By the end of this chapter you'll be able to…

  • 1बताना कि पत्र और निबन्ध मिलकर 11 अंक के हैं और वे प्रश्नपत्र में कहाँ हैं
  • 2निबन्ध की आधिकारिक शब्द सीमा 200 और अंक-विभाजन 1+6 बताना
  • 3औपचारिक और अनौपचारिक पत्र को पहचानना और दोनों का ढाँचा क्रम से लिखना
  • 4यह जानना कि विषय-पंक्ति केवल औपचारिक पत्र में आती है
  • 5संबोधन और समापन की सही जोड़ी चुनना
  • 6शिकायती पत्र में ठोस तथ्य डालकर उसे विश्वसनीय बनाना
  • 7पाठ्यक्रम में नामित दस निबन्ध विषय-क्षेत्रों को गिनाना
  • 8मॉडल प्रश्नपत्र के विषयों को पाठ्यक्रम के क्षेत्रों से मिलाना
  • 9200 शब्दों को रूपरेखा, प्रस्तावना, विस्तार और उपसंहार में बाँटना
  • 10सीधे विषय और 'या' वाले पक्ष-विपक्ष विषय के अलग-अलग ढाँचे लगाना
  • 11पाँच सामान्य ढाँचों से दसों विषय-क्षेत्रों को ढकना
  • 12पत्र और निबन्ध के लिए समय बाँटना और उन्हें अंत के लिए न छोड़ना
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Why this chapter matters
ग्यारह अंक, और इनमें याद करने को कुछ भी नहीं। गद्यांश, पद्यांश और जीवन परिचय का उत्तर पाठ्यपुस्तक में है; पत्र और निबन्ध में केवल ढाँचा चाहिए। इसीलिए ये सबसे भरोसेमंद अंक हैं — और चूँकि दोनों प्रश्नपत्र में सबसे पीछे हैं, सबसे अधिक छूटने वाले भी। यहाँ शब्द सीमा और अंक-विभाजन बोर्ड के अपने मॉडल प्रश्नपत्र से लिए गए हैं।

पत्र लेखन एवं निबन्ध रचना

"निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए: (शब्द सीमा अधिकतम—200 शब्द) 1+6=7" — यू0पी0 बोर्ड कक्षा-10 हिन्दी, आधिकारिक मॉडल प्रश्नपत्र, प्रश्न 9

1. ग्यारह अंक जो पूरी तरह आपके हाथ में हैं

पाठ्यक्रम की इकाईवार तालिका में यूनिट 4 के तीन हिस्से हैं। दो इस अध्याय के हैं।

यूनिटविषयअंक
4 (i)पत्र लेखन04
4 (ii)व्याकरण07
4 (iii)निबन्ध07

पत्र और निबन्ध मिलाकर 11 अंक — 70 के लिखित प्रश्नपत्र का लगभग छठा हिस्सा।

और यही वह हिस्सा है जो बाकी सबसे अलग है। गद्यांश, पद्यांश, संस्कृत अनुवाद और जीवन परिचय — इन सबका उत्तर आपकी पाठ्यपुस्तक में है। पत्र और निबन्ध में कुछ याद करने को है ही नहीं; यहाँ केवल यह देखा जाता है कि आप ढाँचे में रहकर लिख सकते हैं या नहीं। ठीक इसी कारण यह सबसे भरोसेमंद अंक हैं — और सबसे अधिक बरबाद होने वाले भी।

दो संख्याएँ जो पाठ्यक्रम नहीं बताता, मॉडल प्रश्नपत्र बताता है। ये सीधे बोर्ड के अपने आधिकारिक मॉडल प्रश्नपत्र से हैं —

शब्द सीमाअंक-विभाजन
निबन्ध (प्रश्न 9)अधिकतम 200 शब्द1+6=7
पत्र (प्रश्न 10)नहीं दी गई1+3=4
जीवन परिचय (प्रश्न 6)अधिकतम 80 शब्द3+2=5

दोनों प्रश्नों के अंक दो भागों में बँटे हैं। निबन्ध में 1 और 6, पत्र में 1 और 3। बोर्ड यह नहीं बताता कि कौन-सा भाग किस बात के लिए है — इसलिए यहाँ अनुमान नहीं लगाया जाएगा। जो बात निश्चित है वह इतनी है: उत्तर का एक छोटा भाग अलग से गिना जाता है और बड़ा भाग अलग से। व्यवहार में इसका अर्थ यह है कि केवल विषय-वस्तु लिख देना पूरा उत्तर नहीं है।

2. पत्र लेखन — दो प्रकार, और प्रश्न में दोनों आते हैं

मॉडल प्रश्नपत्र का प्रश्न 10 इस तरह बना है, और यह बनावट हर वर्ष दोहराई जाती है —

"उत्तर मध्य रेलवे को एक ऐसा शिकायती पत्र लिखिए जिसमें ट्रेन में साफ-सफाई और सुविधाएँ न उपलब्ध होने का उल्लेख हो? अथवा अपनी रुचियों का उल्लेख करते हुए अपने मित्र को पत्र लिखिए?"

दोनों विकल्प जान-बूझकर अलग-अलग प्रकार के हैं — पहला औपचारिक, दूसरा अनौपचारिक। इसलिए दोनों का ढाँचा आना ज़रूरी है; एक पर दाँव लगाना काम नहीं करेगा।

दो ढाँचे — अंतर विषय-पंक्ति और समापन का है औपचारिक पत्र अधिकारी, सम्पादक, प्रधानाचार्य सेवा में, पद एवं पता विषय — एक पंक्ति में महोदय / महोदया, सविनय निवेदन है कि … मुख्य बात, तथ्य सहित भवदीय, नाम · पता · दिनांक केवल यहाँ अनौपचारिक पत्र मित्र, भाई, पिता, बहन अपना पता दिनांक प्रिय मित्र / पूज्य पिता जी, कुशल-क्षेम मुख्य बात शुभकामना तुम्हारा अपना / आपका आज्ञाकारी, नाम विषय-पंक्ति नहीं लिखनी पहला काम — पहचानिए कि पत्र किसे लिखा जा रहा है। बाकी सब उसी से तय होता है।

