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  • 1शमशेर बहादुर सिंह और आधुनिक हिन्दी कविता
  • 2'दूसरा सप्तक' और नई कविता
  • 3हिन्दी-उर्दू भाषाई एकता
  • 4आत्मकथात्मक संस्मरण की विशेषताएँ
  • 5बहुभाषी भारत की समृद्धि
💡
Why this chapter matters
'कवियों का कवि' शमशेर बहादुर सिंह की भाषा-यात्रा — उर्दू-शिक्षित से हिन्दी-कवि बनने तक। हिन्दी-उर्दू भाषाई एकता और बहुभाषी भारत का जीवंत संदेश।

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किस तरह आख़िरकार मैं हिंदी में आया — कक्षा 9 हिन्दी (कृतिका)

"मैं हिंदी में कैसे आया — यह एक लंबी कहानी है। मेरा शुरुआती शिक्षण उर्दू और अंग्रेज़ी में हुआ था। हिन्दी मेरी मातृभाषा होते हुए भी मुझे विधिवत नहीं आती थी।" — शमशेर बहादुर सिंह

1. पाठ-परिचय

'किस तरह आख़िरकार मैं हिंदी में आया' एक आत्मकथात्मक संस्मरण है। आधुनिक हिन्दी के महान कवि शमशेर बहादुर सिंह ने इसमें अपनी हिन्दी-यात्रा का वर्णन किया है। वे उर्दू-शिक्षित थे, हिन्दी विधिवत नहीं जानते थे, फिर भी हिन्दी के सर्वोच्च कवियों में स्थान पाया।

मुख्य भाव

  • हिन्दी-उर्दू भाषाई एकता
  • बहुभाषी भारतीय परंपरा
  • साहित्यिक प्रेरणा का महत्व
  • आत्म-शिक्षा का मूल्य
  • भाषा सीखने में जुनून

2. कवि-परिचय — शमशेर बहादुर सिंह

जीवनवृत्त

  • जन्म: 13 जनवरी 1911, देहरादून (तब उत्तर प्रदेश)
  • मृत्यु: 12 मई 1993, अहमदाबाद
  • उपाधि: 'कवियों का कवि' (Poet's Poet)
  • पुरस्कार: साहित्य अकादमी (1977), कबीर सम्मान (1989)

विशेषताएँ

  • 'कवियों का कवि' — अन्य कवि भी उनकी कविता के दीवाने
  • 'दूसरा सप्तक' (1951, अज्ञेय द्वारा संपादित) के कवि
  • प्रयोगवादी और प्रगतिवादी
  • रहस्यवादी प्रवृत्ति
  • भाषा का असाधारण साधक

प्रमुख रचनाएँ

काव्य-संग्रह:

  • कुछ कविताएँ (1959)
  • कुछ और कविताएँ (1961)
  • चुका भी हूँ नहीं मैं (1975)
  • इतने पास अपने (1980)
  • उदिता (1980)
  • काल तुझसे होड़ है मेरी (1988)

गद्य:

  • कुछ गद्य रचनाएँ : कुछ प्रतिक्रियाएँ (1989)
  • कुछ और गद्य रचनाएँ
  • बात बोलेगी (1980)
  • मेरे साक्षात्कार

प्रसिद्ध कविताएँ

  • 'चुका भी हूँ नहीं मैं'
  • 'अमन का राग'
  • 'टूटी हुई बिखरी हुई'
  • 'बात बोलेगी हम नहीं'

भाषा-शैली

  • हिन्दी-उर्दू-अंग्रेज़ी का अद्भुत मिश्रण
  • रहस्यवादी, बिम्ब-प्रधान
  • कलात्मक, संगीतमय
  • मौलिक प्रयोग

3. पाठ का सारांश

प्रारंभिक जीवन — उर्दू में शिक्षा

बचपन:

  • शमशेर का जन्म देहरादून में हुआ
  • घर में उर्दू-फ़ारसी का माहौल
  • पिता (तरबज) अंग्रेज़ी जानते थे
  • माँ हिन्दी-उर्दू दोनों समझतीं

शिक्षा:

  • उर्दू माध्यम से शुरू
  • फिर अंग्रेज़ी से उच्च शिक्षा
  • हिन्दी मातृभाषा थी, पर विधिवत पढ़ाई नहीं हुई
  • 'अलिफ़-बे-ते' (उर्दू) सीखी, 'क-ख-ग' (हिन्दी) नहीं

