-धनजल (इसी में 'इस जल प्रलय में' है)
  • आत्म-परिचय

फिल्म:

  • 'तीसरी कसम' (1966) — उनकी कहानी 'तीसरी कसम अर्थात मारे गए गुलफाम' पर आधारित

भाषा-शैली

  • आँचलिक हिन्दी — बिहार/पूर्णिया की बोली
  • सरल, ठेठ, ज़मीनी
  • हिन्दी, मैथिली, भोजपुरी का मिश्रण
  • संवेदनशील, भावप्रवण
  • सांस्कृतिक रंग

3. पाठ का सारांश

बाढ़ का आगमन

प्रारंभ:

  • सितंबर 1975, पटना
  • गंगा और गंडक नदियों में पानी बढ़ रहा था
  • रेडियो पर समाचार — पानी खतरे के निशान से ऊपर
  • लोग शुरू में बहुत गंभीर नहीं थे

लेखक की प्रतिक्रिया:

  • रेणु जी पटना में थे
  • पहली बार जल-प्रलय देखा
  • पहले रिपोर्ट में पढ़ा था, अब साक्षात अनुभव

स्थिति बिगड़ती है

पानी का बढ़ना:

  • दिन-प्रतिदिन पानी बढ़ता गया
  • सड़कों पर पानी, घरों में पानी
  • विद्युत-आपूर्ति बंद
  • दूरसंचार ठप
  • नागरिक जीवन अस्त-व्यस्त

बचाव कार्य:

  • सेना, NDRF, सिविल डिफेंस के जवान
  • नावों से लोगों को निकालना
  • भोजन-पानी की कमी

मानवीय कथाएँ

1. राजेन्द्र नगर का अनुभव:

  • लेखक का परिवार वहाँ रहता था
  • घर में पानी घुसा
  • ऊपरी मंजिल पर शरण
  • भोजन कम, पानी पीने का संकट

2. पड़ोसी की कहानी:

  • एक पड़ोसी ने अपनी गाय बचाने का प्रयास
  • गाय बह गई
  • पूरा परिवार रोता रहा

3. बच्चों का दृश्य:

  • बच्चे शुरू में बाढ़ को 'मज़ा' समझ रहे थे
  • बाद में भूख, ठंड, बीमारी
  • माताओं की चिंता

बाढ़ का प्रभाव

आर्थिक:

  • फसलें नष्ट
  • मकान ढहे
  • व्यवसाय ठप
  • करोड़ों का नुकसान

सामाजिक:

  • परिवार बिछड़े
  • महामारी का खतरा
  • शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था ठप

मनोवैज्ञानिक:

  • लोग सदमे में
  • भविष्य की चिंता
  • ट्रॉमा

बाढ़ का अंत

  • पानी धीरे-धीरे उतरना शुरू
  • कीचड़, गंदगी, बीमारी
  • सरकारी राहत-कार्य
  • लोगों ने धीरे-धीरे जीवन फिर शुरू किया
  • पर बहुत कुछ हमेशा के लिए खो गया

4. प्रमुख घटनाएँ और तत्व

बाढ़ का कारण

  • गंगा और गंडक में अप्रत्याशित बढ़ोतरी
  • नेपाल से भी पानी आना
  • पटना का नीचा भू-भाग
  • अपर्याप्त बाँध-व्यवस्था

राहत-कार्य

  • सेना, NDRF, सिविल डिफेंस
  • स्थानीय स्वयंसेवक
  • मीडिया की भूमिका
  • अंतर्राष्ट्रीय सहायता

लोगों का साहस

  • आपदा में भी आपसी सहायता
  • अजनबी एक-दूसरे की मदद करते
  • भारतीय एकता का प्रकटीकरण

5. लेखक के मार्मिक अनुभव

व्यक्तिगत अनुभव

  • स्वयं और परिवार का संकट
  • पड़ोसियों की पीड़ा
  • बच्चों की मासूमियत
  • वृद्धों का दर्द