2.1 औपचारिक पत्र का ढाँचा

क्रमक्या लिखेंउदाहरण
1सेवा में,सेवा में,
2पद और पूरा पतामण्डल रेल प्रबंधक, उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज
3विषय — एक पंक्तिविषय — ट्रेन में साफ-सफाई की अव्यवस्था के संबंध में।
4संबोधनमहोदय,
5पहला वाक्यसविनय निवेदन है कि…
6मुख्य बातकब, कौन-सी गाड़ी, क्या असुविधा
7अनुरोधअतः आपसे निवेदन है कि…
8समापनभवदीय,
9नाम, पता, दिनांक

औपचारिक पत्र में सबसे बड़ी गलती विषय-पंक्ति छोड़ देना है। वही एक पंक्ति पूरे पत्र का काम बता देती है, और औपचारिक पत्र की सबसे साफ़ पहचान भी वही है।

दूसरी बात — तथ्य दीजिए। ऊपर वाला प्रश्न 'ट्रेन में साफ-सफाई' कहता है। उत्तर में गाड़ी का नाम या संख्या, यात्रा की तिथि और डिब्बे का नाम लिख दीजिए। शिकायती पत्र में जो जितना ठोस होगा, वह उतना ही असली लगेगा।

2.2 अनौपचारिक पत्र का ढाँचा

क्रमक्या लिखें
1अपना पता (ऊपर दाईं ओर)
2दिनांक
3संबोधन — प्रिय मित्र / पूज्य पिता जी / प्रिय अनुज
4कुशल-क्षेम — मैं यहाँ कुशल हूँ, आशा है आप भी…
5मुख्य बात — जो प्रश्न में माँगा गया है
6शुभकामना — बड़ों को प्रणाम, छोटों को स्नेह
7समापन — तुम्हारा अपना / आपका आज्ञाकारी पुत्र
8नाम

अनौपचारिक पत्र में विषय-पंक्ति नहीं लिखी जाती। यह छोटी-सी बात दोनों प्रकारों को अलग रखती है, और इसी में सबसे अधिक भूल होती है।

संबोधन और समापन की जोड़ी टूटनी नहीं चाहिए।

किसेसंबोधनसमापन
मित्रप्रिय मित्रतुम्हारा अपना
पिता / मातापूज्य पिता जीआपका आज्ञाकारी पुत्र / पुत्री
बड़े भाईपूज्य भ्राता जीआपका अनुज
छोटे भाईप्रिय अनुजतुम्हारा अग्रज
अधिकारीमहोदयभवदीय

2.3 पत्र में समय और लंबाई

पत्र 4 अंक का है और उसका विभाजन 1+3 है। बोर्ड शब्द सीमा नहीं देता, पर अनुपात से चलिए — निबन्ध 7 अंक का है और उसकी सीमा 200 शब्द है, इसलिए पत्र के लिए 100 से 120 शब्द पर्याप्त हैं। पत्र में लंबाई से कुछ नहीं मिलता; ढाँचे का पूरा होना ही सब कुछ है।

3. निबन्ध रचना — 7 अंक, 200 शब्द

मॉडल प्रश्नपत्र का प्रश्न 9 चार विषय देता है और किसी एक पर लिखने को कहता है, अधिकतम 200 शब्द, 1+6=7 अंक

उस वर्ष के चार विषय ये थे —

  1. पर्यावरण प्रदूषण
  2. विज्ञान : अभिशाप या वरदान
  3. यातायात के नियम
  4. जनसंख्या : लाभ या हानि

3.1 विषय कहाँ से आते हैं — यह पहले से लिखा है

यही इस अध्याय की सबसे उपयोगी बात है। पाठ्यक्रम निबन्ध के विषय-क्षेत्र नाम लेकर गिना देता है, इसलिए यह अनुमान का खेल नहीं है। पाठ्यक्रम की पंक्ति शब्दशः यह है —

"निबन्ध रचना (वैज्ञानिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक समस्याएँ एवं जनसंख्या, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, एवं यातायात के नियमों पर आधारित विषय)"

अब इसे मॉडल प्रश्नपत्र के चार विषयों से मिलाइए —

मॉडल प्रश्नपत्र का विषयपाठ्यक्रम का कौन-सा क्षेत्र
पर्यावरण प्रदूषणपर्यावरण
विज्ञान : अभिशाप या वरदानवैज्ञानिक
यातायात के नियमयातायात के नियम
जनसंख्या : लाभ या हानिजनसंख्या

चारों विषय सीधे उसी सूची से उठाए गए हैं। इसका अर्थ है कि तैयारी का दायरा दस क्षेत्रों का है, अनन्त नहीं — वैज्ञानिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक समस्याएँ, जनसंख्या, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, यातायात के नियम।

3.2 निबन्ध का ढाँचा

200 शब्द कैसे बाँटें रूपरेखा 3 से 5 बिंदु शीर्षक के नीचे शब्दों में नहीं गिनी जाती प्रस्तावना ~30 शब्द विषय क्या है और क्यों ज़रूरी विस्तार ~140 शब्द · तीन अनुच्छेद स्वरूप · कारण · प्रभाव या पक्ष · विपक्ष · समाधान उपसंहार ~30 शब्द निष्कर्ष, नई बात नहीं 200 शब्द अधिकतम है, लक्ष्य नहीं — 180 पर पूरा हो जाए तो वहीं रोक दीजिए सीमा पार करना अपने ही दूसरे प्रश्नों का समय खाना है
भागलगभग शब्दक्या हो
रूपरेखागिनती में नहीं3 से 5 बिंदु, शीर्षक के ठीक नीचे
प्रस्तावना30विषय क्या है और आज क्यों महत्त्वपूर्ण है
विस्तार140तीन अनुच्छेद — स्वरूप, कारण, प्रभाव · या पक्ष, विपक्ष, समाधान
उपसंहार30निष्कर्ष; कोई नई बात नहीं

रूपरेखा क्यों लिखें? क्योंकि उत्तर के अंक दो भागों में बँटे हैं (1+6) और रूपरेखा वह चीज़ है जो पूरे उत्तर को एक ढाँचा दे देती है। इसमें आधा मिनट लगता है और यह आपको भटकने से रोकती है। यह मत लिखिए कि वह '1 अंक' के लिए है — बोर्ड ने ऐसा कहीं नहीं कहा।

