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  • 1एकांकी विधा की पहचान
  • 2जगदीशचंद्र माथुर और हिन्दी नाटक
  • 3दहेज-प्रथा की सामाजिक समस्या
  • 4स्त्री-सम्मान और शिक्षा का महत्व
  • 5'रीढ़ की हड्डी' का प्रतीकात्मक अर्थ
💡
Why this chapter matters
जगदीशचंद्र माथुर का यह एकांकी दहेज-प्रथा, स्त्री-शिक्षा विरोध, और पुरुष-प्रधान सोच पर तीखा प्रहार करता है। उमा का आत्म-सम्मानी रूप हर भारतीय लड़की के लिए प्रेरणा।

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रीढ़ की हड्डी — कक्षा 9 हिन्दी (कृतिका)

"रामस्वरूप: तो आप यह कह रहे हैं कि बेटी इसलिए नहीं देंगे क्योंकि वह पढ़ी-लिखी है? गोपाल प्रसाद: नहीं, इसलिए कि वह बी.ए. है।" — रीढ़ की हड्डी

1. पाठ-परिचय

'रीढ़ की हड्डी' जगदीशचंद्र माथुर द्वारा रचित एक प्रसिद्ध एकांकी नाटक है। यह एकांकी:

  • दहेज-प्रथा
  • स्त्री-शिक्षा का विरोध
  • पुरुष-प्रधान समाज की रूढ़ियाँ

जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर तीखा व्यंग्य करता है। उमा — एक शिक्षित कन्या — अंत में अपनी रीढ़ की हड्डी (आत्म-सम्मान) से समझौता नहीं करती।

विधा-परिचय: एकांकी

  • एकांकी = एक अंक का नाटक (One-Act Play)
  • संक्षिप्त, केन्द्रित, प्रभावी
  • एक ही दृश्य, एक ही समय
  • हिन्दी एकांकी के पिता: रामकुमार वर्मा / जगदीशचंद्र माथुर

2. लेखक-परिचय — जगदीशचंद्र माथुर

जीवनवृत्त

  • जन्म: 16 जुलाई 1917, खुर्जा (उत्तर प्रदेश)
  • मृत्यु: 14 मई 1978
  • शिक्षा: अंग्रेज़ी में एम.ए., प्रयाग विश्वविद्यालय
  • करियर: ICS अधिकारी, बाद में आकाशवाणी के महानिदेशक

विशेषताएँ

  • हिन्दी एकांकी के प्रमुख रचनाकार
  • नाटककार, कवि, संस्कृति-प्रेमी
  • आकाशवाणी से जुड़े

प्रमुख रचनाएँ

एकांकी-संग्रह:

  • भोर का तारा (1946)
  • रीढ़ की हड्डी (इसमें यह पाठ)
  • ओ मेरे सपने
  • खंडित यात्राएँ

नाटक:

  • कोणार्क
  • शारदीया
  • दशरथ नंदन

अन्य:

  • कविता-संग्रह: 'युगचेतना'

भाषा-शैली

  • सरल खड़ी बोली
  • संवाद-कुशलता
  • व्यंग्यात्मक
  • सामाजिक चेतना

3. एकांकी के पात्र

मुख्य पात्र

  1. रामस्वरूप: उमा का पिता, मध्यम-वर्गीय व्यक्ति। बेटी की शिक्षा में विश्वास करता है, पर समाज के दबाव में आ जाता है। उसके पास 'रीढ़ की हड्डी' नहीं — कमज़ोर निर्णय-शक्ति।

  2. प्रेमा: उमा की माँ। पारंपरिक स्त्री, पर बेटी के लिए चिंतित।

  3. उमा: 22 साल की शिक्षित कन्या (बी.ए.)। आत्म-सम्मानी, स्वाभिमानी। अंत में 'रीढ़ की हड्डी' दिखाती है।

  4. गोपाल प्रसाद: संभावित दूल्हे का पिता। दहेज-लालची, पुरुष-प्रधान विचारधारा का प्रतिनिधि। 'धूर्त' और 'चालाक'।