पत्रकारी दृष्टि

  • एक-एक विवरण पर ध्यान
  • तथ्य और भावना का संगम
  • मानवीय कथाओं पर ज़ोर

6. रिपोर्ताज की विशेषताएँ

विशेष

  1. साक्षात्कार-आधारित: लेखक स्वयं प्रत्यक्ष-दर्शी
  2. तथ्यात्मक: सच्ची घटनाएँ
  3. साहित्यिक भाषा: कविता-जैसी अभिव्यक्ति
  4. मानवीय कोण: व्यक्तियों की कथाएँ
  5. विवेचनात्मक: कारण-प्रभाव का विश्लेषण

भाषा-शैली

  • आँचलिक हिन्दी: बिहार की ज़मीनी भाषा
  • विवरणात्मक: हर दृश्य का सजीव चित्रण
  • भावनात्मक: संवेदनशीलता
  • यथार्थवादी: कोई कल्पना नहीं

7. केन्द्रीय भाव और संदेश

  1. प्रकृति की शक्ति: मानव-व्यवस्था कितनी भी समर्थ हो, प्रकृति के सामने तुच्छ है।
  2. मानव-संघर्ष: संकट में भी मनुष्य की जुझारू भावना।
  3. एकता और सहयोग: आपदा में सब साथ — जाति-धर्म से ऊपर।
  4. तैयारी का महत्व: आपदा-प्रबंधन की आवश्यकता।
  5. पर्यावरण-संरक्षण: नदियों की देखभाल, बाँधों का प्रबंधन।

8. 1975 की पटना बाढ़ — ऐतिहासिक तथ्य

  • तिथि: अगस्त-सितंबर 1975
  • प्रभावित: 35 लाख से अधिक लोग
  • मृत्यु: 1,000+ (अनुमानित)
  • आर्थिक नुकसान: ₹500 करोड़ (तत्कालीन)
  • कारण: गंगा, गंडक, सोन नदियों में अत्यधिक बाढ़
  • प्रतिक्रिया: भारत सरकार, सेना, अंतर्राष्ट्रीय सहायता
  • परिणाम: बिहार में आपदा-प्रबंधन में सुधार

9. आज की प्रासंगिकता

बिहार और बाढ़

  • बिहार आज भी हर साल बाढ़ का सामना करता है
  • कोसी, गंडक, गंगा प्रमुख कारण
  • 2008 की कोसी बाढ़ — 2.5 लाख प्रभावित

आपदा-प्रबंधन

  • NDRF (National Disaster Response Force) 2006 में स्थापित
  • राज्य-स्तर पर SDRFs
  • Early Warning Systems
  • सोशल मीडिया से सहायता

जलवायु परिवर्तन

  • ग्लोबल वार्मिंग से बाढ़-आवृत्ति बढ़ी
  • 'भगवान-जनित' नहीं — मानव-जनित भी

10. प्रमुख उद्धरण

"बाढ़ की ख़बर सुनकर मैंने इसे अनेक रिपोर्टों में पढ़ा था, लेकिन देखी पहली बार थी।"

"जल-प्रलय के बीच मानवता ही जीतती है।"

"पानी देवता है, पानी ही शत्रु।"


11. समापन

'इस जल प्रलय में' केवल एक रिपोर्ताज नहीं — एक मानवीय दस्तावेज़ है। फणीश्वरनाथ रेणु ने अपनी पैनी पत्रकारी दृष्टि और संवेदनशील साहित्यिक शैली से 1975 की पटना बाढ़ का साक्षात अनुभव हमें दिया। यह पाठ हमें सिखाता है — प्रकृति के सामने विनम्र रहना, आपदा-प्रबंधन को गंभीरता से लेना, और संकट में मानवीय एकता का महत्व। आँचलिक भाषा का यह चमकता उदाहरण आज भी प्रासंगिक है।

Key formulas & results

Everything you need to memorise, in one card. Screenshot this for revision.