3.3 दो प्रकार के विषय, दो अलग ढाँचे

मॉडल प्रश्नपत्र के चार विषयों को देखिए तो वे दो तरह के हैं।

सीधा विषय — 'पर्यावरण प्रदूषण', 'यातायात के नियम'। यहाँ ढाँचा है: स्वरूप → कारण → प्रभाव → समाधान

पक्ष-विपक्ष वाला विषय — 'विज्ञान : अभिशाप या वरदान', 'जनसंख्या : लाभ या हानि'। शीर्षक में ही 'या' आ जाता है, और यही चेतावनी है। यहाँ ढाँचा है: एक पक्ष → दूसरा पक्ष → अपना निष्कर्ष

पक्ष-विपक्ष वाले विषय में सबसे बड़ी भूल एक ही पक्ष लिख देना है। 'विज्ञान : अभिशाप या वरदान' में केवल वरदान लिख देना प्रश्न का आधा उत्तर है। दोनों पक्ष लिखिए, फिर उपसंहार में अपना निर्णय दीजिए — प्रायः यह कि दोष विज्ञान का नहीं, उसके उपयोग का है।

3.4 पाँच ढाँचे जो दस क्षेत्रों को ढक लेते हैं

दस विषय-क्षेत्रों के लिए दस निबन्ध रटने की ज़रूरत नहीं। पाँच ढाँचे लगभग सब पर चल जाते हैं।

ढाँचाकिन विषयों परअनुच्छेद
समस्यापर्यावरण प्रदूषण, जनसंख्या, बेरोज़गारीस्वरूप · कारण · दुष्प्रभाव · समाधान
पक्ष-विपक्षविज्ञान, इंटरनेट, मोबाइललाभ · हानि · संतुलित निष्कर्ष
नियम/व्यवस्थायातायात के नियम, स्वच्छतानियम क्या हैं · क्यों बने · न मानने पर · कैसे पालन हो
महत्त्वशिक्षा, स्वास्थ्य, नारी शिक्षाअर्थ · महत्त्व · वर्तमान स्थिति · सुझाव
पर्व/संस्कृतिधार्मिक और सांस्कृतिक विषयपरिचय · परंपरा · आज का स्वरूप · संदेश

3.5 पाँच तैयार रूपरेखाएँ

ढाँचा जान लेना एक बात है, परीक्षा में तीस सेकंड में रूपरेखा उतार देना दूसरी। नीचे पाँचों ढाँचों की एक-एक रूपरेखा दी है — इन्हें विषय बदलकर जैसे का तैसा इस्तेमाल किया जा सकता है।

1. पर्यावरण प्रदूषण (समस्या ढाँचा) प्रस्तावना · प्रदूषण के प्रकार · कारण · दुष्प्रभाव · समाधान · उपसंहार

2. विज्ञान : अभिशाप या वरदान (पक्ष-विपक्ष ढाँचा) प्रस्तावना · विज्ञान के वरदान · विज्ञान के अभिशाप · दोष किसका · उपसंहार

3. यातायात के नियम (नियम ढाँचा) प्रस्तावना · मुख्य नियम · ये नियम क्यों बने · उल्लंघन के परिणाम · जागरूकता के उपाय · उपसंहार

4. शिक्षा का महत्त्व (महत्त्व ढाँचा) प्रस्तावना · शिक्षा का अर्थ · व्यक्ति और समाज के लिए महत्त्व · वर्तमान स्थिति · सुझाव · उपसंहार

5. होली (पर्व ढाँचा) प्रस्तावना · पौराणिक कथा · मनाने की विधि · आज का बदला स्वरूप · संदेश · उपसंहार

इन पाँचों में एक बात समान है — पहला बिंदु सदा प्रस्तावना है और अंतिम सदा उपसंहार। बीच के तीन या चार बिंदु ही विषय के अनुसार बदलते हैं। यही कारण है कि नया विषय आ जाने पर भी घबराने की ज़रूरत नहीं होती: दो बिंदु तो पहले से तय हैं।

दो-तीन तथ्य तैयार रखिए — कोई सरकारी योजना का नाम, कोई प्रसिद्ध पंक्ति, कोई आँकड़ा जो आप सचमुच जानते हों। पर जो संख्या आपको ठीक-ठीक याद न हो, उसे मत लिखिए। गलत आँकड़ा पूरे निबन्ध को कमज़ोर कर देता है, और उसके बिना भी निबन्ध पूरा होता है।

4. दोनों प्रश्नों के लिए समय

लिखित परीक्षा 3 घण्टे की है और उससे पहले 15 मिनट प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए मिलते हैं।

प्रश्नअंकसुझाया समय
पत्र (प्रश्न 10)410 मिनट
निबन्ध (प्रश्न 9)720 मिनट

दोनों को अंत के लिए मत छोड़िए। ये दो प्रश्न प्रश्नपत्र में सबसे पीछे हैं, और यही कारण है कि इनमें सबसे अधिक अंक छूटते हैं — समय बचा नहीं होता। एक व्यावहारिक तरीका यह है कि खण्ड-अ के बीस बहुविकल्पीय प्रश्न जल्दी निपटाकर निबन्ध पहले लिख लिया जाए, जब हाथ थका न हो।