  5. शंकर: उमा का संभावित दूल्हा। 23-24 साल का युवक। शिक्षा का ढोंग, पर हल्की मानसिकता। पीते-पीते रात भर हॉस्टल में मस्ती।

  6. रतन: नौकर — संक्षिप्त भूमिका।


4. एकांकी का सारांश

प्रारंभ — रामस्वरूप का घर

दृश्य: रामस्वरूप के घर, बैठक का कमरा। संध्या का समय।

  • रामस्वरूप और प्रेमा (उमा के माता-पिता) दहेज वाले मेहमानों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
  • उमा का रिश्ता तय करने आ रहे हैं — गोपाल प्रसाद और उनका बेटा शंकर।
  • रामस्वरूप ने उमा की शिक्षा छिपाई है — जानबूझ कर बी.ए. नहीं बताया।
  • प्रेमा भी इस झूठ में शामिल है।

मेहमानों का आगमन

  • गोपाल प्रसाद और शंकर आते हैं।
  • गोपाल प्रसाद बहुत ही 'व्यापारी' तरीके से बात करते हैं — मानो लड़की खरीद रहे हों।
  • शंकर असहज दिखता है — असली-नकली शिक्षा का ढोंग।

उमा का प्रवेश

  • उमा को बुलाया जाता है।
  • गोपाल प्रसाद उसकी जाँच शुरू करते हैं — मानो किसी पशु को परख रहे हों।
  • 'झुकना', 'चलना', 'सिर हिलाना' — सब परीक्षण।
  • शंकर अजीब प्रश्न पूछता है।

महत्वपूर्ण मोड़ — सत्य का सामना

उमा का जवाब:

  • शंकर ने पूछा — 'शिक्षा?'
  • उमा ने सीधे कहा — "मैं बी.ए. हूँ।"
  • रामस्वरूप घबरा गए — झूठ खुल गया।
  • गोपाल प्रसाद ने कहा — "ओह! आपने तो बताया नहीं था।"
  • उन्होंने दहेज की बात फिर से शुरू की — 'पढ़ी-लिखी लड़की के लिए अधिक दहेज!'

शंकर का रहस्योद्घाटन

  • उमा ने शंकर को पहचाना — वह उसी हॉस्टल में आता था जहाँ वह रहती थी।
  • शंकर रात-रात भर वहाँ शराब पीता था
  • लड़कों को बहकाने आता था
  • उमा ने यह सब सामने सब के बताया।

क्लाइमैक्स — उमा की 'रीढ़ की हड्डी'

उमा का साहसिक भाषण:

"क्या आप मुझे एक माल समझते हैं? क्या मेरी 'रीढ़ की हड्डी' नहीं? मैं भी मनुष्य हूँ — सम्मान का हक है मुझे।"

  • गोपाल प्रसाद चकित और गुस्से में।
  • शंकर शर्मिंदा।
  • रामस्वरूप और प्रेमा को अपनी गलती समझ में आती है।
  • गोपाल प्रसाद-शंकर रिश्ते से मना कर देते हैं।

अंत — आत्म-सम्मान की विजय

  • मेहमान चले जाते हैं।
  • रामस्वरूप पहले तो दुखी होते हैं — पर उमा से माफ़ी मांगते हैं।
  • उमा माता-पिता को सांत्वना देती है — "ऐसे पुरुष से शादी से बेहतर अकेला रहना!"
  • प्रेमा भी बेटी की बुद्धि और साहस की प्रशंसा करती हैं।
  • एकांकी का संदेश — आत्म-सम्मान सर्वोपरि।

5. केन्द्रीय भाव और संदेश

मुख्य मुद्दे

  1. दहेज-प्रथा: सामाजिक रोग — जो लड़कियों को 'माल' बनाती है।
  2. स्त्री-शिक्षा का विरोध: 'पढ़ी-लिखी लड़की के लिए अधिक दहेज' — विकृत मानसिकता।
  3. पुरुष-प्रधान समाज: स्त्रियों को निम्न मानना।
  4. आत्म-सम्मान: 'रीढ़ की हड्डी' का प्रतीक — सीधा खड़ा रहना।
  5. माता-पिता की दुविधा: समाज के दबाव में बेटी की शिक्षा छिपाना।