लेखक
फणीश्वरनाथ रेणु (1921-1977) — 'आँचलिक उपन्यासकार'
बिहार से
विधा
रिपोर्ताज (Reportage) — आँखों देखी रिपोर्ट
पत्रकारिता + साहित्य
मूल संग्रह
'ऋणजल-धनजल' (रिपोर्ताज-संग्रह)
घटना
1975 की पटना बाढ़ (गंगा-गंडक)
अगस्त-सितंबर 1975
रेणु की प्रसिद्ध रचना
'मैला आँचल' (1954) — हिन्दी का प्रथम आँचलिक उपन्यास
फिल्म
'तीसरी कसम' (1966) — उनकी कहानी पर
राज कपूर अभिनीत
आपातकाल विरोध
1975 में पद्मश्री लौटाया
इंदिरा गांधी के आपातकाल के विरोध में
भाषा
आँचलिक हिन्दी (बिहार/पूर्णिया)
हिन्दी + मैथिली + भोजपुरी
⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
रिपोर्ताज को कहानी मानना
रिपोर्ताज = आँखों देखी रिपोर्ट (वास्तविक घटना)। कहानी = कल्पना। 'इस जल प्रलय में' = वास्तविक 1975 की बाढ़ का वर्णन।
WATCH OUT
रेणु को सिर्फ कहानीकार मानना
रेणु आँचलिक उपन्यासकार ('मैला आँचल', 'परती परिकथा'), कहानीकार, रिपोर्ताज-लेखक — बहुआयामी।
WATCH OUT
बाढ़ का गलत वर्ष
1975 की पटना बाढ़ — अगस्त-सितंबर 1975। गंगा-गंडक-सोन नदियों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी।
WATCH OUT
'तीसरी कसम' फिल्म के बारे में गलत
1966 की फिल्म, राज कपूर-वहीदा रहमान अभिनीत। बासु भट्टाचार्य निर्देशित। रेणु की कहानी 'मारे गए गुलफाम' पर आधारित।

Practice problems

Try each one yourself before tapping "Show solution". Active recall > rereading.