सारांश

  • पत्र 4 अंक का है (यूनिट 4 i) और निबन्ध 7 अंक का (यूनिट 4 iii) — मिलाकर 11 अंक।
  • दोनों खण्ड-ब में हैं और दोनों में कुछ याद करने को नहीं, केवल ढाँचे में लिखना है।
  • आधिकारिक मॉडल प्रश्नपत्र के अनुसार निबन्ध की शब्द सीमा अधिकतम 200 शब्द है।
  • निबन्ध के अंक 1+6=7 और पत्र के 1+3=4 बँटे हैं; बोर्ड यह नहीं बताता कि कौन-सा भाग किसके लिए है।
  • जीवन परिचय वाले प्रश्न की शब्द सीमा 80 शब्द है — तुलना के लिए उपयोगी।
  • पत्र के प्रश्न में औपचारिक और अनौपचारिक दोनों विकल्प आते हैं, इसलिए दोनों ढाँचे आने चाहिए।
  • औपचारिक पत्र — सेवा में, पद-पता, विषय, महोदय, सविनय निवेदन, मुख्य बात, भवदीय, नाम-पता-दिनांक।
  • अनौपचारिक पत्र — अपना पता, दिनांक, प्रिय संबोधन, कुशल-क्षेम, मुख्य बात, शुभकामना, तुम्हारा अपना, नाम।
  • विषय-पंक्ति केवल औपचारिक पत्र में लिखी जाती है, अनौपचारिक में कभी नहीं।
  • संबोधन और समापन की जोड़ी मिलनी चाहिए — महोदय के साथ भवदीय, प्रिय मित्र के साथ तुम्हारा अपना।
  • शिकायती पत्र में तथ्य दीजिए — गाड़ी संख्या, तिथि, डिब्बा — इससे पत्र ठोस बनता है।
  • पत्र में 100 से 120 शब्द पर्याप्त हैं; ढाँचे का पूरा होना लंबाई से अधिक महत्त्वपूर्ण है।
  • निबन्ध के विषय-क्षेत्र पाठ्यक्रम में नाम लेकर लिखे हैं — दस क्षेत्र, अनुमान की ज़रूरत नहीं।
  • मॉडल प्रश्नपत्र के चारों विषय उसी सूची से उठाए गए थे — पर्यावरण, वैज्ञानिक, यातायात, जनसंख्या।
  • निबन्ध का ढाँचा — रूपरेखा, प्रस्तावना (~30), विस्तार (~140), उपसंहार (~30)।
  • रूपरेखा शब्द-गणना में नहीं आती और पूरे उत्तर को दिशा दे देती है।
  • सीधे विषय पर ढाँचा — स्वरूप, कारण, प्रभाव, समाधान।
  • 'या' वाले विषय पर ढाँचा — एक पक्ष, दूसरा पक्ष, अपना निष्कर्ष।
  • पक्ष-विपक्ष वाले विषय में केवल एक पक्ष लिखना आधा उत्तर है।
  • पाँच ढाँचे — समस्या, पक्ष-विपक्ष, नियम, महत्त्व, पर्व — दसों क्षेत्रों को ढक लेते हैं।
  • जो आँकड़ा ठीक-ठीक याद न हो उसे मत लिखिए; निबन्ध उसके बिना भी पूरा होता है।
  • 200 शब्द अधिकतम है, लक्ष्य नहीं — बात पूरी हो जाए तो वहीं रोक दीजिए।
  • निबन्ध को 20 मिनट और पत्र को 10 मिनट दीजिए, और दोनों को अंत के लिए मत छोड़िए।

परिशिष्ट — क्या इस अध्याय का नहीं है

रचना की तैयारी में बहुत-सा ऐसा पढ़ा जाता है जो इस प्रश्नपत्र में आता ही नहीं।

विषयस्थिति
प्रार्थना पत्र, आवेदन पत्र, सम्पादक के नाम पत्रये सब औपचारिक पत्र के ही रूप हैं — ढाँचा वही है, अलग से रटने की ज़रूरत नहीं
संवाद लेखन, विज्ञापन लेखन, सूचना लेखनपाठ्यक्रम में नहीं
अपठित गद्यांश और उस पर आधारित प्रश्नकक्षा-10 के प्रश्नपत्र की सूची में नहीं
सारांश लेखन, भावार्थ, पल्लवनपाठ्यक्रम में नहीं
ई-मेल लेखनपाठ्यक्रम में नहीं
निबन्ध में लंबे उद्धरण और शेर200 शब्द की सीमा में इनके लिए जगह नहीं बचती

एक बात साफ़ कर दें। प्रार्थना पत्र, शिकायती पत्र, आवेदन पत्र और सम्पादक के नाम पत्र — इन्हें अलग-अलग प्रकार मानकर चार ढाँचे रटने की ज़रूरत नहीं है। चारों औपचारिक पत्र हैं और चारों का ढाँचा एक ही है; बदलता केवल पता, विषय-पंक्ति और मुख्य बात है।

Key formulas & results

Everything you need to memorise, in one card. Screenshot this for revision.