प्रतीक — 'रीढ़ की हड्डी'

  • शाब्दिक अर्थ: मेरुदंड (spine)
  • लाक्षणिक अर्थ: आत्म-सम्मान, साहस, सिद्धांत-निष्ठा
  • पाठ में: उमा की रीढ़ है (आत्म-सम्मानी), रामस्वरूप की रीढ़ कमज़ोर (समाज के दबाव में), गोपाल प्रसाद-शंकर की रीढ़ नहीं (नैतिक रूप से कमज़ोर)
  • संदेश: हर मनुष्य की 'रीढ़ की हड्डी' होनी चाहिए।

6. साहित्यिक विशेषताएँ

विधा

  • एकांकी: एक अंक, एक दृश्य, एक समय
  • संक्षिप्त पर प्रभावी
  • नाटकीय तत्व

भाषा

  • सरल, बोलचाल की हिन्दी
  • संवाद-केन्द्रित
  • व्यंग्यात्मक

शैली

  • संवाद-शैली: पात्रों के बीच गहन वार्तालाप
  • नाटकीय: तनाव, चढ़ाव-उतार
  • व्यंग्यात्मक: सामाजिक रूढ़ियों पर

अलंकार

  • विरोधाभास: रामस्वरूप का प्रगतिशील विचार बनाम कमज़ोर निर्णय
  • व्यंग्य: 'पढ़ी-लिखी लड़की का अधिक दहेज'
  • प्रतीक: 'रीढ़ की हड्डी' = आत्म-सम्मान
  • पुनरुक्ति: 'रीढ़ की हड्डी' का बार-बार प्रयोग

रस

  • करुण रस: उमा की पीड़ा
  • रौद्र रस: समाज के विरुद्ध आक्रोश
  • वीर रस: उमा का साहस

7. दहेज-प्रथा — सामाजिक संदर्भ

इतिहास

  • प्राचीन काल में 'वर-दक्षिणा' की उदार परंपरा
  • मध्ययुग में विकृत हुई
  • ब्रिटिश काल में और बढ़ी
  • आज भी प्रचलित

कानून

  • Dowry Prohibition Act 1961: दहेज लेना और देना दोनों दंडनीय
  • IPC Section 498A: ससुराल में उत्पीड़न
  • Domestic Violence Act 2005: घरेलू हिंसा से रक्षा
  • Section 304B: दहेज-मृत्यु

वर्तमान स्थिति

  • 7,000+ दहेज-संबंधी मृत्यु प्रति वर्ष भारत में (NCRB)
  • शहरों में भी जारी
  • शिक्षित परिवारों में भी

समाधान

  • कठोर कानून-प्रवर्तन
  • सामाजिक जागरूकता
  • स्त्री-शिक्षा का विस्तार
  • आर्थिक स्वतंत्रता
  • 'दहेज नहीं लेंगे, दहेज नहीं देंगे' का संकल्प

8. एकांकी का संदेश

मुख्य संदेश

  1. दहेज-विरोध: यह सामाजिक बुराई समाप्त होनी चाहिए।
  2. स्त्री-शिक्षा का सम्मान: शिक्षित कन्या समाज की संपत्ति।
  3. आत्म-सम्मान: किसी से समझौता मत करो।
  4. साहस का महत्व: सच कहना और रूढ़ियों के विरुद्ध खड़ा होना।
  5. माता-पिता की भूमिका: बेटी को सशक्त बनाना, समाज के दबाव में मत आना।

कौन है 'रीढ़ की हड्डी' वाला?