प्रारंभिक रुझान — उर्दू कविता

उर्दू में लेखन:

  • शमशेर का पहला लगाव उर्दू कविता से
  • ग़ालिब, मीर, फ़ैज़ का प्रभाव
  • ख़ुद भी उर्दू में कविताएँ लिखीं
  • 'शमशेर' — उर्दू तख़ल्लुस (पेन नेम)

महत्वपूर्ण मोड़ — हिन्दी की ओर

प्रेरणा-स्रोत:

  1. त्रिलोचन शास्त्री: हिन्दी-उर्दू दोनों के विद्वान कवि। शमशेर के निकट मित्र।
  2. निराला: 'दूसरा सप्तक' के कवियों में निराला से प्रेरणा।
  3. अज्ञेय: 'दूसरा सप्तक' (1951) में चयन।
  4. साहित्यिक माहौल: इलाहाबाद में हिन्दी कवियों का संग।

हिन्दी सीखने की यात्रा

शमशेर का प्रयास:

  • 'क-ख-ग' सीखना शुरू किया
  • हिन्दी पुस्तकें पढ़ीं
  • हिन्दी कवियों से संपर्क
  • तुलसी, सूर, मीरा का अध्ययन
  • आधुनिक कवियों (निराला, पंत, महादेवी) का अध्ययन

त्रिलोचन शास्त्री की भूमिका:

  • त्रिलोचन ने उन्हें हिन्दी सिखाई
  • हिन्दी काव्य-परंपरा का परिचय
  • व्याकरण, छंद, अलंकार
  • शब्द-संपदा

'दूसरा सप्तक' में चयन

1951 — अज्ञेय ने 'दूसरा सप्तक' संपादित किया:

  • 7 युवा कवियों का चयन
  • शमशेर भी इनमें थे
  • भारती, धर्मवीर भारती, मुक्तिबोध, नरेश मेहता आदि
  • शमशेर की कविता हिन्दी जगत में स्थापित

हिन्दी में स्थापना

आगे का सफ़र:

  • कविताओं का प्रकाशन
  • हिन्दी पत्रिकाओं में लेख
  • आलोचना भी की
  • विश्वविद्यालयों में पढ़ाया
  • आज हिन्दी के सर्वोच्च कवियों में स्थान

विशेषता — द्विभाषी पहचान

शमशेर का अनोखापन:

  • उर्दू में निपुणता
  • हिन्दी में भी सर्वोच्च
  • उनकी कविताओं में दोनों भाषाओं का सौंदर्य
  • 'भाषा कोई भी हो, कविता वही है'

कविता पर विचार

शमशेर की दृष्टि:

  • कविता सीमाओं से ऊपर
  • हिन्दी-उर्दू एक ही भाषा (भाषाई दृष्टि से)
  • 'हिन्दुस्तानी' = हिन्दी + उर्दू
  • गांधी जी की 'हिन्दुस्तानी' विचार

4. केन्द्रीय भाव और संदेश

मुख्य भाव

  1. भाषाई एकता: हिन्दी-उर्दू दो रूप, एक मूल भाषा।
  2. साहित्यिक प्रेरणा: मित्र, गुरु, कवि-समाज का महत्व।
  3. आत्म-शिक्षा: बड़े कवि भी छात्र की तरह सीखते हैं।
  4. जुनून: हिन्दी से प्रेम — विधिवत शिक्षा न होने पर भी।
  5. बहुभाषी भारत: एक से अधिक भाषाओं का सौंदर्य।

प्रेरक मूल्य

  • कोई भी समय शुरुआत के लिए सही
  • सीखने की कोई उम्र नहीं
  • भाषा के प्रति प्रेम सर्वोच्च
  • अंतर-भाषाई संवाद सुंदर

5. साहित्यिक विशेषताएँ

विधा

  • आत्मकथात्मक संस्मरण
  • व्यक्तिगत यात्रा का वर्णन
  • साहित्यिक आत्मकथा

भाषा

  • सरल खड़ी बोली
  • हिन्दी-उर्दू मिश्रित (कहीं-कहीं)
  • शिष्ट, मार्जित
  • तर्कपूर्ण

शैली

  • वर्णनात्मक
  • विश्लेषणात्मक
  • अनुभव-प्रधान
  • ईमानदार

अलंकार

  • विरोधाभास: उर्दू-शिक्षित, हिन्दी-कवि
  • रूपक: 'हिन्दी की ओर आना' = साहित्यिक यात्रा
  • उद्धरण: अन्य कवियों के उल्लेख