रचना के कुल अंक
पत्र 4 + निबन्ध 7 = 11 अंक
70 अंक के लिखित प्रश्नपत्र का लगभग छठा हिस्सा
निबन्ध की शब्द सीमा
अधिकतम 200 शब्द
आधिकारिक मॉडल प्रश्नपत्र, प्रश्न 9। सीमा है, लक्ष्य नहीं
निबन्ध का अंक-विभाजन
1 + 6 = 7
बोर्ड यह नहीं बताता कि कौन-सा भाग किसके लिए है — अनुमान मत लगाइए
पत्र का अंक-विभाजन
1 + 3 = 4
मॉडल प्रश्नपत्र, प्रश्न 10। शब्द सीमा नहीं दी गई
जीवन परिचय की शब्द सीमा
अधिकतम 80 शब्द
प्रश्न 6, 3+2=5। तुलना के लिए — निबन्ध उससे ढाई गुना लंबा है
औपचारिक पत्र का ढाँचा
सेवा में → पद-पता → विषय → महोदय → निवेदन → मुख्य बात → भवदीय → नाम-पता-दिनांक
विषय-पंक्ति इसकी सबसे साफ़ पहचान है
अनौपचारिक पत्र का ढाँचा
अपना पता → दिनांक → प्रिय संबोधन → कुशल-क्षेम → मुख्य बात → शुभकामना → तुम्हारा अपना → नाम
विषय-पंक्ति यहाँ कभी नहीं लिखी जाती
संबोधन-समापन की जोड़ियाँ
महोदय → भवदीय · प्रिय मित्र → तुम्हारा अपना · पूज्य पिता जी → आपका आज्ञाकारी पुत्र
जोड़ी टूटनी नहीं चाहिए
पत्र की व्यावहारिक लंबाई
100 से 120 शब्द
बोर्ड सीमा नहीं देता; ढाँचे का पूरा होना लंबाई से अधिक महत्त्वपूर्ण
निबन्ध के दस विषय-क्षेत्र
वैज्ञानिक · सामाजिक · धार्मिक · सांस्कृतिक · आर्थिक समस्याएँ · जनसंख्या · स्वास्थ्य · शिक्षा · पर्यावरण · यातायात के नियम
पाठ्यक्रम में शब्दशः लिखे हैं — तैयारी का दायरा तय है
200 शब्दों का बँटवारा
रूपरेखा (गिनती में नहीं) + प्रस्तावना 30 + विस्तार 140 + उपसंहार 30
विस्तार तीन अनुच्छेदों में
सीधे विषय का ढाँचा
स्वरूप → कारण → प्रभाव → समाधान
पर्यावरण प्रदूषण, यातायात के नियम जैसे विषयों पर
पक्ष-विपक्ष विषय का ढाँचा
एक पक्ष → दूसरा पक्ष → अपना निष्कर्ष
शीर्षक में 'या' दिखे तो यही ढाँचा — विज्ञान: अभिशाप या वरदान
समय-विभाजन
निबन्ध 20 मिनट · पत्र 10 मिनट
दोनों प्रश्नपत्र में सबसे पीछे हैं, इसलिए इन्हें अंत के लिए मत छोड़िए
⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
अनौपचारिक पत्र में विषय-पंक्ति लिख देना
विषय-पंक्ति केवल औपचारिक पत्र में आती है — वह अधिकारी को एक नज़र में बता देती है कि पत्र किस काम का है। मित्र या पिता को लिखे पत्र में इसकी कोई भूमिका नहीं। पहले तय कीजिए कि पत्र किसे लिखा जा रहा है; बाकी सब उसी से तय होता है।
WATCH OUT
औपचारिक पत्र में विषय-पंक्ति छोड़ देना
यह उल्टी गलती है और इससे भी अधिक आम। विषय-पंक्ति औपचारिक पत्र की सबसे साफ़ पहचान है और एक ही पंक्ति में पूरे पत्र का काम बता देती है। 'विषय — ट्रेन में साफ-सफाई की अव्यवस्था के संबंध में।' इतना लिखने में दस सेकंड लगते हैं।
WATCH OUT
संबोधन और समापन की जोड़ी तोड़ देना
'महोदय' के साथ 'भवदीय' आता है, 'प्रिय मित्र' के साथ 'तुम्हारा अपना', 'पूज्य पिता जी' के साथ 'आपका आज्ञाकारी पुत्र'। मित्र को 'भवदीय' लिखना या अधिकारी को 'तुम्हारा अपना' लिखना पत्र का पूरा स्वर बिगाड़ देता है। जोड़ियाँ एक साथ याद कीजिए, अलग-अलग नहीं।
WATCH OUT
शिकायती पत्र बिना किसी तथ्य के लिख देना
'ट्रेन में गंदगी थी' अपने आप में शिकायत नहीं है। कौन-सी गाड़ी, किस तारीख, कौन-सा डिब्बा — ये तीन बातें पत्र को ठोस बना देती हैं। मॉडल प्रश्नपत्र का प्रश्न स्वयं 'उत्तर मध्य रेलवे' और 'साफ-सफाई और सुविधाएँ' कहकर संकेत दे देता है कि उत्तर में विवरण चाहिए।
WATCH OUT
पक्ष-विपक्ष वाले विषय पर केवल एक पक्ष लिखना
'विज्ञान : अभिशाप या वरदान' में 'या' ही चेतावनी है। केवल वरदान लिख देना आधा उत्तर है। दोनों पक्ष अलग-अलग अनुच्छेदों में लिखिए और उपसंहार में अपना निर्णय दीजिए — प्रायः यह कि दोष विज्ञान का नहीं, उसके उपयोग का है। यही बात 'जनसंख्या : लाभ या हानि' पर भी लागू होती है।
WATCH OUT
निबन्ध 200 शब्द से बहुत आगे बढ़ा देना
मॉडल प्रश्नपत्र साफ़ लिखता है 'शब्द सीमा अधिकतम—200 शब्द'। इससे आगे लिखा हुआ आपके अपने बाकी प्रश्नों का समय खाता है, और परीक्षा 3 घण्टे की है। 180 शब्दों में बात पूरी हो जाए तो वहीं रोक दीजिए — सीमा एक अधिकतम है, कोई लक्ष्य नहीं।
WATCH OUT
रूपरेखा न लिखना
रूपरेखा शब्द-गणना में नहीं आती और आधे मिनट में बन जाती है, पर वह पूरे उत्तर को दिशा दे देती है और आपको भटकने से रोकती है। तीन से पाँच बिंदु शीर्षक के ठीक नीचे लिख दीजिए, फिर उन्हीं के क्रम में लिखिए। ध्यान रहे, यह मत मान लीजिए कि वह '1 अंक' के लिए है — बोर्ड ने ऐसा कहीं नहीं कहा।
WATCH OUT
निबन्ध में याद न रहने वाले आँकड़े लिख देना
गलत संख्या पूरे निबन्ध को कमज़ोर कर देती है, और उसके बिना भी निबन्ध पूरा होता है। जो योजना, पंक्ति या आँकड़ा आपको ठीक-ठीक याद है वही लिखिए। 'लगभग', 'बड़ी संख्या में', 'तेज़ी से बढ़ता हुआ' जैसे शब्द सुरक्षित और स्वीकार्य हैं।
WATCH OUT
पत्र और निबन्ध को सबसे अंत के लिए छोड़ देना
ये प्रश्नपत्र में सबसे पीछे हैं — प्रश्न 9 और 10 — और यही कारण है कि इनमें सबसे अधिक अंक छूटते हैं, क्योंकि समय बचा नहीं होता। खण्ड-अ के बीस बहुविकल्पीय प्रश्न जल्दी निपटाकर निबन्ध पहले लिख लीजिए, जब हाथ थका न हो। ग्यारह अंक जल्दी लिखने से कहीं नहीं जाते।
WATCH OUT
प्रार्थना पत्र, आवेदन पत्र और शिकायती पत्र के अलग-अलग ढाँचे रटना
चारों औपचारिक पत्र हैं और चारों का ढाँचा एक ही है — सेवा में, पद-पता, विषय, महोदय, निवेदन, मुख्य बात, भवदीय। बदलता केवल पता, विषय-पंक्ति और बीच की बात है। चार ढाँचे रटने में जो समय जाता है, वह एक ढाँचे को पक्का करने में लगाइए।
WATCH OUT
निबन्ध के लिए दस अलग-अलग निबन्ध रट लेना
पाठ्यक्रम दस विषय-क्षेत्र देता है, पर उन पर पाँच ढाँचे चल जाते हैं — समस्या, पक्ष-विपक्ष, नियम, महत्त्व और पर्व। किसी भी नए विषय को इन पाँच में से एक में डालिए और ढाँचा तैयार है। रटे हुए निबन्ध तब काम नहीं करते जब विषय ज़रा-सा बदल जाता है।
WATCH OUT
उपसंहार में कोई नई बात जोड़ देना
उपसंहार निष्कर्ष है, विस्तार का हिस्सा नहीं। उसमें वही बात संक्षेप में आनी चाहिए जो ऊपर सिद्ध की गई है, और अधिक से अधिक एक सुझाव या आह्वान। नई जानकारी वहाँ डालने से निबन्ध अधूरा छूटा हुआ लगता है, क्योंकि उस बात को खोलने की जगह अब बची नहीं।