  • उमा: सबसे मज़बूत रीढ़ — सच बोलती है, समझौता नहीं करती।
  • रामस्वरूप: कमज़ोर रीढ़ — झूठ बोलते हैं, समाज के दबाव में।
  • गोपाल प्रसाद: रीढ़ नहीं — नैतिकता का अभाव।
  • शंकर: रीढ़ नहीं — हल्की मानसिकता।

9. आज की प्रासंगिकता

आधुनिक भारत में

  • दहेज-प्रथा अब भी जारी (शहर-गाँव दोनों)
  • 'शिक्षित लड़की = अधिक दहेज' की मानसिकता आज भी मिलती है
  • 'मेट्रिमोनियल' विज्ञापनों में दहेज का अप्रत्यक्ष उल्लेख
  • कन्या-भ्रूण-हत्या जारी (लिंगानुपात समस्या)

सरकारी प्रयास

  • 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' (2015)
  • Sukanya Samriddhi Yojana
  • Mid-day meal, RTE Act
  • महिला आरक्षण विधेयक 2023 (33%)

आज का संदेश

  • हर लड़की को उमा जैसी 'रीढ़ की हड्डी' चाहिए
  • आर्थिक स्वतंत्रता ज़रूरी
  • माता-पिता बेटी को सशक्त बनाएँ
  • दहेज-प्रथा का सामूहिक विरोध

10. प्रमुख उद्धरण

"क्या आप मुझे एक माल समझते हैं? क्या मेरी 'रीढ़ की हड्डी' नहीं?"

"पढ़ी-लिखी लड़की के लिए अधिक दहेज!" (गोपाल प्रसाद की विकृत मानसिकता)

"ऐसे पुरुष से शादी से बेहतर अकेला रहना।" (उमा)


11. समापन

'रीढ़ की हड्डी' केवल एक एकांकी नहीं — समाज को एक तीखा आईना है। जगदीशचंद्र माथुर ने सरल संवाद-शैली में दहेज-प्रथा, स्त्री-शिक्षा-विरोध, और पुरुष-प्रधान सोच पर सशक्त प्रहार किया है। उमा — एक शिक्षित, आत्म-सम्मानी कन्या — हर भारतीय लड़की के लिए प्रेरणा। 'रीढ़ की हड्डी' का प्रतीक हमें सिखाता है — आत्म-सम्मान सर्वोच्च है, समझौता नहीं। कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए यह पाठ सामाजिक चेतना, स्त्री-सम्मान, और साहस का अद्भुत स्रोत।

Key formulas & results

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लेखक
जगदीशचंद्र माथुर (1917-1978) — एकांकी के प्रमुख रचनाकार
ICS अधिकारी; आकाशवाणी DG
विधा
एकांकी (One-Act Play)
एक अंक, एक दृश्य, एक समय
मूल संग्रह
'रीढ़ की हड्डी' (एकांकी-संग्रह)
मुख्य पात्र
रामस्वरूप, प्रेमा, उमा, गोपाल प्रसाद, शंकर
5 मुख्य पात्र + रतन (नौकर)
केन्द्रीय मुद्दा
दहेज-प्रथा + स्त्री-शिक्षा विरोध + आत्म-सम्मान
प्रतीक
'रीढ़ की हड्डी' = आत्म-सम्मान, साहस, सिद्धांत-निष्ठा
अन्य रचनाएँ
भोर का तारा, कोणार्क, शारदीया, दशरथ नंदन
विरोधी मूल्य
उमा (शिक्षित, साहसी) बनाम गोपाल प्रसाद (लालची, रूढ़िवादी)
⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
एकांकी और नाटक को एक मानना
एकांकी = एक अंक का नाटक (One-Act Play)। नाटक = कई अंक/दृश्य। एकांकी संक्षिप्त, केन्द्रित।
WATCH OUT
उमा की शिक्षा गलत बताना
उमा बी.ए. है — स्नातक। पिता रामस्वरूप ने यह छिपाया था।
WATCH OUT
गोपाल प्रसाद का चरित्र-चित्रण भूलना
गोपाल प्रसाद = संभावित दूल्हे का पिता; दहेज-लोलुप, धूर्त, चालाक; पुरुष-प्रधान मानसिकता का प्रतिनिधि।
WATCH OUT
'रीढ़ की हड्डी' का प्रतीकात्मक अर्थ भूलना
'रीढ़ की हड्डी' = आत्म-सम्मान, साहस, सिद्धांत-निष्ठा। उमा की मज़बूत; रामस्वरूप की कमज़ोर; गोपाल/शंकर की नहीं।

Practice problems

Try each one yourself before tapping "Show solution". Active recall > rereading.