6. हिन्दी-उर्दू भाषाई संदर्भ

एक भाषा, दो रूप

ऐतिहासिक तथ्य:

  • हिन्दी और उर्दू एक ही भाषा (हिन्दुस्तानी) के दो रूप
  • लिपि अलग — देवनागरी बनाम नस्तालीक़
  • शब्दावली का स्रोत अलग — संस्कृत बनाम फ़ारसी-अरबी
  • बोलचाल में लगभग समान

गांधी जी और हिन्दुस्तानी

  • गांधी जी 'हिन्दुस्तानी' (हिन्दी + उर्दू) के समर्थक
  • दोनों लिपियाँ सीखें
  • एकता का प्रतीक

विभाजन का प्रभाव

  • 1947 के बाद हिन्दी (भारत) और उर्दू (पाकिस्तान)
  • भाषाई दूरी राजनैतिक
  • पर साहित्यिक स्तर पर एकता बरकरार

आधुनिक संदर्भ

  • बॉलीवुड में हिन्दी-उर्दू का मिश्रण
  • फ़िल्म-गीतों में दोनों
  • शायरी, ग़ज़ल हिन्दी में भी
  • शमशेर इस एकता के प्रतीक

7. 'दूसरा सप्तक' — महत्वपूर्ण जानकारी

क्या है?

  • 1951 में अज्ञेय द्वारा संपादित कविता-संग्रह
  • 'प्रथम सप्तक' (1943) के बाद
  • 7 युवा कवियों का चयन
  • आधुनिक हिन्दी कविता का मील का पत्थर

कवि

  1. भवानी प्रसाद मिश्र
  2. शकुंत माथुर
  3. हरिनारायण व्यास
  4. नरेश मेहता
  5. रघुवीर सहाय
  6. शमशेर बहादुर सिंह
  7. धर्मवीर भारती

महत्व

  • नई कविता की प्रस्तुति
  • आधुनिक हिन्दी का स्थापन
  • कई कवि बाद में महान बने

8. आधुनिक हिन्दी काव्य और शमशेर का स्थान

आधुनिक हिन्दी काव्य के स्तंभ

  1. छायावाद: निराला, पंत, प्रसाद, महादेवी
  2. प्रगतिवाद: नागार्जुन, त्रिलोचन
  3. प्रयोगवाद: अज्ञेय
  4. नई कविता: मुक्तिबोध, शमशेर, भारती
  5. समकालीन: राजेश जोशी, अरुण कमल

शमशेर का स्थान

  • 'कवियों का कवि' — सर्वोच्च सम्मान
  • भाषा का अनुपम साधक
  • आधुनिक संवेदना के कवि
  • रहस्यवादी प्रवृत्ति

9. प्रमुख उद्धरण

"हिन्दी मेरी मातृभाषा होते हुए भी मुझे विधिवत नहीं आती थी।"

"मेरा शुरुआती शिक्षण उर्दू और अंग्रेज़ी में हुआ था।"

"त्रिलोचन शास्त्री ने मुझे हिन्दी सिखाई।"

"हिन्दी-उर्दू दो रूप, एक मूल भाषा।"


10. आज की प्रासंगिकता

बहुभाषी भारत

  • 22 अनुसूचित भाषाएँ
  • हर बच्चा 2-3 भाषाएँ सीखता है
  • अंग्रेज़ी-हिन्दी-क्षेत्रीय भाषा

हिन्दी-उर्दू आज

  • फ़िल्मों में दोनों का संगम
  • 'गली बॉय', 'राज़ी' जैसी फ़िल्में
  • शायरी-ग़ज़ल का पुनरुत्थान (Rekhta, Jashn-e-Rekhta)
  • युवाओं में दोनों भाषाओं में रुचि

शमशेर का संदेश आज

  • भाषाई भेदभाव त्यागें
  • कई भाषाएँ सीखें
  • साहित्य का प्रेम महान
  • सीखने की कोई उम्र नहीं