Practice problems

Work through this chapter's problems as a readiness check — reveal each solution, mark yourself honestly, and get your gap report at the end.

Readiness check

Are you exam-ready for पत्र लेखन एवं निबन्ध रचना?

10 problems from this chapter. Try each one, reveal the worked solution, mark yourself honestly — get your gap report at the end.

10 questions~7 min

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • पत्र 4 अंक (यूनिट 4 i) और निबन्ध 7 अंक (यूनिट 4 iii) — मिलाकर 11 अंक
  • दोनों खण्ड-ब में हैं, प्रश्न 10 और प्रश्न 9
  • निबन्ध की आधिकारिक शब्द सीमा अधिकतम 200 शब्द है
  • निबन्ध का अंक-विभाजन 1+6=7 और पत्र का 1+3=4 है
  • बोर्ड यह नहीं बताता कि विभाजन का कौन-सा भाग किस बात के लिए है
  • जीवन परिचय वाले प्रश्न की शब्द सीमा 80 शब्द है
  • पत्र के प्रश्न में औपचारिक और अनौपचारिक दोनों विकल्प आते हैं
  • औपचारिक — सेवा में, पद-पता, विषय, महोदय, सविनय निवेदन, मुख्य बात, भवदीय, नाम-पता-दिनांक
  • अनौपचारिक — अपना पता, दिनांक, प्रिय संबोधन, कुशल-क्षेम, मुख्य बात, शुभकामना, तुम्हारा अपना, नाम
  • विषय-पंक्ति केवल औपचारिक पत्र में लिखी जाती है
  • महोदय के साथ भवदीय, प्रिय मित्र के साथ तुम्हारा अपना, पूज्य पिता जी के साथ आपका आज्ञाकारी पुत्र
  • प्रार्थना, शिकायती, आवेदन और सम्पादक के नाम — चारों औपचारिक पत्र हैं, ढाँचा एक ही
  • शिकायती पत्र में गाड़ी संख्या, तिथि और डिब्बा जैसे ठोस तथ्य डालिए
  • पत्र में 100 से 120 शब्द पर्याप्त हैं; ढाँचा पूरा होना अधिक महत्त्वपूर्ण है
  • निबन्ध के दस विषय-क्षेत्र पाठ्यक्रम में नाम लेकर लिखे हैं
  • क्षेत्र — वैज्ञानिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक समस्याएँ, जनसंख्या, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, यातायात
  • मॉडल प्रश्नपत्र के चारों विषय इसी सूची से उठाए गए थे
  • निबन्ध का ढाँचा — रूपरेखा, प्रस्तावना 30, विस्तार 140, उपसंहार 30
  • रूपरेखा शब्द-गणना में नहीं आती और पूरे उत्तर को दिशा देती है
  • सीधे विषय पर ढाँचा — स्वरूप, कारण, प्रभाव, समाधान
  • शीर्षक में 'या' हो तो ढाँचा — एक पक्ष, दूसरा पक्ष, अपना निष्कर्ष
  • पक्ष-विपक्ष विषय में केवल एक पक्ष लिखना आधा उत्तर है
  • पाँच ढाँचे — समस्या, पक्ष-विपक्ष, नियम, महत्त्व, पर्व — दसों क्षेत्रों को ढक लेते हैं
  • जो आँकड़ा ठीक-ठीक याद न हो उसे मत लिखिए
  • उपसंहार में कोई नई बात नहीं आनी चाहिए, केवल निष्कर्ष
  • 200 शब्द अधिकतम है, लक्ष्य नहीं
  • निबन्ध को 20 मिनट और पत्र को 10 मिनट दीजिए
  • दोनों प्रश्न सबसे पीछे हैं, इसलिए इन्हें अंत के लिए मत छोड़िए

Uttar Pradesh (UPMSP) marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Typical chapter weightage: 11 अंक — यूनिट 4 (i) पत्र लेखन 04 और यूनिट 4 (iii) निबन्ध 07 (पाठ्यक्रम की इकाईवार तालिका)। प्रश्नपत्र में ये खण्ड-ब के प्रश्न 10 और 9 हैं, दोनों वर्णनात्मक।