Q1EASY· लेखक
'रीढ़ की हड्डी' एकांकी के लेखक कौन हैं?
Show solution
✦ उत्तर: जगदीशचंद्र माथुर (1917-1978) — हिन्दी एकांकी के प्रमुख रचनाकार, ICS अधिकारी, बाद में आकाशवाणी के महानिदेशक।
Q2EASY· पात्र
उमा की शिक्षा क्या है?
Show solution
✦ उत्तर: बी.ए. (स्नातक) — पर पिता रामस्वरूप ने मेहमानों से यह छिपाया था।
Q3MEDIUM· प्रतीक
'रीढ़ की हड्डी' का प्रतीकात्मक अर्थ स्पष्ट कीजिए।
Show solution
चरण 1 — शाब्दिक अर्थ। 'रीढ़ की हड्डी' = मेरुदंड (spine) — शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग जो मनुष्य को सीधा खड़ा रखता है। चरण 2 — लाक्षणिक अर्थ। आत्म-सम्मान, साहस, सिद्धांत-निष्ठा, नैतिक बल। 'रीढ़ की हड्डी' होना = सीधे खड़े रहना, समझौता न करना। चरण 3 — पाठ में प्रयोग। • उमा की रीढ़ मज़बूत — आत्म-सम्मानी, सच बोलती है, समझौता नहीं • रामस्वरूप की रीढ़ कमज़ोर — समाज के दबाव में झूठ बोलते हैं • गोपाल प्रसाद-शंकर की रीढ़ नहीं — नैतिक रूप से कमज़ोर चरण 4 — संदेश। हर मनुष्य को 'रीढ़ की हड्डी' विकसित करनी चाहिए — अन्याय के सामने झुकना नहीं। ✦ उत्तर: 'रीढ़ की हड्डी' एक प्रतीक है — आत्म-सम्मान, साहस, और सिद्धांत-निष्ठा का। पाठ में उमा 'रीढ़ की हड्डी' वाली है — सच बोलती है, समझौता नहीं करती। शीर्षक स्वयं प्रतीकात्मक — एकांकी का केन्द्रीय संदेश। हर मनुष्य को अन्याय के सामने सीधा खड़ा रहना चाहिए।
Q4MEDIUM· उमा-चरित्र
उमा का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Show solution
चरण 1 — परिचय। उमा रामस्वरूप-प्रेमा की 22 वर्षीय बेटी; बी.ए. (स्नातक); आत्म-सम्मानी कन्या। चरण 2 — गुण। • शिक्षित और बुद्धिमान • आत्म-सम्मानी • साहसी — सच कहती है • स्पष्टवादी • स्वाभिमानी चरण 3 — एकांकी में भूमिका। • अपनी शिक्षा (बी.ए.) पर गर्व • शंकर की असली पहचान सब के सामने बताती है • दहेज-प्रथा का तीखा विरोध • 'क्या मैं माल हूँ? क्या मेरी रीढ़ की हड्डी नहीं?' — साहसी बयान चरण 4 — संदेश। उमा हर शिक्षित-आत्म-सम्मानी भारतीय कन्या का प्रतीक — जो रूढ़ियों से लड़ती है। चरण 5 — समापन। एकांकी की नायिका — स्त्री-सशक्तीकरण का जीवंत उदाहरण। ✦ उत्तर: उमा शिक्षित (बी.ए.), आत्म-सम्मानी, साहसी, स्पष्टवादी कन्या है। 22 वर्ष की उम्र में रूढ़ियों से लड़ती है — दहेज-प्रथा, स्त्री-शिक्षा-विरोध, पुरुष-प्रधान सोच सबका तीखा विरोध। 'क्या मैं माल हूँ?' का साहसी बयान उसे एकांकी की नायिका बनाता है। हर भारतीय कन्या के लिए प्रेरणा।
Q5HARD· सामाजिक-संदेश
इस एकांकी के माध्यम से दहेज-प्रथा और स्त्री-शिक्षा के विरोध पर लेखक के विचार स्पष्ट कीजिए।
Show solution
चरण 1 — दहेज-प्रथा का चित्रण। गोपाल प्रसाद का चरित्र दहेज-प्रथा का जीवंत उदाहरण — वे लड़की को 'माल' की तरह परखते हैं, दहेज को व्यापारिक लेन-देन समझते हैं। चरण 2 — स्त्री-शिक्षा-विरोध। सबसे विकृत मानसिकता — 'पढ़ी-लिखी लड़की के लिए अधिक दहेज!' यह स्त्री-शिक्षा को 'दोष' मानने वाली सोच। चरण 3 — पुरुष-प्रधान समाज। शंकर खुद चरित्रहीन (हॉस्टल में शराब पीता) — पर लड़की पर सवाल। यह दोहरे मानदंड। चरण 4 — माता-पिता की दुविधा। रामस्वरूप-प्रेमा बेटी की शिक्षा छिपाते हैं — समाज के दबाव में। यह 'रीढ़-हीनता'। चरण 5 — उमा का साहसी प्रतिरोध। उमा सच बोलती है, शंकर की पोल खोलती है, अपना अधिकार माँगती है — आत्म-सम्मान की मिसाल। चरण 6 — लेखक का संदेश। • दहेज-प्रथा सामाजिक रोग — समाप्त होना ज़रूरी • स्त्री-शिक्षा सम्मान-योग्य • हर लड़की को 'रीढ़ की हड्डी' चाहिए • माता-पिता को बेटी का साथ देना चाहिए चरण 7 — आज की प्रासंगिकता। Dowry Prohibition Act 1961 के बाद भी समस्या जारी — 7000+ दहेज-मृत्यु प्रति वर्ष। आज भी एकांकी प्रासंगिक। ✦ उत्तर: जगदीशचंद्र माथुर ने दहेज-प्रथा और स्त्री-शिक्षा-विरोध पर तीखा प्रहार किया है। गोपाल प्रसाद के चरित्र से दहेज-लोलुपता, शंकर से दोहरे मानदंड, रामस्वरूप से समाज-दबाव में आत्म-समर्पण, और उमा से प्रतिरोध — सब चित्रित। 'पढ़ी-लिखी लड़की के लिए अधिक दहेज' की विकृत मानसिकता पर सशक्त व्यंग्य। संदेश: हर लड़की को उमा जैसी 'रीढ़ की हड्डी' चाहिए; दहेज-प्रथा का सामूहिक विरोध आवश्यक। आज के भारत में भी पूर्ण प्रासंगिक।