11. समापन

'किस तरह आख़िरकार मैं हिंदी में आया' केवल एक संस्मरण नहीं — यह एक भाषा-यात्रा का दस्तावेज़ है। शमशेर बहादुर सिंह ने ईमानदारी से अपनी हिन्दी-यात्रा का वर्णन किया है — उर्दू-शिक्षित कवि का हिन्दी में आना; मित्रों-गुरुओं की भूमिका; और अंत में हिन्दी के सर्वोच्च कवियों में स्थान। यह पाठ हमें सिखाता है — भाषा सीखने में जुनून, मित्रता और साहित्यिक प्रेरणा का महत्व; हिन्दी-उर्दू की मूल एकता; और बहुभाषी भारत की समृद्धि। कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए यह पाठ — भाषाई जागृति, साहित्यिक रुचि, और सांस्कृतिक उदारता का अद्भुत स्रोत।

Key formulas & results

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कवि
शमशेर बहादुर सिंह (1911-1993) — 'कवियों का कवि'
देहरादून में जन्म
मूल शिक्षा
उर्दू और अंग्रेज़ी
हिन्दी विधिवत नहीं सीखी
पुरस्कार
साहित्य अकादमी (1977); कबीर सम्मान (1989)
हिन्दी के गुरु
त्रिलोचन शास्त्री
मित्र और गुरु; हिन्दी सिखाई
'दूसरा सप्तक' (1951)
अज्ञेय द्वारा संपादित; शमशेर इसमें
नई कविता का मील का पत्थर
अन्य 'दूसरा सप्तक' कवि
भवानी प्रसाद मिश्र, शकुंत माथुर, हरिनारायण व्यास, नरेश मेहता, रघुवीर सहाय, धर्मवीर भारती
प्रमुख कविताएँ
'चुका भी हूँ नहीं मैं', 'अमन का राग', 'बात बोलेगी'
विधा
आत्मकथात्मक संस्मरण
⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
शमशेर को केवल हिन्दी कवि मानना
वे द्विभाषी कवि — उर्दू और हिन्दी दोनों में निपुण। उनका तख़ल्लुस 'शमशेर' उर्दू नाम। 'कवियों का कवि' उपाधि — दोनों भाषाओं की गहरी समझ के लिए।
WATCH OUT
'दूसरा सप्तक' का वर्ष गलत
दूसरा सप्तक — 1951। प्रथम सप्तक — 1943। दोनों अज्ञेय द्वारा संपादित।
WATCH OUT
शमशेर का जन्म-स्थान गलत
शमशेर बहादुर सिंह — जन्म 13 जनवरी 1911, देहरादून (तब उत्तर प्रदेश; अब उत्तराखंड)।
WATCH OUT
त्रिलोचन शास्त्री की भूमिका भूलना
त्रिलोचन शास्त्री — शमशेर के मित्र और हिन्दी-गुरु। उन्होंने ही शमशेर को हिन्दी सिखाई — हिन्दी काव्य-परंपरा का परिचय दिया।

NCERT exercises

Every NCERT exercise from this chapter — what it covers and how many questions to expect.

मौखिक
मौखिक
लेखक, संस्मरण, भाषा-यात्रा
4
Questions
लिखित
लिखित
हिन्दी से लगाव, त्रिलोचन की भूमिका, संदेश
5
Questions
भाषा
भाषा
हिन्दी-उर्दू मिश्रण, मुहावरे, संस्मरण-शैली
3
Questions

Practice problems

Work through this chapter's problems as a readiness check — reveal each solution, mark yourself honestly, and get your gap report at the end.

Readiness check

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5 questions~4 min

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • कवि: शमशेर बहादुर सिंह (1911-1993), 'कवियों का कवि'
  • जन्म: 13 जनवरी 1911, देहरादून
  • मूल शिक्षा: उर्दू और अंग्रेज़ी
  • हिन्दी-गुरु: त्रिलोचन शास्त्री
  • 'दूसरा सप्तक' (1951, अज्ञेय संपादित) में चयन
  • अन्य सप्तक-कवि: भवानी प्रसाद मिश्र, शकुंत माथुर, हरिनारायण व्यास, नरेश मेहता, रघुवीर सहाय, धर्मवीर भारती
  • पुरस्कार: साहित्य अकादमी 1977, कबीर सम्मान 1989
  • प्रमुख कविताएँ: 'चुका भी हूँ नहीं मैं', 'अमन का राग', 'बात बोलेगी'
  • विधा: आत्मकथात्मक संस्मरण
  • केन्द्रीय भाव: भाषा-यात्रा, हिन्दी-उर्दू एकता, बहुभाषी भारत
  • गांधी जी का 'हिन्दुस्तानी' विचार
  • मृत्यु: 12 मई 1993, अहमदाबाद