Q1EASY· लेखक
फणीश्वरनाथ रेणु को किस उपाधि से जाना जाता है?
Show solution
✦ उत्तर: 'आँचलिक उपन्यासकार' — उन्होंने हिन्दी में आँचलिक साहित्य की धारा शुरू की। 'मैला आँचल' (1954) हिन्दी का प्रथम आँचलिक उपन्यास।
Q2EASY· विधा
रिपोर्ताज क्या है?
Show solution
✦ उत्तर: रिपोर्ताज = फ्रेंच शब्द (Reportage) = 'आँखों देखी रिपोर्ट'। पत्रकारिता + साहित्य का संगम। वास्तविक घटना का साहित्यिक चित्रण।
Q3MEDIUM· घटना
1975 की पटना बाढ़ का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Show solution
चरण 1 — समय और स्थान। अगस्त-सितंबर 1975, पटना (बिहार)। चरण 2 — कारण। गंगा, गंडक, सोन नदियों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी। नेपाल से भी पानी आया। चरण 3 — प्रभाव। • 35 लाख से अधिक लोग प्रभावित • 1,000+ मृत्यु • ₹500 करोड़ का नुकसान • सड़कें, घर पानी में डूबे • विद्युत-संचार ठप चरण 4 — राहत। सेना, NDRF, स्थानीय स्वयंसेवक। नावों से लोगों को निकाला गया। चरण 5 — परिणाम। बिहार में आपदा-प्रबंधन में सुधार। बाद में NDRF (2006) जैसी संस्थाएँ बनीं। ✦ उत्तर: 1975 की पटना बाढ़ बिहार की भयानक आपदा थी। अगस्त-सितंबर 1975 में गंगा-गंडक-सोन में अप्रत्याशित बाढ़ से 35 लाख से अधिक लोग प्रभावित, 1000+ मृत्यु। सड़कें-घर डूबे, बिजली-संचार ठप। फणीश्वरनाथ रेणु ने इसी घटना का साक्षात वर्णन 'इस जल प्रलय में' में किया।
Q4MEDIUM· मानवता
बाढ़ के दौरान मानवीय एकता का चित्रण कैसा है?
Show solution
चरण 1 — संकट में एकता। आपदा के समय सब लोग — जाति, धर्म, वर्ग से ऊपर उठकर एक-दूसरे की मदद करते हैं। चरण 2 — पड़ोसियों की मदद। एक पड़ोसी जब अपनी गाय बचाने का प्रयास करता है, पूरा मोहल्ला जुड़ता है। गाय बह जाने पर सब साथ रोते हैं। चरण 3 — अनजान भी मदद करते। अजनबी एक-दूसरे की मदद करते — खाना बाँटते, बच्चों को संभालते, बीमारों को देखते। चरण 4 — स्वयंसेवक। स्थानीय युवा नावों से लोगों को निकालते। सेना और NDRF के साथ। चरण 5 — संदेश। संकट में मनुष्यता ही जीतती है। यह भारतीय संस्कृति की मूल भावना। ✦ उत्तर: बाढ़ में मानवीय एकता का अद्भुत चित्रण — पड़ोसी एक-दूसरे की मदद करते; अजनबी भी सहायक बनते; जाति-धर्म-वर्ग की दीवारें टूटतीं। स्वयंसेवक नावों से लोगों को निकालते। संकट में मनुष्यता का चरम रूप — यही रेणु का मूल संदेश।
Q5HARD· विश्लेषण
'इस जल प्रलय में' रिपोर्ताज के साहित्यिक और पत्रकारी पक्षों का विश्लेषण कीजिए।
Show solution
चरण 1 — रिपोर्ताज की विधा। रिपोर्ताज = पत्रकारिता + साहित्य का संगम। तथ्य + भावना दोनों। चरण 2 — पत्रकारी पक्ष। • वास्तविक घटना का सजीव वर्णन • एक-एक विवरण पर ध्यान • तथ्य आधारित — 1975 की पटना बाढ़ • प्रत्यक्ष-दर्शी का अनुभव • सरकारी राहत, NDRF, सेना का उल्लेख चरण 3 — साहित्यिक पक्ष। • आँचलिक भाषा — बिहार की ज़मीनी बोली • मानवीय कथाएँ — पड़ोसी, बच्चे, गाय • काव्यात्मक भाषा — 'पानी देवता है, पानी ही शत्रु' • भावनात्मक गहराई चरण 4 — आँचलिक शैली। रेणु का विशिष्ट योगदान — हिन्दी में 'आँचलिक' तत्व। ठेठ बोली, सांस्कृतिक रंग। चरण 5 — मानवीय कोण। साधारण लोगों की कथाएँ — पड़ोसी की गाय; बच्चों की मासूमियत; बुज़ुर्गों का दर्द। चरण 6 — संदेश। प्रकृति की शक्ति; मानव-संघर्ष; एकता; तैयारी का महत्व। चरण 7 — स्थायी प्रासंगिकता। आज भी बिहार में बाढ़; जलवायु परिवर्तन से बढ़ती आपदाएँ — रिपोर्ताज की प्रासंगिकता बरकरार। ✦ उत्तर: 'इस जल प्रलय में' रिपोर्ताज के दोनों पक्षों — पत्रकारी (तथ्यात्मक, प्रत्यक्ष-दर्शी, विवरणात्मक) और साहित्यिक (आँचलिक भाषा, मानवीय कथाएँ, काव्यात्मकता) — का अद्भुत संगम। रेणु ने 1975 की पटना बाढ़ का सजीव चित्रण किया — साधारण लोगों की कथाओं से। तथ्य + भावना; पत्रकारिता + साहित्य; घटना + विश्लेषण — सब एक साथ। आज भी जब बिहार में बाढ़ आती है, यह रिपोर्ताज प्रासंगिक है।

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • लेखक: फणीश्वरनाथ रेणु (1921-1977), 'आँचलिक उपन्यासकार'
  • जन्म: 4 मार्च 1921, औराही हिंगना (बिहार)
  • विधा: रिपोर्ताज (आँखों देखी रिपोर्ट)
  • मूल संग्रह: 'ऋणजल-धनजल' (रिपोर्ताज-संग्रह)
  • घटना: 1975 की पटना बाढ़ (अगस्त-सितंबर)
  • कारण: गंगा, गंडक, सोन नदियों में अप्रत्याशित बाढ़
  • प्रभाव: 35 लाख प्रभावित, 1000+ मृत्यु
  • रेणु की प्रमुख रचनाएँ: मैला आँचल (1954), परती परिकथा, जुलूस
  • फिल्म: 'तीसरी कसम' (1966) — उनकी कहानी पर
  • आपातकाल विरोध: 1975 में पद्मश्री लौटाया
  • भाषा: आँचलिक हिन्दी (बिहार/पूर्णिया) — हिन्दी+मैथिली+भोजपुरी