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • लेखक: जगदीशचंद्र माथुर (1917-1978)
  • जन्म: 16 जुलाई 1917, खुर्जा (UP)
  • करियर: ICS अधिकारी, आकाशवाणी के महानिदेशक
  • विधा: एकांकी (One-Act Play)
  • मूल संग्रह: 'रीढ़ की हड्डी' (एकांकी-संग्रह)
  • मुख्य पात्र: रामस्वरूप (पिता), प्रेमा (माँ), उमा (नायिका), गोपाल प्रसाद (दूल्हे का पिता), शंकर (दूल्हा)
  • उमा की शिक्षा: बी.ए. (पिता ने छिपाया)
  • केन्द्रीय मुद्दे: दहेज-प्रथा + स्त्री-शिक्षा विरोध
  • प्रतीक: 'रीढ़ की हड्डी' = आत्म-सम्मान
  • गोपाल प्रसाद: दहेज-लालची, धूर्त
  • शंकर: चरित्रहीन (हॉस्टल में शराब)
  • उमा का साहसी बयान: 'क्या मैं माल हूँ?'
  • अन्य एकांकी: 'भोर का तारा'
  • नाटक: 'कोणार्क', 'शारदीया', 'दशरथ नंदन'

CBSE marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Typical chapter weightage: 4–5 अंक प्रति बोर्ड पेपर