Question typeMarks eachTypical countWhat it tests
वर्णनात्मक — निबन्ध (खण्ड-ब, प्रश्न 9)1+6=71चार दिए गए विषयों में से एक पर 200 शब्द तक का निबन्ध — रूपरेखा, प्रस्तावना, विस्तार और उपसंहार सहित; विषय पाठ्यक्रम के दस क्षेत्रों से आते हैं
वर्णनात्मक — पत्र (खण्ड-ब, प्रश्न 10)1+3=41औपचारिक अथवा अनौपचारिक पत्र, विकल्प सहित — सही ढाँचा, विषय-पंक्ति, संबोधन-समापन की जोड़ी और विषय-वस्तु
बहुविकल्पीय एवं लघु उत्तरीय — इस यूनिट में बोर्ड नहीं पूछता, समझ जाँचने के लिए10 (अभ्यास हेतु)शब्द सीमा, अंक-विभाजन, पत्र के प्रकार और निबन्ध के ढाँचे — ये तथ्य याद रहने पर लिखते समय निर्णय तेज़ हो जाते हैं
Prep strategy
  • दोनों पत्र-ढाँचे एक कागज़ पर लिखकर सामने रखिए — मिलाकर वे दस पंक्तियों से बड़े नहीं हैं
  • हर अभ्यास-पत्र में संबोधन और समापन की जोड़ी जाँचिए; यहीं सबसे अधिक भूल होती है
  • पाठ्यक्रम के दस विषय-क्षेत्रों की सूची लिखकर हर एक के आगे उपयुक्त ढाँचा लिखिए
  • पाँच ढाँचे तैयार कीजिए — समस्या, पक्ष-विपक्ष, नियम, महत्त्व, पर्व — दस निबन्ध नहीं
  • एक बार 200 शब्द लिखकर गिनिए, ताकि पता चले कि यह कितना होता है; बाद में अंदाज़ा काम करने लगेगा
  • प्रस्तावना और उपसंहार 30-30 शब्द के रखिए और विस्तार को 140 में तीन अनुच्छेदों में बाँटिए
  • शीर्षक में 'या' दिखे तो तुरंत पक्ष-विपक्ष ढाँचा चुनिए — यह निर्णय पहले तीस सेकंड में हो जाना चाहिए
  • दो-तीन ऐसे तथ्य तैयार रखिए जो आप सचमुच जानते हों; याद न रहने वाला आँकड़ा मत लिखिए
  • समय अभ्यास में ही बाँधिए — निबन्ध 20 मिनट, पत्र 10 मिनट, और दोनों को अंत के लिए मत छोड़िए

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

सचमुच का शिकायती पत्र लिखना

सचमुच का शिकायती पत्र लिखना — रेलवे, बिजली विभाग, नगर निगम या विद्यालय को, जहाँ यही ढाँचा काम आता है

छुट्टी या शुल्क-माफ़ी के लिए प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र

छुट्टी या शुल्क-माफ़ी के लिए प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र, जो वही औपचारिक ढाँचा है

किसी भी विषय पर तर्कपूर्ण ढंग से 200 शब्द लिख पाना

किसी भी विषय पर तर्कपूर्ण ढंग से 200 शब्द लिख पाना — यह क्षमता हर परीक्षा और हर नौकरी में काम आती है

यू0पी0 पुलिस

यू0पी0 पुलिस, लेखपाल और यू0पी0एस0एस0एस0सी0 जैसी भर्ती परीक्षाओं का हिन्दी निबन्ध खंड

कक्षा-11 और 12 की हिन्दी में यही रचना-कौशल बड़ी शब्द सीमा…

कक्षा-11 और 12 की हिन्दी में यही रचना-कौशल बड़ी शब्द सीमा के साथ लौटता है

समाचार-पत्र के सम्पादक के नाम पत्र लिखना

समाचार-पत्र के सम्पादक के नाम पत्र लिखना, जो नागरिक के रूप में अपनी बात रखने का सबसे सीधा रास्ता है

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

1
प्रश्नपत्र पढ़ने के 15 मिनट में ही तय कर लीजिए कि निबन्ध किस विषय पर लिखेंगे और पत्र कौन-सा विकल्प चुनेंगे
2
निबन्ध का विषय चुनते समय वह लीजिए जिस पर आपके पास कहने को तीन अनुच्छेद हों, वह नहीं जो सुनने में अच्छा लगे
3
शीर्षक में 'या' है या नहीं — यह पहले तीस सेकंड में देख लीजिए, क्योंकि इसी से पूरा ढाँचा तय होता है
4
रूपरेखा शीर्षक के ठीक नीचे लिखिए, फिर उसी क्रम में चलिए; इससे बीच में भटकाव नहीं होता
5
पत्र में सबसे पहले पहचानिए कि वह औपचारिक है या अनौपचारिक, फिर कागज़ पर ढाँचा उतार लीजिए
6
विषय-पंक्ति और संबोधन-समापन की जोड़ी लिखने के तुरंत बाद एक बार जाँच लीजिए
7
अनुच्छेद अलग-अलग रखिए और उनके बीच जगह छोड़िए — एक ठोस पैराग्राफ पढ़ने में कठिन होता है
8
समय बाँधकर रखिए — निबन्ध 20 मिनट, पत्र 10 मिनट — और दोनों को अंत के लिए मत छोड़िए

Going beyond the textbook

For olympiad aspirants and curious learners — topics that build on this chapter.

STRETCH
मॉडल प्रश्नपत्र के चारों निबन्ध विषय पाठ्यक्रम के दस क्षेत्रों में से चार से आए। बचे छह क्षेत्रों के लिए एक-एक संभावित विषय सोचिए और हर एक की रूपरेखा लिखिए
STRETCH
'विज्ञान : अभिशाप या वरदान' पर दो निबन्ध लिखिए — एक विज्ञान के पक्ष में झुका हुआ, एक विरुद्ध। फिर देखिए कि उपसंहार बदले बिना दोनों संतुलित लग सकते हैं या नहीं
STRETCH
एक ही घटना पर दो पत्र लिखिए — एक रेलवे अधिकारी को औपचारिक, दूसरा मित्र को अनौपचारिक। तुलना कीजिए कि केवल स्वर बदलने से विषय-वस्तु कैसे बदल जाती है
STRETCH
पाठ्यक्रम कहता है कि निबन्ध 'आर्थिक समस्याओं' पर भी आ सकता है। सोचिए कि यह क्षेत्र बाकी नौ से किस तरह अलग है और उस पर कौन-सा ढाँचा चलेगा
STRETCH
200 शब्द की सीमा में एक उद्धरण जोड़ने की लागत निकालिए — वह कितने शब्द खाएगा और उसके बदले कौन-सा तर्क छूटेगा। तय कीजिए कि वह सौदा फ़ायदे का है या नहीं
STRETCH
अपने जिले की किसी वास्तविक समस्या पर नगर निगम को औपचारिक पत्र लिखिए और उसमें तीन ठोस तथ्य डालिए। फिर जाँचिए कि क्या वह सचमुच भेजने लायक है

Where else this chapter is tested

CBSE board isn't the only one — other exams test this chapter too.