CBSE marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Typical chapter weightage: 4–5 अंक प्रति बोर्ड पेपर

Question typeMarks eachTypical countWhat it tests
बहुविकल्पीय / अति लघु11–2लेखक; विधा; संग्रह; घटना
लघु उत्तरीय31बाढ़ का वर्णन; मानवीय एकता; आपदा-प्रबंधन
दीर्घ उत्तरीय50–1रिपोर्ताज की विशेषताएँ; रेणु की लेखन-शैली; आज की प्रासंगिकता
Prep strategy
  • लेखक रेणु — 'आँचलिक उपन्यासकार', 'मैला आँचल'
  • रिपोर्ताज विधा को समझें — आँखों देखी रिपोर्ट
  • 1975 की पटना बाढ़ की तिथि, कारण, प्रभाव
  • मानवीय कथाएँ — पड़ोसी, बच्चे, गाय
  • रेणु की भाषा — आँचलिक हिन्दी
  • आपातकाल विरोध में पद्मश्री लौटाया (1975)

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

बिहार बाढ़ — हर साल

बिहार आज भी हर साल बाढ़ का सामना करता है। 2008 की कोसी बाढ़ ने 2.5 लाख लोगों को प्रभावित किया।

NDRF (2006)

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल — 2006 में स्थापित, आज भारत की प्रमुख आपदा-प्रबंधन एजेंसी।

जलवायु परिवर्तन

ग्लोबल वार्मिंग से बाढ़ की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ी — 'इस जल प्रलय में' आज भी प्रासंगिक।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

  1. रिपोर्ताज की परिभाषा शुरू में दें
  2. रेणु का परिचय — 'आँचलिक उपन्यासकार', 'मैला आँचल'
  3. 1975 की पटना बाढ़ का ऐतिहासिक संदर्भ
  4. मानवीय कथाओं का उल्लेख — पड़ोसी, गाय, बच्चे
  5. आँचलिक भाषा-शैली पर बल
  6. आज की प्रासंगिकता — 2008 कोसी, जलवायु परिवर्तन

Going beyond the textbook

For olympiad aspirants and curious learners — topics that build on this chapter.

  • रेणु का 'मैला आँचल' और हिन्दी आँचलिक साहित्य की परंपरा
  • अन्य आँचलिक लेखक: नागार्जुन, उदय प्रकाश
  • तीसरी कसम फिल्म — हिन्दी सिनेमा के क्लासिक
  • 1975 आपातकाल और हिन्दी साहित्यकारों का विरोध
  • रिपोर्ताज परंपरा: हिन्दी में रेणु, श्रीकांत वर्मा, अज्ञेय

Where else this chapter is tested

CBSE board isn't the only one — other exams test this chapter too.

CBSE Board Class 9उच्च
हिन्दी ओलिंपियाडमध्यम
UGC NET हिन्दीउच्च — आँचलिक साहित्य विशेष
UPSC Disaster Managementमध्यम — 1975 बिहार बाढ़ केस-स्टडी

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

रिपोर्ताज = वर्तमान घटना का साक्षात-वर्णन, लंबा, साहित्यिक। फीचर = किसी विषय पर रोचक रिपोर्ट, मानवीय कोण, साहित्यिक नहीं भी। रिपोर्ताज अधिक गहरा और साहित्यिक होता है।

1975 में इंदिरा गांधी की सरकार ने आपातकाल लागू किया। नागरिक स्वतंत्रताएँ निलंबित कीं। रेणु ने इसी विरोध में अपना पद्मश्री लौटा दिया — उनकी राजनैतिक चेतना और सिद्धांत-निष्ठा का प्रमाण।

आँचलिक साहित्य = किसी विशेष भौगोलिक/सांस्कृतिक अंचल (region) पर केन्द्रित साहित्य। उस क्षेत्र की भाषा, संस्कृति, समस्याओं, लोगों का चित्रण। हिन्दी में रेणु इसके अग्रदूत — बिहार के पूर्णिया अंचल पर लिखा।
Verified by the tuition.in editorial team
Last reviewed on 20 May 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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