Question typeMarks eachTypical countWhat it tests
बहुविकल्पीय / अति लघु11–2लेखक; पात्र; विधा; प्रतीक
लघु उत्तरीय31उमा-चरित्र; दहेज-प्रथा; रीढ़ की हड्डी का अर्थ
दीर्घ उत्तरीय50–1सामाजिक संदेश; पात्रों का तुलनात्मक अध्ययन; एकांकी की सफलता
Prep strategy
  • लेखक जगदीशचंद्र माथुर — हिन्दी एकांकी के प्रमुख रचनाकार
  • एकांकी विधा को समझें — एक अंक का नाटक
  • 5 मुख्य पात्र: रामस्वरूप, प्रेमा, उमा, गोपाल प्रसाद, शंकर
  • केन्द्रीय मुद्दे: दहेज-प्रथा + स्त्री-शिक्षा विरोध
  • 'रीढ़ की हड्डी' का प्रतीकात्मक अर्थ — आत्म-सम्मान
  • Dowry Prohibition Act 1961 का उल्लेख

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

दहेज-निषेध कानून

1961 का Dowry Prohibition Act; IPC 304B (दहेज-मृत्यु); Domestic Violence Act 2005।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

2015 में लॉन्च सरकारी अभियान — कन्या-शिक्षा को बढ़ावा।

महिला हेल्पलाइन 1091

महिला-संकट के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन — दहेज, घरेलू हिंसा, उत्पीड़न।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

  1. लेखक का परिचय — जगदीशचंद्र माथुर, ICS, आकाशवाणी
  2. एकांकी विधा की पहचान — एक अंक का नाटक
  3. मुख्य पात्रों की संक्षिप्त पहचान
  4. केन्द्रीय मुद्दे: दहेज-प्रथा + स्त्री-शिक्षा
  5. 'रीढ़ की हड्डी' का प्रतीकात्मक अर्थ ज़रूर दें
  6. उमा का चरित्र-चित्रण विस्तार से
  7. दहेज-निषेध कानून (1961) का उल्लेख अंक बढ़ाता है

Going beyond the textbook

For olympiad aspirants and curious learners — topics that build on this chapter.

  • हिन्दी एकांकी का इतिहास — रामकुमार वर्मा, भुवनेश्वर, जगदीशचंद्र माथुर, उपेन्द्रनाथ अश्क
  • Dowry Prohibition Act 1961 का इतिहास और संशोधन (1986)
  • IPC 498A और 304B — दहेज-संबंधी कानूनी प्रावधान
  • नारीवादी एकांकी की परंपरा
  • नाटक बनाम एकांकी — संरचनात्मक अंतर

Where else this chapter is tested

CBSE board isn't the only one — other exams test this chapter too.

CBSE Board Class 9उच्च
हिन्दी ओलिंपियाडमध्यम
UGC NET हिन्दीउच्च — एकांकी विधा
UPSC Sociology Optionalमध्यम — दहेज-प्रथा विषय
CTET हिन्दीमध्यम

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

एकांकी = एक अंक का नाटक (One-Act Play)। एक ही दृश्य, एक ही समय, संक्षिप्त। नाटक = कई अंक/दृश्य, लंबा। एकांकी 30-60 मिनट का होता है, नाटक 2-3 घंटे का। 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी है।

हिन्दी एकांकी के विकास में रामकुमार वर्मा और जगदीशचंद्र माथुर दोनों का बड़ा योगदान। रामकुमार वर्मा को 'हिन्दी एकांकी के पिता' कहा जाता है। जगदीशचंद्र माथुर ने 'भोर का तारा', 'रीढ़ की हड्डी' जैसे महत्वपूर्ण एकांकी रचे।

भारत का दहेज-निषेध कानून (1961) — दहेज लेना और देना दोनों अपराध। 1986 में संशोधन — दहेज-मृत्यु के लिए IPC 304B जोड़ा गया। आज भी समस्या जारी — हर साल 7000+ दहेज-मृत्यु (NCRB)।
Verified by the tuition.in editorial team
Last reviewed on 20 May 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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