यू0पी0 बोर्ड हाईस्कूल परीक्षा — हिन्दी (विषय कोड 901), खण्ड-ब प्रश्न 9 और 10
यू0पी0 बोर्ड के आन्तरिक मूल्यांकन की द्वितीय परीक्षा, जो रचनात्मक लेखन पर आधारित है
यू0पी0 बोर्ड कक्षा-11 और 12 हिन्दी, जहाँ यही रचना बड़ी शब्द सीमा के साथ आती है
यू0पी0 पुलिस, लेखपाल और यू0पी0एस0एस0एस0सी0 पी0ई0टी0 के हिन्दी रचना खंड
सी0टी0ई0टी0 तथा यू0पी0टी0ई0टी0 के हिन्दी भाषा प्रश्नपत्र

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

अधिकतम 200 शब्द — यह बोर्ड के अपने मॉडल प्रश्नपत्र में प्रश्न 9 के साथ छपा है। पर ध्यान रखिए कि यह एक सीमा है, कोई लक्ष्य नहीं। यदि आपकी बात 170 या 180 शब्दों में पूरी हो जाती है तो वहीं रोक दीजिए; भरती के वाक्य जोड़ने से उत्तर कमज़ोर ही होता है। इससे आगे बढ़ना और भी नुकसानदेह है, क्योंकि परीक्षा तीन घण्टे की है और जो समय यहाँ लगेगा वह आपके अपने दूसरे प्रश्नों से कटेगा।

बोर्ड ने इसे अनिवार्य कहीं नहीं कहा, पर लिखना चाहिए और कारण व्यावहारिक है। रूपरेखा शब्द-गणना में नहीं आती, बनाने में आधा मिनट लगता है, और वह आपको लिखते समय भटकने से रोक देती है — जो 200 शब्दों की तंग सीमा में सबसे बड़ा जोखिम है। तीन से पाँच बिंदु शीर्षक के ठीक नीचे लिखिए और फिर उन्हीं के क्रम में चलिए। यह मत मानिए कि वह '1 अंक' के लिए है; बोर्ड ने विभाजन का अर्थ कहीं नहीं बताया।

बोर्ड ने यह कहीं नहीं बताया, और इसीलिए यहाँ अनुमान नहीं लगाया जाएगा। मॉडल प्रश्नपत्र में केवल '1+6=7' छपा है, बिना यह कहे कि 1 किसके लिए है और 6 किसके लिए। जो बात निश्चित रूप से निकलती है वह इतनी है — उत्तर का एक छोटा भाग अलग से गिना जाता है और बड़ा भाग अलग से, यानी केवल विषय-वस्तु लिख देना पूरा उत्तर नहीं है। व्यवहार में इसका अर्थ यही है कि शीर्षक, रूपरेखा और साफ़ अनुच्छेद-विभाजन पर ध्यान दीजिए।

एक ही सवाल पूछिए — पत्र किसे लिखा जा रहा है? यदि किसी अधिकारी, प्रधानाचार्य, सम्पादक या विभाग को, तो पत्र औपचारिक है: 'सेवा में' से शुरू, विषय-पंक्ति ज़रूरी, संबोधन 'महोदय', समापन 'भवदीय'। यदि मित्र, भाई, बहन या माता-पिता को, तो अनौपचारिक है: अपना पता और दिनांक ऊपर, संबोधन 'प्रिय' या 'पूज्य', कुशल-क्षेम से शुरुआत, समापन 'तुम्हारा अपना' या 'आपका आज्ञाकारी'। विषय-पंक्ति यहाँ कभी नहीं आती — यही सबसे साफ़ पहचान है।

नहीं। ये तीनों और सम्पादक के नाम पत्र — चारों औपचारिक पत्र हैं और चारों का ढाँचा बिल्कुल एक है: सेवा में, पद और पता, विषय, महोदय, सविनय निवेदन, मुख्य बात, अनुरोध, भवदीय, नाम-पता-दिनांक। बदलता केवल तीन जगह है — किसे भेजा जा रहा है, विषय-पंक्ति में क्या लिखा है, और बीच के अनुच्छेद में क्या बात है। एक ढाँचा पक्का कर लीजिए, चार रटने की ज़रूरत नहीं।

पाठ्यक्रम स्वयं दस विषय-क्षेत्र नाम लेकर गिना देता है — वैज्ञानिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक समस्याएँ, और जनसंख्या, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण तथा यातायात के नियम। मॉडल प्रश्नपत्र के चारों विषय सीधे इसी सूची से आए थे, इसलिए यह अनुमान का खेल नहीं है। पर दस निबन्ध रटने की ज़रूरत नहीं — पाँच ढाँचे तैयार कीजिए (समस्या, पक्ष-विपक्ष, नियम, महत्त्व, पर्व) और किसी भी नए विषय को उनमें से एक में डाल दीजिए।

तब भी ढाँचा बचा लेता है, और यही रटे हुए निबन्धों पर ढाँचों की जीत है। पहले शीर्षक देखिए — यदि उसमें 'या' है तो पक्ष-विपक्ष ढाँचा लगाइए, नहीं है तो स्वरूप-कारण-प्रभाव-समाधान। फिर रूपरेखा में तीन-चार बिंदु लिख लीजिए। सामान्य समझ से हर विषय पर इतना तो कहा ही जा सकता है कि वह क्या है, आज क्यों चर्चा में है, उससे क्या असर पड़ता है और क्या किया जाना चाहिए। 200 शब्दों के लिए यह पर्याप्त है।

जल्दी लिखिए, अंत में नहीं। ये प्रश्नपत्र में सबसे पीछे हैं — प्रश्न 9 और 10 — और ठीक इसी कारण इनमें सबसे अधिक अंक छूटते हैं: समय बचा नहीं होता और हाथ थक चुका होता है। एक व्यावहारिक क्रम यह है कि खण्ड-अ के बीस बहुविकल्पीय प्रश्न पहले जल्दी निपटा लीजिए, फिर निबन्ध लिख लीजिए, और उसके बाद खण्ड-ब के बाकी वर्णनात्मक प्रश्न। ग्यारह अंक पहले लिख लेने से कहीं नहीं जाते।
Verified by the tuition.in editorial team
Last reviewed on 4 September 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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