ISC marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Typical chapter weightage: 4–5 अंक प्रति बोर्ड पेपर

Question typeMarks eachTypical countWhat it tests
बहुविकल्पीय / अति लघु11–2कवि; उपाधि; गुरु; सप्तक
लघु उत्तरीय31उर्दू से हिन्दी यात्रा; त्रिलोचन की भूमिका; भाषाई एकता
दीर्घ उत्तरीय50–1बहुभाषी भारत; साहित्यिक प्रेरणा; आज की प्रासंगिकता
Prep strategy
  • शमशेर बहादुर सिंह — 'कवियों का कवि', साहित्य अकादमी 1977
  • मूल शिक्षा: उर्दू और अंग्रेज़ी, हिन्दी विधिवत नहीं
  • त्रिलोचन शास्त्री — हिन्दी-गुरु
  • 'दूसरा सप्तक' (1951, अज्ञेय संपादित)
  • हिन्दी-उर्दू एक भाषा (हिन्दुस्तानी) के दो रूप
  • प्रमुख कविताएँ: 'चुका भी हूँ नहीं मैं', 'अमन का राग'

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

Rekhta Foundation

उर्दू-हिन्दी की समृद्ध परंपरा का संरक्षण — Jashn-e-Rekhta, online platform।

बॉलीवुड में हिन्दी-उर्दू

फ़िल्म-गीतों, संवादों में दोनों भाषाओं का अद्भुत मिश्रण — 'गली बॉय', 'राज़ी', 'पद्मावत'।

हिन्दी विश्व सम्मेलन

हर 3 साल पर — हिन्दी भाषा का अंतर्राष्ट्रीय प्रसार।

त्रिभाषा सूत्र

भारत की शिक्षा-नीति में 3 भाषाएँ (हिन्दी, अंग्रेज़ी, क्षेत्रीय) — बहुभाषी भारत का आधार।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

1
शमशेर का परिचय — 'कवियों का कवि', साहित्य अकादमी 1977
2
उर्दू-हिन्दी यात्रा के मुख्य पड़ाव
3
त्रिलोचन शास्त्री की भूमिका ज़रूर लिखें
4
'दूसरा सप्तक' (1951) का उल्लेख
5
हिन्दी-उर्दू भाषाई एकता पर बल
6
बहुभाषी भारत के संदर्भ में महत्व

Going beyond the textbook

For olympiad aspirants and curious learners — topics that build on this chapter.

STRETCH
'दूसरा सप्तक' के सभी 7 कवियों की पहचान
STRETCH
अज्ञेय का 'सप्तक' विचार और हिन्दी कविता के विकास में योगदान
STRETCH
हिन्दी-उर्दू भाषाई इतिहास — खड़ी बोली, अमीर ख़ुसरो से शमशेर तक
STRETCH
गांधी जी का 'हिन्दुस्तानी' विचार और भाषाई एकता
STRETCH
त्रिलोचन शास्त्री की रचनाएँ — 'धरती' (1945)

Where else this chapter is tested

CBSE board isn't the only one — other exams test this chapter too.

CBSE Board Class 9उच्च
हिन्दी ओलिंपियाडउच्च
UGC NET हिन्दीअति-उच्च — नई कविता विशेष
UGC NET उर्दूमध्यम
CTET हिन्दीमध्यम

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

अन्य कवि भी उनकी कविता को 'श्रेष्ठ' मानते थे। उनकी भाषा-साधना, बिम्ब-कौशल, संगीतमयता अद्भुत थी। निराला, अज्ञेय, मुक्तिबोध जैसे कवि भी उनकी प्रशंसा करते। यही कारण — 'Poet's Poet' (कवियों का कवि)।

1951 में अज्ञेय द्वारा संपादित कविता-संग्रह — 7 युवा कवियों का चयन। 'प्रथम सप्तक' (1943) के बाद। यह 'नई कविता' का मील का पत्थर। शमशेर इसमें एक प्रमुख कवि थे।

भाषाई दृष्टि से — हिन्दी और उर्दू एक ही भाषा (हिन्दुस्तानी) के दो रूप हैं। लिपि अलग (देवनागरी बनाम नस्तालीक़), उच्च-शब्दावली का स्रोत अलग (संस्कृत बनाम फ़ारसी-अरबी)। पर बोलचाल और साहित्य में लगभग समान। राजनैतिक विभाजन ने इन्हें 'दो भाषाएँ' बना दिया।
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